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Panchkula News: बिजली निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का प्रदर्शन, 11 से 13 अगस्त तक हड़ताल का एलान

Thu, 30 Jul 2026 02:10 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2026 02:10 AM IST
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Employees protest against electricity privatization; strike announced from August 11 to 13.
एग्री डिस्कॉम, पैरेलल लाइसेंस और स्मार्ट मीटरिंग वापस लेने की मांग, सरकार को दी अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। हरियाणा में बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में बुधवार को बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले उपायुक्त कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर एग्री डिस्कॉम, पैरेलल लाइसेंस और स्मार्ट मीटरिंग जैसी नीतियां वापस लेने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो 11 से 13 अगस्त तक प्रदेशभर में तीन दिवसीय हड़ताल की जाएगी। यदि इस दौरान एग्री डिस्कॉम को लेकर कोई अधिसूचना जारी की गई तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन किया जाएगा।
प्रदर्शन की अध्यक्षता ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन के सर्किल सचिव राजीव चौहान ने की, जबकि संचालन एचएसईबी वर्कर यूनियन के सर्किल सचिव अमित भोंसले ने किया। सभा को संबोधित करते हुए मोर्चा नेताओं रामपाल मलिक, पुनीत कुंडू, यशपाल देशवाल, राकेश बागड़ी और अशोक शर्मा ने कहा कि प्रस्तावित हरियाणा एग्री डिस्कॉम, गुरुग्राम-नूंह में पैरेलल लाइसेंस और स्मार्ट मीटरिंग जैसी योजनाएं सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करेंगी।
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नेताओं ने कहा कि एग्री डिस्कॉम लागू होने से कृषि उपभोक्ताओं को अलग करने पर सरकारी बिजली निगमों पर 5,427 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा और हजारों कर्मचारियों के रोजगार पर असर पड़ सकता है। वहीं, पैरेलल लाइसेंस व्यवस्था लागू होने पर निजी कंपनियां लाभ वाले शहरी क्षेत्रों में सेवाएं देंगी, जबकि घाटे वाले ग्रामीण क्षेत्रों का भार सरकारी निगमों पर ही रहेगा।
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संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बिजली वितरण के निजीकरण को रद्द करने, एग्री डिस्कॉम, पैरेलल लाइसेंस और स्मार्ट मीटरिंग की योजनाएं वापस लेने, कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने, जोखिम भत्ता देने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और वेतन विसंगतियां दूर करने की भी मांग उठाई।

सर्व कर्मचारी संघ के जिला सचिव विजयपाल, जिलाध्यक्ष नितिन सिंगला और कोषाध्यक्ष सोनू नागर ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो सर्व कर्मचारी संघ भी आंदोलन में शामिल होगा। मोर्चा नेताओं ने कहा कि यह संघर्ष केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि किसानों, उपभोक्ताओं और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था की सुरक्षा से जुड़ा है। इसके लिए अब गांव-गांव जाकर लोगों को निजीकरण के संभावित प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
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