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Panchkula News: तीन बार विधायक का चुनाव हारे...श्याम लाल बंसल अब भाजपा के मेयर उम्मीदवार
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पंचकूला नगर निगम चुनाव : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने राष्ट्रीय अध्यक्ष से चर्चा के बाद लिया फैसला
किस्मत ने दिया साथ, साल 2020 की कसर होगी पूरी
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। नगर निगम चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार अपने पत्तों का खुलासा कर दिया है। काफी कशमकश और लंबे इंतजार के बाद भाजपा ने तीन बार विधायक का चुनाव हार चुके वरिष्ठ नेता श्याम लाल बंसल को मेयर पद का प्रत्याशी घोषित किया है। बुधवार को बंसल के नाम पर मुहर लगते ही पार्टी के इस फैसले के साथ ही शहर के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने बंसल को मैदान में उतारकर न केवल अपने पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को साधा है बल्कि शहर के व्यापारिक वर्ग को भी बड़ा संदेश दिया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ चर्चा के बाद प्रत्याशियों की सूची जारी की। पंचकूला के लिए श्याम लाल बंसल के नाम पर काफी समय से चर्चा चल रही थी। सूची जारी होते ही उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। पंचकूला मेयर सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि श्याम लाल बंसल की स्थानीय पकड़ और मिलनसार छवि का फायदा पार्टी को मिल सकता है। आने वाले दिनों में शहर की सफाई व्यवस्था, टूटी सड़कों की मरम्मत और वार्डों में विकास कार्यों के लिए चुनावी जंग और तेज होने की उम्मीद है।
किस्मत ने दिया साथ, 2020 की कसर पूरी
71 वर्षीय श्याम लाल बंसल के लिए यह टिकट किसी लॉटरी से कम नहीं है। दिसंबर 2020 के निगम चुनाव में भी बंसल का नाम लगभग तय था लेकिन ऐन मौके पर वे टिकट से वंचित रह गए थे। इस बार पार्टी ने उनकी वरिष्ठता, बेदाग छवि और संगठन के प्रति समर्पण को देखते हुए भरोसा जताया है। बंसल वर्तमान में हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन और हरियाणा रोजगार कौशल निगम में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ने का अनुभव
श्याम लाल बंसल राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। वे कांग्रेस के दिग्गज नेता चंद्रमोहन के खिलाफ तीन बार (1996, 2000 और 2005) विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि उन्हें जीत हासिल नहीं हुई लेकिन हर बार उन्होंने मजबूती से चुनाव लड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके अच्छे संबंध माने जाते हैं।
अयोध्या आंदोलन में सक्रिय भूमिका
बंसल का राजनीतिक कद उस समय चर्चा में आया जब उन्होंने 1990 के अयोध्या आंदोलन में पंचकूला से पहले जत्थे का नेतृत्व किया। इस दौरान वह सरयू नदी तक पहुंचे और ढांचा ढहने के समय वहां मौजूद संघर्षपूर्ण स्थितियों का हिस्सा रहे। इसके अलावा, 1992 की ऐतिहासिक एकता यात्रा में भाग लेते हुए उन्होंने डॉ. मुरली मनोहर जोशी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने के मिशन में भी सक्रिय योगदान दिया।
संगठन और चुनावी कमान
बंसल ने 1982 से 1987 तक भाजपा पंचकूला शहर के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वह 1997-98 में भाजपा जिला पंचकूला के अध्यक्ष भी रहे। 2014 के चुनावों में उन्होंने कालका और अंबाला संसदीय क्षेत्र में चुनाव प्रभारी के रूप में अहम भूमिका निभाई
मेयर के लिए कड़े मुकाबले के आसार
पंचकूला में मेयर पद के लिए कड़े मुकाबले के आसार हैं। इधर कांग्रेस से मेयर पद की प्रत्याशी सुधा भारद्वाज करीब 6 साल तक हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं और उनके पति संजीव भारद्वाज प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी हैं। कांग्रेस जहां अपने कैडर वोट और सुधा भारद्वाज के संगठनात्मक अनुभव के भरोसे है वहीं भाजपा बंसल की मिलनसार छवि और सरकारी विकास कार्यों के दम पर मैदान में है। दिलचस्प रहेगा कि नामांकन के बाद दोनों प्रत्याशी जनता के बीच किन मुख्य मुद्दों पर जाते हैं और पंचकूला की जनता किसे शहर की चाबी सौंपती है।
