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Haryana: जुलाई 2025 में लिखी गई थी घोटाले की पटकथा, एक कैंसिल चेक ने खोली IAS पंकज अग्रवाल की पोल

दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला Published by: Nivedita Updated Wed, 24 Jun 2026 03:48 PM IST
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सार

हरियाणा के सरकारी विभागों में चल रहे करोड़ों के घोटाले में जांच के दौरान सामने आया है कि सरकारी खजाने से 10 करोड़ रुपये की बड़ी रकम एक कैंसिल चेक का इस्तेमाल करके निकाली गई थी। एजेंसी ने धोखाधड़ी को एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा बताया है। 

Haryana IDFC First bank scam cancelled cheque exposed IAS officer Pankaj Agarwal
सीबीआई कोर्ट में आईएएस पंकज अग्रवाल पेश - फोटो : संवाद
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विस्तार

हरियाणा के सरकारी विभागों में चल रहे करोड़ों के घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। दस जुलाई 2025 को हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल ने घोटाले की पटकथा लिखी थी। 



पंकज अग्रवाल कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव बने, तब उन्होंने स्वयं व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करके आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खाता खुलवाने का प्रस्ताव बनाया। जब अधीनस्थ अधिकारियों ने एफडी के माध्यम से पैसा सुरक्षित रखने का सुझाव दिया, तो पंकज अग्रवाल ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि वे बिना वित्त विभाग की औपचारिक मंजूरी के ही खाता खोलें। उसके बाद चंडीगढ़ सेक्टर-32 के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में बिना किसी प्रशासनिक आवश्यकता के नया बैंक खाता खुलवाया। 
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सीबीआई के अनुसार बैंक में 50 करोड़ रुपये से ज्यादा फंड नहीं रख सकते थे, लेकिन पंकज अग्रवाल ने रसूख का इस्तेमाल कर नियमों को ताक पर रखकर कोटक महिंद्रा बैंक से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में डबल फंड ट्रांसफर करवा दिया।

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एक कैंसिल चेक से खुली पोल 

हरियाणा के सरकारी विभागों में चल रहे करोड़ों के घोटाले में जांच के दौरान सामने आया है कि सरकारी खजाने से 10 करोड़ रुपये की बड़ी रकम एक कैंसिल चेक का इस्तेमाल करके निकाली गई थी। एजेंसी ने धोखाधड़ी को एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा बताया है। 


14 जनवरी 2026 को कैंसिल चेक संख्या 000006 का इस्तेमाल करके 10 करोड़ रुपये की राशि धोखाधड़ी से निकाली गई। यह राशि दो कंपनियों मैसर्स एसआरआर प्लानिंग गुरुस और मैसर्स मन्नत कांट्रैक्टर्स के खातों में डाले गए। जांच एजेंसी का कहना है कि यह केवल एक ट्रांजेक्शन नहीं है, बल्कि सरकारी धन की बंदरबांट के लिए बनाई गई एक गहरी साजिश का सबूत है।

फर्जी बैंक खातों का जाल

जांच में यह भी सामने आया है कि हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा खोले गए अन्य बैंक खातों में भी संदिग्ध और अनाधिकृत लेनदेन की पहचान की गई है, जिनके तार सीधे इस घोटाले से जुड़े हो सकते हैं। इसमें उन बैंक खातों की भी जांच सीबीआई कर रही है।

जांच का दायरा बढ़ा, कई नामी चेहरों पर लटकी तलवार

इस मामले में पहले ही 13 आरोपियों और दो फर्मों के खिलाफ फाइनल रिपोर्ट दाखिल हो चुकी है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जांच एजेंसी अब प्रशासनिक तंत्र के ऊपरी स्तरों तक पहुंच चुकी है। सरकारी धन से खरीदी गई संपत्तियों और सोने की बरामदगी के लिए की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी कई रसूखदार चेहरों के नाम सामने आ सकते हैं, जो इस घोटाले में परोक्ष रूप से शामिल रहे हैं।

खेल ऐसे किया..

पैसा जमा होने के बाद असली खेल शुरू हुआ। जांच में सामने आया है कि इस खाते से 101 फर्जी डेबिट ट्रांजेक्शन किए गए, जिनके जरिए कुल 182.93 करोड़ रुपये निकाले गए। यह निकासी मुख्य रूप से तब हुई जब पंकज अग्रवाल स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव थे। मामले पर पर्दा डालने और खातों में बैलेंस दिखाने के लिए हेराफेरी भी की गई। 33 फर्जी क्रेडिट ट्रांजेक्शन के जरिए खाते में 132.39 करोड़ रुपये वापस जमा भी दिखाए गए। वहीं जमा और निकासी के इस पूरे गोरखधंधे के बाद, सरकारी खजाने को 50.54 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ। यानी यह वह शुद्ध रकम है जो घोटालेबाजों की जेब में चली गई।

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