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Panchkula News: इनोवा लूटकांड में बूटा सिंह बरी, पहचान न होने से कमजोर पड़ा केस

Mon, 03 Aug 2026 01:47 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 03 Aug 2026 01:47 AM IST
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Buta Singh acquitted in Innova robbery case; case weakened due to failure to identify him.
अदालत ने कहा- आरोपी की संलिप्तता साबित नहीं कर सका अभियोजन, न बरामदगी हुई और न मिले ठोस साक्ष्य
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। वर्ष 2017 के चर्चित इनोवा लूटकांड में जिला अदालत ने पंजाब के मोगा निवासी बूटा सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की संलिप्तता को ठोस साक्ष्यों के आधार पर साबित करने में विफल रहा। मामले के मुख्य गवाह चालक ने भी अदालत में आरोपी की पहचान करने से इनकार कर दिया, जिससे अभियोजन का मामला कमजोर पड़ गया।
मामले के अनुसार 8 अक्तूबर 2017 की रात सेक्टर-10 स्थित एक होटल के बाहर खड़ी इनोवा कार को चार बदमाशों ने हथियार के बल पर लूट लिया था। आरोपियों ने चालक अनूप कुमार को बंधक बनाया और बाद में रेलवे पुल के पास एक पेड़ से बांध दिया। इसके बाद आरोपी इनोवा, नकदी, पर्स, एटीएम कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और वैज्ञानिकों के उपकरण लेकर फरार हो गए थे।
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घटना के बाद सेक्टर-5 थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पंजाब के एक अन्य मामले में गिरफ्तार हरसिमरन सिंह, अजयपाल सिंह और रंजीत सिंह को इस केस में नामजद किया गया था। बाद में फरार चल रहे बूटा सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।
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अदालत में पलट गया मुख्य गवाह
सुनवाई के दौरान चालक अनूप कुमार ने अदालत में कहा कि वह कटघरे में खड़े व्यक्ति को वारदात में शामिल व्यक्ति के रूप में नहीं पहचानता। उसने पुलिस की पहचान प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उससे खाली कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए थे। अदालत ने अपने फैसले में माना कि बूटा सिंह के कब्जे से न तो लूटी गई इनोवा बरामद हुई और न ही वारदात से जुड़ा कोई अन्य सामान मिला। इसके अलावा जांच में किसी स्वतंत्र गवाह को भी शामिल नहीं किया गया।


केवल खुलासा बयान के आधार पर दोष सिद्ध नहीं
अदालत ने कहा कि केवल खुलासा बयान और पुलिस दस्तावेजों के आधार पर किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा, इसलिए उसे संदेह का लाभ दिया जाता है। मामले में आरोपी अजयपाल सिंह की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है, जबकि हरसिमरन सिंह और रंजीत सिंह को अदालत पहले ही भगोड़ा घोषित कर चुकी है। फरार आरोपियों के खिलाफ मामले की कार्रवाई जारी रहेगी।
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