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Mahendragarh-Narnaul News: मेडिकल कॉलेज में बिजली सप्लाई के लिए टेंडर जारी, वन विभाग की एनओसी का इंतजार
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फोटो 6कोरियावास मेडिकल कॉलेज में मरीजों की जांच करते चिकित्सक।संवाद
- फोटो : सांकेतिक
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नारनौल। कोरियावास मेडिकल कॉलेज के लिए बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 132 केवी सब-स्टेशन नारनौल में 33 केवी की एक नई बे का निर्माण किया जाएगा। इसको लेकर बिजली विभाग की तरफ से टेंडर भी जारी किया जा चुका है लेकिन वन विभाग की तरफ से एनओसी नहीं मिलने की वजह से कार्य बीच में अटका हुआ है।
जब तक बिजली सप्लाई नहीं होगी तब तक मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा भी नहीं मिल सकेगी। इसके लिए बिजली निगम ने डिपॉजिट एस्टीमेट तैयार कर लिया है।
बिजली निगम की ओर से तैयार प्रस्ताव के अनुसार निर्माण कार्य पर करीब 3,16,640 रुपये की लागत आने का अनुमान है। यह कार्य मेडिकल कॉलेज को स्थायी और निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
33 केवी बे एक सबस्टेशन में 33,000 वोल्ट की बिजली लाइनों को नियंत्रित करने वाला स्विचगियर पैनल है जिसमें आम तौर पर वैक्यूम सर्किट ब्रेकर, बस-बार और आइसोलेटर होते हैं। यह 33केवी उप-पारेषण लाइनों और औद्योगिक/ग्रामीण वितरण में 30 किमी तक की दूरी के लिए प्रयुक्त मुख्य सुरक्षा उपकरण है।
कोरियावास गांव में जा रही बिजली लाइन से हो रही अभी बिजली सप्लाई
मेडिकल कॉलेज में फिलहाल गांव कोरियावास गांव में जा रही बिजली लाइन से सप्लाई की जा रही है। लाइन में फॉल्ट और पावर कट के कारण नियमित रूप से बिजली की सप्लाई नहीं बन पाती। वही सिटी स्कैन, एमआरआई व अल्ट्रासाउंड सहित अन्य जांचों के लिए उच्च वोल्टेज व नियमित बिजली सप्लाई चाहिए। कम वोल्टेज व बार-बार कट लगने से जांच प्रभावित हो रही है।
ओपीडी शुरू लेकिन जांच बाहर से
मेडिकल कॉलेज में 10 माह पहले ओपीडी शुरू की गई थी लेकिन अभी केवल रक्त, बीपी, पेशाब आदि की लैब जांच की जा रही है। अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन व एमआरआई जैसी जांच की मशीनें होने के बाद भी मरीजों का बाहर से जांच करवानी पड़ रही है।
स्वतंत्र फीडर से मिलेगा बिजली कनेक्शन
मेडिकल कॉलेज को बिजली आपूर्ति के लिए 33 केवी का इंडिपेंडेंट फीडर बनाया जाएगा। इससे कॉलेज परिसर में बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और भरोसेमंद हो सकेगी जिससे अस्पताल और शैक्षणिक गतिविधियों पर असर नहीं पड़ेगा।
ढाणी बाठोठा लाइन शिफ्ट होने से खाली हुई बे
जानकारी के अनुसार 33 केवी ढाणी बाठोठा फीडर को 220 केवी सब-स्टेशन नारनौल से 132 केवी सब-स्टेशन सेका में शिफ्ट किया गया है। इसके चलते खाली हुई 33 केवी बे का उपयोग मेडिकल कॉलेज को बिजली आपूर्ति के लिए किया जाएगा।
7000 किलोवाट स्वीकृत लोड
गांव कोरियावास स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज के लिए 7000 किलोवाट स्वीकृत लोड व लगभग 7778 केवीए कनेक्टेड डिमांड निर्धारित की गई है। नई बे और स्वतंत्र फीडर बनने से कॉलेज को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सकेगी।
वर्जन:
