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Mahendragarh-Narnaul News: 29 साल बाद मिला शहीद नरेश कुमार को सम्मान, ग्राम सचिवालय हुआ उनके नाम
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फोटो 05: शहीद नरेश कुमार का ग्राम सचिवालय पर किया गया नामकरण का दृश्य। स्रोत: ग्रामीण
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मंडी अटेली। सीआरपीएफ के शहीद जवान चंदपुरा निवासी नरेश कुमार को 29 साल बाद सम्मान मिला है। गांव के सचिवालय का नामकरण शहीद के नाम पर किया गया है। शहीद को सम्मान मिलने से परिवार के साथ अर्धसैनिक बल के जवानों के अलावा ग्रामीणों में खुशी व्याप्त है।
गांव चंदपुरा के तीन शहीद हुए जवानों में दो का नामकरण शहीद रोहताश सीनियर सेकेंडरी स्कूल व शहीद नरेश कुमार का ग्राम सचिवालय में किया जा चुका है जबकि शहीद कृष्ण कुमार का नामकरण गांव के प्राइमरी स्कूल में किए जाने की प्रक्रिया जारी है।
शहीद की वीरांगना शारदा देवी ने नम आंखों से अपने पति की शहादत को याद करते हुए ग्राम पंचायत व जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। शहीद के चचेरे भाई कैप्टन बेदप्रकाश व असिस्टेंट कमांडेंट सतीश कुमार ने बताया कि नरेश कुमार का जन्म 1965 में हुआ था व 1986 में अजमेर स्थित सीआरपीएफ कैंप में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे।
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7 मई 1997 को त्रिपुरा राज्य में उग्रवादियों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। ग्राम सचिवालय पर शहीद का नाम अंकित होने के मौके पर गांव के अनेक गणमान्य लोगों ने शहीद को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया।
पंचायत विभाग के एसडीओ अक्षय कुमार ने बताया कि सक्षम प्राधिकारी के निर्देशानुसार ग्राम सचिवालय चंदपुरा का नामकरण शहीद नरेश कुमार किया गया है।
गांव चंदपुरा के तीन शहीद हुए जवानों में दो का नामकरण शहीद रोहताश सीनियर सेकेंडरी स्कूल व शहीद नरेश कुमार का ग्राम सचिवालय में किया जा चुका है जबकि शहीद कृष्ण कुमार का नामकरण गांव के प्राइमरी स्कूल में किए जाने की प्रक्रिया जारी है।
शहीद की वीरांगना शारदा देवी ने नम आंखों से अपने पति की शहादत को याद करते हुए ग्राम पंचायत व जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। शहीद के चचेरे भाई कैप्टन बेदप्रकाश व असिस्टेंट कमांडेंट सतीश कुमार ने बताया कि नरेश कुमार का जन्म 1965 में हुआ था व 1986 में अजमेर स्थित सीआरपीएफ कैंप में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे।
7 मई 1997 को त्रिपुरा राज्य में उग्रवादियों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। ग्राम सचिवालय पर शहीद का नाम अंकित होने के मौके पर गांव के अनेक गणमान्य लोगों ने शहीद को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया।
पंचायत विभाग के एसडीओ अक्षय कुमार ने बताया कि सक्षम प्राधिकारी के निर्देशानुसार ग्राम सचिवालय चंदपुरा का नामकरण शहीद नरेश कुमार किया गया है।
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गांव चंदपुरा के तीन शहीद हुए जवानों में दो का नामकरण शहीद रोहताश सीनियर सेकेंडरी स्कूल व शहीद नरेश कुमार का ग्राम सचिवालय में किया जा चुका है जबकि शहीद कृष्ण कुमार का नामकरण गांव के प्राइमरी स्कूल में किए जाने की प्रक्रिया जारी है।
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शहीद की वीरांगना शारदा देवी ने नम आंखों से अपने पति की शहादत को याद करते हुए ग्राम पंचायत व जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। शहीद के चचेरे भाई कैप्टन बेदप्रकाश व असिस्टेंट कमांडेंट सतीश कुमार ने बताया कि नरेश कुमार का जन्म 1965 में हुआ था व 1986 में अजमेर स्थित सीआरपीएफ कैंप में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे।
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7 मई 1997 को त्रिपुरा राज्य में उग्रवादियों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। ग्राम सचिवालय पर शहीद का नाम अंकित होने के मौके पर गांव के अनेक गणमान्य लोगों ने शहीद को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया।
पंचायत विभाग के एसडीओ अक्षय कुमार ने बताया कि सक्षम प्राधिकारी के निर्देशानुसार ग्राम सचिवालय चंदपुरा का नामकरण शहीद नरेश कुमार किया गया है।
गांव चंदपुरा के तीन शहीद हुए जवानों में दो का नामकरण शहीद रोहताश सीनियर सेकेंडरी स्कूल व शहीद नरेश कुमार का ग्राम सचिवालय में किया जा चुका है जबकि शहीद कृष्ण कुमार का नामकरण गांव के प्राइमरी स्कूल में किए जाने की प्रक्रिया जारी है।
शहीद की वीरांगना शारदा देवी ने नम आंखों से अपने पति की शहादत को याद करते हुए ग्राम पंचायत व जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। शहीद के चचेरे भाई कैप्टन बेदप्रकाश व असिस्टेंट कमांडेंट सतीश कुमार ने बताया कि नरेश कुमार का जन्म 1965 में हुआ था व 1986 में अजमेर स्थित सीआरपीएफ कैंप में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे।
7 मई 1997 को त्रिपुरा राज्य में उग्रवादियों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। ग्राम सचिवालय पर शहीद का नाम अंकित होने के मौके पर गांव के अनेक गणमान्य लोगों ने शहीद को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया।
पंचायत विभाग के एसडीओ अक्षय कुमार ने बताया कि सक्षम प्राधिकारी के निर्देशानुसार ग्राम सचिवालय चंदपुरा का नामकरण शहीद नरेश कुमार किया गया है।