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। नगर निगम चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार अपने पत्तों का खुलासा कर दिया है। काफी कशमकश और लंबे इंतजार के बाद भाजपा ने तीन बार विधायक का चुनाव हार चुके वरिष्ठ नेता श्याम लाल बंसल को मेयर पद का प्रत्याशी घोषित किया है। बुधवार को बंसल के नाम पर मुहर लगते ही पार्टी के इस फैसले के साथ ही शहर के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने बंसल को मैदान में उतारकर न केवल अपने पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को साधा है बल्कि शहर के व्यापारिक वर्ग को भी बड़ा संदेश दिया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ चर्चा के बाद प्रत्याशियों की सूची जारी की। पंचकूला के लिए श्याम लाल बंसल के नाम पर काफी समय से चर्चा चल रही थी। सूची जारी होते ही उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। पंचकूला मेयर सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि श्याम लाल बंसल की स्थानीय पकड़ और मिलनसार छवि का फायदा पार्टी को मिल सकता है। आने वाले दिनों में शहर की सफाई व्यवस्था, टूटी सड़कों की मरम्मत और वार्डों में विकास कार्यों के लिए चुनावी जंग और तेज होने की उम्मीद है।
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किस्मत ने दिया साथ, 2020 की कसर पूरी
71 वर्षीय श्याम लाल बंसल के लिए यह टिकट किसी लॉटरी से कम नहीं है। दिसंबर 2020 के निगम चुनाव में भी बंसल का नाम लगभग तय था लेकिन ऐन मौके पर वे टिकट से वंचित रह गए थे। इस बार पार्टी ने उनकी वरिष्ठता, बेदाग छवि और संगठन के प्रति समर्पण को देखते हुए भरोसा जताया है। बंसल वर्तमान में हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन और हरियाणा रोजगार कौशल निगम में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ने का अनुभव
श्याम लाल बंसल राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। वे कांग्रेस के दिग्गज नेता चंद्रमोहन के खिलाफ तीन बार (1996, 2000 और 2005) विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि उन्हें जीत हासिल नहीं हुई लेकिन हर बार उन्होंने मजबूती से चुनाव लड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके अच्छे संबंध माने जाते हैं।
अयोध्या आंदोलन में सक्रिय भूमिका
बंसल का राजनीतिक कद उस समय चर्चा में आया जब उन्होंने 1990 के अयोध्या आंदोलन में पंचकूला से पहले जत्थे का नेतृत्व किया। इस दौरान वह सरयू नदी तक पहुंचे और ढांचा ढहने के समय वहां मौजूद संघर्षपूर्ण स्थितियों का हिस्सा रहे। इसके अलावा, 1992 की ऐतिहासिक एकता यात्रा में भाग लेते हुए उन्होंने डॉ. मुरली मनोहर जोशी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने के मिशन में भी सक्रिय योगदान दिया।
संगठन और चुनावी कमान
बंसल ने 1982 से 1987 तक भाजपा पंचकूला शहर के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वह 1997-98 में भाजपा जिला पंचकूला के अध्यक्ष भी रहे। 2014 के चुनावों में उन्होंने कालका और अंबाला संसदीय क्षेत्र में चुनाव प्रभारी के रूप में अहम भूमिका निभाई
मेयर के लिए कड़े मुकाबले के आसार
पंचकूला में मेयर पद के लिए कड़े मुकाबले के आसार हैं। इधर कांग्रेस से मेयर पद की प्रत्याशी सुधा भारद्वाज करीब 6 साल तक हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं और उनके पति संजीव भारद्वाज प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी हैं। कांग्रेस जहां अपने कैडर वोट और सुधा भारद्वाज के संगठनात्मक अनुभव के भरोसे है वहीं भाजपा बंसल की मिलनसार छवि और सरकारी विकास कार्यों के दम पर मैदान में है। दिलचस्प रहेगा कि नामांकन के बाद दोनों प्रत्याशी जनता के बीच किन मुख्य मुद्दों पर जाते हैं और पंचकूला की जनता किसे शहर की चाबी सौंपती है।

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