33 केवी लाइन का कार्य कंस्ट्रक्शन विंग की ओर से किया जा रहा है। काम का टेंडर जारी हो चुका है लेकिन वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण कार्य रुका हुआ है। अभी मामला केंद्र सरकार व वन विभाग के बीच विचाराधीन है। -जोगेंद्र हुड्डा, अधीक्षक अभियंता, बिजली निगम, नारनौल।
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जब तक बिजली सप्लाई नहीं होगी तब तक मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा भी नहीं मिल सकेगी। इसके लिए बिजली निगम ने डिपॉजिट एस्टीमेट तैयार कर लिया है।
बिजली निगम की ओर से तैयार प्रस्ताव के अनुसार निर्माण कार्य पर करीब 3,16,640 रुपये की लागत आने का अनुमान है। यह कार्य मेडिकल कॉलेज को स्थायी और निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
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33 केवी बे एक सबस्टेशन में 33,000 वोल्ट की बिजली लाइनों को नियंत्रित करने वाला स्विचगियर पैनल है जिसमें आम तौर पर वैक्यूम सर्किट ब्रेकर, बस-बार और आइसोलेटर होते हैं। यह 33केवी उप-पारेषण लाइनों और औद्योगिक/ग्रामीण वितरण में 30 किमी तक की दूरी के लिए प्रयुक्त मुख्य सुरक्षा उपकरण है।
कोरियावास गांव में जा रही बिजली लाइन से हो रही अभी बिजली सप्लाई
मेडिकल कॉलेज में फिलहाल गांव कोरियावास गांव में जा रही बिजली लाइन से सप्लाई की जा रही है। लाइन में फॉल्ट और पावर कट के कारण नियमित रूप से बिजली की सप्लाई नहीं बन पाती। वही सिटी स्कैन, एमआरआई व अल्ट्रासाउंड सहित अन्य जांचों के लिए उच्च वोल्टेज व नियमित बिजली सप्लाई चाहिए। कम वोल्टेज व बार-बार कट लगने से जांच प्रभावित हो रही है।
ओपीडी शुरू लेकिन जांच बाहर से
मेडिकल कॉलेज में 10 माह पहले ओपीडी शुरू की गई थी लेकिन अभी केवल रक्त, बीपी, पेशाब आदि की लैब जांच की जा रही है। अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन व एमआरआई जैसी जांच की मशीनें होने के बाद भी मरीजों का बाहर से जांच करवानी पड़ रही है।
स्वतंत्र फीडर से मिलेगा बिजली कनेक्शन
मेडिकल कॉलेज को बिजली आपूर्ति के लिए 33 केवी का इंडिपेंडेंट फीडर बनाया जाएगा। इससे कॉलेज परिसर में बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और भरोसेमंद हो सकेगी जिससे अस्पताल और शैक्षणिक गतिविधियों पर असर नहीं पड़ेगा।
ढाणी बाठोठा लाइन शिफ्ट होने से खाली हुई बे
जानकारी के अनुसार 33 केवी ढाणी बाठोठा फीडर को 220 केवी सब-स्टेशन नारनौल से 132 केवी सब-स्टेशन सेका में शिफ्ट किया गया है। इसके चलते खाली हुई 33 केवी बे का उपयोग मेडिकल कॉलेज को बिजली आपूर्ति के लिए किया जाएगा।
7000 किलोवाट स्वीकृत लोड
गांव कोरियावास स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज के लिए 7000 किलोवाट स्वीकृत लोड व लगभग 7778 केवीए कनेक्टेड डिमांड निर्धारित की गई है। नई बे और स्वतंत्र फीडर बनने से कॉलेज को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सकेगी।
वर्जन:
33 केवी लाइन का कार्य कंस्ट्रक्शन विंग की ओर से किया जा रहा है। काम का टेंडर जारी हो चुका है लेकिन वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण कार्य रुका हुआ है। अभी मामला केंद्र सरकार व वन विभाग के बीच विचाराधीन है। -जोगेंद्र हुड्डा, अधीक्षक अभियंता, बिजली निगम, नारनौल।