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Panchkula News: पीएयू लुधियाना में शिक्षकों की भर्ती में आरक्षण विवाद पहुंचा हाईकोर्ट, नोटिस जारी
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चंडीगढ़। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) लुधियाना में शिक्षकों की भर्ती में आरक्षण लागू न किए जाने के मुद्दे पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जनहित याचिका पर नोटिस जारी कर 23 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
पीएयू के सेवानिवृत्त अकाउंट्स अधिकारी स्वर्ण सिंह ने दाखिल याचिका में कहा गया है कि विश्वविद्यालय गैर-शिक्षण पदों पर भर्ती के दौरान अनुसूचित जाति (एससी) और पिछड़ा वर्ग (बीसी) के लिए आरक्षण लागू करता है। विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के दौरान भी इन वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है लेकिन शिक्षकों की भर्ती के मामले में विश्वविद्यालय का रवैया विपरीत है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि पीएयू एक राज्य विश्वविद्यालय है और ऐसे संस्थान को आरक्षण नीति से अलग रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। विश्वविद्यालय का बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट इस मुद्दे पर एक वर्ष से टालमटोल की नीति अपना रहा है। बोर्ड की बैठकों में बार-बार किसी न किसी बहाने से इस विषय को स्थगित कर दिया जाता है जिससे आरक्षण लागू करने का निर्णय आगे नहीं बढ़ पा रहा।
याची ने कहा कि चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, जिसे उसी अधिनियम के तहत स्थापित किया गया है वहां शिक्षकों की भर्ती में आरक्षण का प्रावधान पहले से लागू है। ऐसे में पीएयू द्वारा इस नीति को लागू न करना समानता के सिद्धांत के विपरीत है। राज्य विश्वविद्यालय होने के बावजूद पीएयू में शिक्षकों की नियुक्तियों के दौरान आरक्षण न देना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को प्रभावित करता है। याचिका में मांग की गई है कि विश्वविद्यालय को निर्देश दिए जाएं कि वह शिक्षण पदों पर भर्ती में भी एससी और बीसी वर्ग के लिए आरक्षण नीति लागू करे।
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पीएयू के सेवानिवृत्त अकाउंट्स अधिकारी स्वर्ण सिंह ने दाखिल याचिका में कहा गया है कि विश्वविद्यालय गैर-शिक्षण पदों पर भर्ती के दौरान अनुसूचित जाति (एससी) और पिछड़ा वर्ग (बीसी) के लिए आरक्षण लागू करता है। विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के दौरान भी इन वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है लेकिन शिक्षकों की भर्ती के मामले में विश्वविद्यालय का रवैया विपरीत है।
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याचिकाकर्ता ने कहा कि पीएयू एक राज्य विश्वविद्यालय है और ऐसे संस्थान को आरक्षण नीति से अलग रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। विश्वविद्यालय का बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट इस मुद्दे पर एक वर्ष से टालमटोल की नीति अपना रहा है। बोर्ड की बैठकों में बार-बार किसी न किसी बहाने से इस विषय को स्थगित कर दिया जाता है जिससे आरक्षण लागू करने का निर्णय आगे नहीं बढ़ पा रहा।
याची ने कहा कि चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, जिसे उसी अधिनियम के तहत स्थापित किया गया है वहां शिक्षकों की भर्ती में आरक्षण का प्रावधान पहले से लागू है। ऐसे में पीएयू द्वारा इस नीति को लागू न करना समानता के सिद्धांत के विपरीत है। राज्य विश्वविद्यालय होने के बावजूद पीएयू में शिक्षकों की नियुक्तियों के दौरान आरक्षण न देना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को प्रभावित करता है। याचिका में मांग की गई है कि विश्वविद्यालय को निर्देश दिए जाएं कि वह शिक्षण पदों पर भर्ती में भी एससी और बीसी वर्ग के लिए आरक्षण नीति लागू करे।