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Panchkula News: बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के चल रहे व्यावसायिक वाहन, ऑडिट ने उठाए सवाल
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चंडीगढ़। पंजाब में सड़क पर बिना फिटनेस सर्टिफिकेट व्यावसायिक वाहन चल रहे हैं जिस पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की मार्च 2024 तक की रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं कि यह लोगों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। परिवहन विभाग ने अपने जवाब में कहा है कि इसे लेकर सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों और राज्य परिवहन प्राधिकरण को निर्देश जारी किए गए हैं कि वाहनों की फिटनेस को लेकर सख्ती से नियमों की पालना की जानी चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अनुसार, व्यावसायिक वाहन जब तक पंजीकृत नहीं माना जाता है जब तक कि उसके पास फिटनेस सर्टिफिकेट न हो।
इसी तरह केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत आठ साल तक व्यावसायिक वाहनों को हर दो साल और आठ साल से ज्यादा पुराने वाहनों को हर साल फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करना जरूरी है। ई-रिक्शा और ई-कार्ट के मामले में फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करने की अवधि तीन साल है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने 2019-20 से 2023-24 की अवधि के लिए चुने गए चार क्षेत्रीय परिवहन दफ्तरों और राज्य परिवहन प्राधिकरण के संबंध में वाहन से डाउनलोड की गई फिटनेस एक्सपायर्ड रिपोर्ट का विश्लेक्षण किया तो सामने आया कि फिटनेस की अवधि पूरी कर चुके सर्टिफिकेट वाले 6665 वाहनों ने प्रदूषण सर्टिफिकेट प्राप्त किया है।
इनमें 90 वाहनों की नमूना जांच की गई जिसमें 40 मामलों में प्रदूषण प्रमाण पत्र वाहनों ने फिटनेस सर्टिफिकेट की अवधि खत्म करने के प्राप्त किए थे। इससे साफ है कि ये वाहन बिना फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू करवाए सड़कों पर दौड़ते रहे जिस पर महालेखा परीक्षक ने चिंता जताई है।
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रिपोर्ट के अनुसार मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अनुसार, व्यावसायिक वाहन जब तक पंजीकृत नहीं माना जाता है जब तक कि उसके पास फिटनेस सर्टिफिकेट न हो।
इसी तरह केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत आठ साल तक व्यावसायिक वाहनों को हर दो साल और आठ साल से ज्यादा पुराने वाहनों को हर साल फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करना जरूरी है। ई-रिक्शा और ई-कार्ट के मामले में फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करने की अवधि तीन साल है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने 2019-20 से 2023-24 की अवधि के लिए चुने गए चार क्षेत्रीय परिवहन दफ्तरों और राज्य परिवहन प्राधिकरण के संबंध में वाहन से डाउनलोड की गई फिटनेस एक्सपायर्ड रिपोर्ट का विश्लेक्षण किया तो सामने आया कि फिटनेस की अवधि पूरी कर चुके सर्टिफिकेट वाले 6665 वाहनों ने प्रदूषण सर्टिफिकेट प्राप्त किया है।
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इनमें 90 वाहनों की नमूना जांच की गई जिसमें 40 मामलों में प्रदूषण प्रमाण पत्र वाहनों ने फिटनेस सर्टिफिकेट की अवधि खत्म करने के प्राप्त किए थे। इससे साफ है कि ये वाहन बिना फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू करवाए सड़कों पर दौड़ते रहे जिस पर महालेखा परीक्षक ने चिंता जताई है।