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भूजल का हो रहा अंधाधुंध दोहन, आने वाली पीढ़ियों के लिए यह बेहद घातक: हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब में तेजी से गिरते भूजल स्तर और कृषि ट्यूबवेलों को 24 घंटे मुफ्त बिजली देने के मुद्दे पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान तीखा सवाल उठाया कि जितना पानी उपलब्ध है, उससे ज्यादा आखिर कैसे निकाला जा सकता है? हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस तरह का अंधाधुंध दोहन आने वाली पीढ़ियों के लिए घातक साबित होगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि इस मुद्दे पर विशेषज्ञों की राय लेना जरूरी हो सकता है।
तरनतारन जिले के पट्टी निवासी बलराज सिंह संधू की याचिका में आरोप लगाया गया कि राज्य की नीति के अनुसार धान सीजन में करीब 8 घंटे मुफ्त बिजली की अनुमति है लेकिन जमीनी स्तर पर कई कृषि उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिना मीटर बिजली मिल रही है। सुनवाई में बताया गया कि केवल पट्टी सबडिवीजन में ही करीब 300 कनेक्शन ऐसे हैं जहां चौबीसों घंटे बिजली दी जा रही है।
यह जानकारी पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के आरटीआई जवाब से सामने आई है। याचिकाकर्ता ने सेंट्रल ग्राउंडवाटर बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब के कई हिस्से ओवर-एक्सप्लॉइटेड श्रेणी में पहुंच चुके हैं। पट्टी क्षेत्र में ही भूजल दोहन 236% तक बताया गया जो इसे सबसे गंभीर श्रेणी में रखता है।
सुनवाई में यह भी सामने आया कि पीएसपीसीएएल ने खुद स्वीकार किया है कि किसानों और उपभोक्ताओं के विरोध के कारण वह इन कनेक्शनों को काटने में असमर्थ है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह समस्या केवल पट्टी तक सीमित नहीं बल्कि पूरे पंजाब में कई जगहों पर चुनिंदा उपभोक्ताओं को 24 घंटे मुफ्त बिजली दी जा रही है जो राज्य की घोषित नीति के विपरीत है।
कोर्ट ने सेंट्रल ग्राउंडवाटर बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह राज्य में भूजल के अत्यधिक दोहन को रोकने के उपायों पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे। अदालत ने कहा कि यह मामला केवल एक इलाके का नहीं, बल्कि पूरे राज्य में प्राकृतिक संसाधनों के समान उपयोग और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।
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तरनतारन जिले के पट्टी निवासी बलराज सिंह संधू की याचिका में आरोप लगाया गया कि राज्य की नीति के अनुसार धान सीजन में करीब 8 घंटे मुफ्त बिजली की अनुमति है लेकिन जमीनी स्तर पर कई कृषि उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिना मीटर बिजली मिल रही है। सुनवाई में बताया गया कि केवल पट्टी सबडिवीजन में ही करीब 300 कनेक्शन ऐसे हैं जहां चौबीसों घंटे बिजली दी जा रही है।
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यह जानकारी पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के आरटीआई जवाब से सामने आई है। याचिकाकर्ता ने सेंट्रल ग्राउंडवाटर बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब के कई हिस्से ओवर-एक्सप्लॉइटेड श्रेणी में पहुंच चुके हैं। पट्टी क्षेत्र में ही भूजल दोहन 236% तक बताया गया जो इसे सबसे गंभीर श्रेणी में रखता है।
सुनवाई में यह भी सामने आया कि पीएसपीसीएएल ने खुद स्वीकार किया है कि किसानों और उपभोक्ताओं के विरोध के कारण वह इन कनेक्शनों को काटने में असमर्थ है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह समस्या केवल पट्टी तक सीमित नहीं बल्कि पूरे पंजाब में कई जगहों पर चुनिंदा उपभोक्ताओं को 24 घंटे मुफ्त बिजली दी जा रही है जो राज्य की घोषित नीति के विपरीत है।
कोर्ट ने सेंट्रल ग्राउंडवाटर बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह राज्य में भूजल के अत्यधिक दोहन को रोकने के उपायों पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे। अदालत ने कहा कि यह मामला केवल एक इलाके का नहीं, बल्कि पूरे राज्य में प्राकृतिक संसाधनों के समान उपयोग और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।