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पंचकूला निगम एफडी घोटाला: समय से पहले एफडी को तुड़वाकर बिल्डरों को भेजा पैसा, कालका का ईओ गिरफ्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Apr 2026 02:05 AM IST
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सार
आरोपी ने बैंक मैनेजर के साथ मिलीभगत कर न केवल निगम के फर्जी खाते खोले, बल्कि जाली हस्ताक्षरों के जरिये जनता की खून-पसीने की कमाई को निजी बिल्डरों की तिजोरियों में पहुंचा दिया।
विकास काैशिक
- फोटो : संवाद
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विस्तार
पंचकूला नगर निगम के बहुचर्चित 158.02 करोड़ रुपये के एफडी घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने कालका नगर परिषद के वर्तमान ईओ (कार्यकारी अधिकारी) और पंचकूला नगर निगम के तत्कालीन सीनियर अकाउंट ऑफिसर विकास कौशिक को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोप है कि उसने बैंक मैनेजर के साथ मिलीभगत कर न केवल निगम के फर्जी खाते खोले, बल्कि जाली हस्ताक्षरों के जरिये जनता की खून-पसीने की कमाई को निजी बिल्डरों की तिजोरियों में पहुंचा दिया।
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं वे चौंकाने वाले हैं। जब विकास कौशिक नगर निगम में सेक्शन ऑफिसर के पद पर तैनात था तभी उसने भ्रष्टाचार की नींव रख दी थी। आरोपी ने कोटक महिंद्रा बैंक (सेक्टर-11) के मैनेजर पुष्पेंद्र के साथ मिलकर मई 2020 में एक फर्जी खाता खोला। इस खाते को वैध दिखाने के लिए तत्कालीन आयुक्त सुमेधा कटारिया (आईएएस) और सीनियर अकाउंट ऑफिसर सुशील कुमार की जाली मोहरें तैयार की गईं और उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए। सिलसिला यहीं नहीं थमा जून 2022 में एक और फर्जी खाता खोला गया जिसमें तत्कालीन डीएमसी दीपक सुरा के जाली हस्ताक्षर किए गए।
13 मार्च 2026: बैंक ने बताया कि खाते में केवल 2.17 करोड़ रुपये बचे हैं, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार वहां 50.07 करोड़ होने चाहिए थे।
16 मार्च 2026: बैंक ने लिखित में दे दिया कि उनके पास निगम की कोई लाइव एफडी मौजूद ही नहीं है। यानी करीब 48 करोड़ रुपये बीच रास्ते से ही गायब कर दिए गए।
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आरोप है कि उसने बैंक मैनेजर के साथ मिलीभगत कर न केवल निगम के फर्जी खाते खोले, बल्कि जाली हस्ताक्षरों के जरिये जनता की खून-पसीने की कमाई को निजी बिल्डरों की तिजोरियों में पहुंचा दिया।
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जांच में जो तथ्य सामने आए हैं वे चौंकाने वाले हैं। जब विकास कौशिक नगर निगम में सेक्शन ऑफिसर के पद पर तैनात था तभी उसने भ्रष्टाचार की नींव रख दी थी। आरोपी ने कोटक महिंद्रा बैंक (सेक्टर-11) के मैनेजर पुष्पेंद्र के साथ मिलकर मई 2020 में एक फर्जी खाता खोला। इस खाते को वैध दिखाने के लिए तत्कालीन आयुक्त सुमेधा कटारिया (आईएएस) और सीनियर अकाउंट ऑफिसर सुशील कुमार की जाली मोहरें तैयार की गईं और उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए। सिलसिला यहीं नहीं थमा जून 2022 में एक और फर्जी खाता खोला गया जिसमें तत्कालीन डीएमसी दीपक सुरा के जाली हस्ताक्षर किए गए।
एफडी को समय से पहले तुड़वाकर बिल्डरों को पैसा भेजा
एसीबी की जांच के अनुसार आरोपी विकास कौशिक और बैंक मैनेजर पुष्पेंद्र नगर निगम के असली बैंक खातों में जमा एफडी (एफडी) को फर्जी डेबिट नोट (आरटीजीएस /एनईएफटी) के जरिए समय से पहले (प्री मेच्योर) तुड़वा देते थे। इस राशि को पहले निगम के नाम पर ही खोले गए फर्जी खातों में डाला जाता था और वहां से रजत ढाहरा, स्वाति तोमर व अन्य के खातों के माध्यम से सीधे बिल्डरों को ट्रांसफर कर दिया जाता था।पैसे का रूट
- असली एफडी को जाली दस्तावेजों से तोड़ा गया।
- राशि को निगम के नाम पर ही खुले फर्जी खातों में ट्रांसफर किया गया।
- वहां से रजत ढाहरा, स्वाति तोमर व अन्य बिचौलियों के जरिए सीधे बिल्डरों के खातों में पैसा भेज दिया गया।
इस तरह खुला सच
22 फरवरी 2026: बैंक ने पहली बार ऐसी जानकारी दी जो निगम के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही थी।13 मार्च 2026: बैंक ने बताया कि खाते में केवल 2.17 करोड़ रुपये बचे हैं, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार वहां 50.07 करोड़ होने चाहिए थे।
16 मार्च 2026: बैंक ने लिखित में दे दिया कि उनके पास निगम की कोई लाइव एफडी मौजूद ही नहीं है। यानी करीब 48 करोड़ रुपये बीच रास्ते से ही गायब कर दिए गए।