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हथियार ही नहीं टैरिफ भी युद्ध का माध्यम : कुलपति

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jan 2026 11:20 PM IST
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Not only weapons, tariffs are also a means of war: Vice Chancellor
फोटो संख्या:78- हकेवि में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. अशोक क
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से वार एंड टैरिफः रिविजिटिंग ग्लोबलाइजेशन इन ए फ्रेग्मेंटेड वर्ल्ड ऑर्डर विषय पर केंद्रित दो दिवसीय सेमिनार की शुरुआत हुई। आयोजन में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. (एमेरिटस) अशोक कौल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने की। कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने युद्ध, ऊर्जा व तकनीकी विकास के आपसी संबंधों पर प्रकाश डालते हुए आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को रेखांकित किया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध व टैरिफ वार पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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एक समय था जब युद्ध केवल हथियारों के सहारे एक निर्धारित रणक्षेत्र में लडे़ जाते थे। लेकिन अब परिस्थिति बिलकुल बदल चुकी है व ऐसे में विश्व में हो रहा टैरिफ वार अपने तरह का एक युद्ध है। मौजूदा समय में अमेरिका का रूख हमें विश्व स्तर पर युद्ध व टैरिफ वार दोनों का ही प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत कर रहा है व विभिन्न देश इससे निपटने के उपाय भी कर रहे हैं।
भारत के द्वारा यूरोपियन यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौता ऐसा ही एक प्रयास है। कुलपति ने कहा कि अवश्य ही इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों, शोद्यार्थियों को इस विषय को गहराई से जानने समझने का अवसर प्राप्त होगा।
प्रो. अशोक कौल ने संबोधन में वैश्विक राजनीतिक ऐतिहासिक व समाजशास्त्रीय आयामों पर विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने वेस्टफेलिया संधि के माध्यम से राष्ट्र-राज्य प्रणाली के उद्भव, सीमाओं व पहचान की अवधारणा के विकास पर चर्चा की।
साथ ही उन्होंने प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्धों के संदर्भ में आधुनिक धारणाओं की विफलता, विचारधाराओं के क्षरण व समकालीन राजनीति में व्यक्तित्व-पूजा के उभार को रेखांकित किया।
प्रो. पायल कंवर चंदेल ने स्वागत भाषण में समकालीन वैश्विक परिदृश्य में युद्ध, टैरिफ व वैश्वीकरण के बदलते स्वरूप की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
प्रो. राजीव कुमार सिंह ने संगोष्ठी की विषयवस्तु एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए भारतीय परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने तुलसीदास व कौटिल्य के विचारों के माध्यम से बढ़ते युद्ध व्यय और वैश्विक भूख जैसी समस्याओं के बीच अंतर्विरोध को स्पष्ट किया।
कार्यक्रम में जियोपॉलिटिक्स एंड फ्रेग्मेंटेशन ऑफ ग्लोबल ऑर्डर विषय पर प्लेनरी सत्र का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से डॉ. अमित सिंह सेंट जेवियर कॉलेज रांची, डॉ. श्रेया पांडे व डॉ. धीरज मणि पाठक, जेआईआईटी नोएडा से डॉ. आलोक कुमार सिंह ने समकालीन भू-राजनीतिक संघर्षों पर प्रभावों का विश्लेषण किया।
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