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Panchkula News: अमृतपाल सिंह की नजरबंदी जारी रखने पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित
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चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की तीसरी नजरबंदी को चुनौती देने वाली याचिका पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता ने अदालत को बताया कि अमृतपाल के कथित तौर पर कनाडा में बैठे आतंकी अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला और कुछ गैंगस्टरों से संबंध तथा 15 लोगों की कथित हिट लिस्ट इस मामले के मुख्य आधार हैं।
सरकार के मुताबिक इस सूची में शामिल कई लोग पहले वारिस पंजाब दे संगठन से जुड़े थे लेकिन बाद में उन्होंने अमृतपाल की खुलकर आलोचना शुरू कर दी थी। इनमें से कुछ के साथ वैचारिक मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए थे। इसी पृष्ठभूमि में उनके खिलाफ खतरे की आशंका जताई गई है। सूची में शामिल एक व्यक्ति की बाद में हत्या हो चुकी है जिससे संभावित खतरे की गंभीरता और बढ़ जाती है।
दलीलों में वर्ष 2024 में दर्ज एक एफआईआर का भी हवाला दिया गया। सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सामने आए बयानों से संकेत मिलता है कि अमृतपाल कथित रूप से प्रतिबंधित और घोषित आतंकी संगठनों से जुड़े व्यक्तियों के संपर्क में थे। कुछ गवाहों के बयान भी नजरबंदी के आदेश को प्रभावित करने वाले बताए गए।
सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर नजरबंदी हटाने से सार्वजनिक शांति और सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। वहीं अमृतपाल सिंह ने नजरबंदी के आदेश को अवैध बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।
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सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता ने अदालत को बताया कि अमृतपाल के कथित तौर पर कनाडा में बैठे आतंकी अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला और कुछ गैंगस्टरों से संबंध तथा 15 लोगों की कथित हिट लिस्ट इस मामले के मुख्य आधार हैं।
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सरकार के मुताबिक इस सूची में शामिल कई लोग पहले वारिस पंजाब दे संगठन से जुड़े थे लेकिन बाद में उन्होंने अमृतपाल की खुलकर आलोचना शुरू कर दी थी। इनमें से कुछ के साथ वैचारिक मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए थे। इसी पृष्ठभूमि में उनके खिलाफ खतरे की आशंका जताई गई है। सूची में शामिल एक व्यक्ति की बाद में हत्या हो चुकी है जिससे संभावित खतरे की गंभीरता और बढ़ जाती है।
दलीलों में वर्ष 2024 में दर्ज एक एफआईआर का भी हवाला दिया गया। सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सामने आए बयानों से संकेत मिलता है कि अमृतपाल कथित रूप से प्रतिबंधित और घोषित आतंकी संगठनों से जुड़े व्यक्तियों के संपर्क में थे। कुछ गवाहों के बयान भी नजरबंदी के आदेश को प्रभावित करने वाले बताए गए।
सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर नजरबंदी हटाने से सार्वजनिक शांति और सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। वहीं अमृतपाल सिंह ने नजरबंदी के आदेश को अवैध बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।