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Palwal News: 1100 टीबी मरीजों को नहीं मिल रही पोषण सहायता राशि
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टीबी की जांच कराते मरीज। फाइल फोटो
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करीब छह महीने से अटकी निक्षय योजना की राशि,
मरीजों की बढ़ी चिंता, विभाग जून अंत तक भुगतान का कर रहा दावा
विपिन सैनी
पलवल। टीबी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे जिले के सैकड़ों मरीजों को सरकार की निक्षय पौष्टिक योजना का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है। करीब छह महीनों से बड़ी संख्या में मरीजों के खातों में पोषण सहायता की राशि नहीं पहुंची है। इससे मरीजों को इलाज के साथ-साथ आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
जिले में करीब 2200 सक्रिय टीबी मरीज पंजीकृत हैं। इन मरीजों को उपचार के दौरान पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए निक्षय पौष्टिक योजना के तहत हर महीने एक हजार रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से दी जाती है। लेकिन मार्च माह के अंत में डीबीटी का बजट समाप्त होने के बाद भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हो गई। नया बजट समय पर जारी नहीं होने से सैकड़ों मरीज योजना के लाभ से वंचित रह गए।
मरीजों का कहना है कि बीमारी के दौरान पौष्टिक भोजन की जरूरत सबसे अधिक होती है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। स्थिति यह है कि जिले के करीब आधे मरीजों को ही भुगतान मिल पाया है, जबकि लगभग 1100 मरीज अब भी राशि का इंतजार कर रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बजट की कमी के अलावा तकनीकी समस्याएं भी भुगतान में बाधा बनी हुई हैं। कई मरीजों के मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं हैं, कुछ के पास मोबाइल फोन नहीं हैं और कुछ लाभार्थियों के बैंक खाते तक नहीं हैं।
मरीजों से बातचीत
कई महीनों से राशि नहीं मिली। दवाइयों के साथ अच्छा भोजन लेना जरूरी है, लेकिन आर्थिक तंगी से परेशानी बढ़ी है। -राजेश कुमार
सरकार की मदद समय पर मिले तो काफी राहत मिल सकती है। आहार के लिए पैसे नहीं मिलने से मुश्किलें बढ़ गई हैं। -गुलाब सिंह
सहायता राशि नहीं मिलने से समस्या आ रही है। पहले ही पैसे की कमी है। बीमारी के दौरान खर्च पहले की तुलना में बढ़ गया है। महेश
कब पैसा मिलेगा, इसकी स्पष्ट जानकारी भी नहीं मिल रही। हम काफी महीनों से पैसे का लगातार इंतजार कर रहे हैं। -रमेश चंद
अधिकारी का वर्जन
जून में डीबीटी की राशि प्राप्त हो चुकी है। करीब 2200 मरीजों में से लगभग 1100 मरीजों को भुगतान किया जा चुका है। शेष 1100 मरीजों को भी जून के अंत तक लंबित राशि जारी कर दी जाएगी। कुछ मामलों में मोबाइल नंबर, आधार लिंकिंग और बैंक खाते से संबंधित समस्याओं के कारण देरी हो रही है। -डॉ. संजीव तंवर, डिप्टी सिविल सर्जन (टीबी)
मरीजों की बढ़ी चिंता, विभाग जून अंत तक भुगतान का कर रहा दावा
विपिन सैनी
पलवल। टीबी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे जिले के सैकड़ों मरीजों को सरकार की निक्षय पौष्टिक योजना का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है। करीब छह महीनों से बड़ी संख्या में मरीजों के खातों में पोषण सहायता की राशि नहीं पहुंची है। इससे मरीजों को इलाज के साथ-साथ आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
जिले में करीब 2200 सक्रिय टीबी मरीज पंजीकृत हैं। इन मरीजों को उपचार के दौरान पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए निक्षय पौष्टिक योजना के तहत हर महीने एक हजार रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से दी जाती है। लेकिन मार्च माह के अंत में डीबीटी का बजट समाप्त होने के बाद भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हो गई। नया बजट समय पर जारी नहीं होने से सैकड़ों मरीज योजना के लाभ से वंचित रह गए।
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मरीजों का कहना है कि बीमारी के दौरान पौष्टिक भोजन की जरूरत सबसे अधिक होती है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। स्थिति यह है कि जिले के करीब आधे मरीजों को ही भुगतान मिल पाया है, जबकि लगभग 1100 मरीज अब भी राशि का इंतजार कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बजट की कमी के अलावा तकनीकी समस्याएं भी भुगतान में बाधा बनी हुई हैं। कई मरीजों के मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं हैं, कुछ के पास मोबाइल फोन नहीं हैं और कुछ लाभार्थियों के बैंक खाते तक नहीं हैं।
मरीजों से बातचीत
कई महीनों से राशि नहीं मिली। दवाइयों के साथ अच्छा भोजन लेना जरूरी है, लेकिन आर्थिक तंगी से परेशानी बढ़ी है। -राजेश कुमार
सरकार की मदद समय पर मिले तो काफी राहत मिल सकती है। आहार के लिए पैसे नहीं मिलने से मुश्किलें बढ़ गई हैं। -गुलाब सिंह
सहायता राशि नहीं मिलने से समस्या आ रही है। पहले ही पैसे की कमी है। बीमारी के दौरान खर्च पहले की तुलना में बढ़ गया है। महेश
कब पैसा मिलेगा, इसकी स्पष्ट जानकारी भी नहीं मिल रही। हम काफी महीनों से पैसे का लगातार इंतजार कर रहे हैं। -रमेश चंद
अधिकारी का वर्जन
जून में डीबीटी की राशि प्राप्त हो चुकी है। करीब 2200 मरीजों में से लगभग 1100 मरीजों को भुगतान किया जा चुका है। शेष 1100 मरीजों को भी जून के अंत तक लंबित राशि जारी कर दी जाएगी। कुछ मामलों में मोबाइल नंबर, आधार लिंकिंग और बैंक खाते से संबंधित समस्याओं के कारण देरी हो रही है। -डॉ. संजीव तंवर, डिप्टी सिविल सर्जन (टीबी)