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पंचकूला में पुष्पा की एंट्री: आसरेवाली जंगल से खैर के हजारों पेड़ काट ले गए तस्कर, विभाग में मचा हड़कंप

कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़ Published by: Ankesh Kumar Updated Sun, 01 Mar 2026 01:18 PM IST
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सार

हरियाणा के पंचकूला के जंगल में खैर के पड़ों की बड़े पैमाने पर तस्करी का मामला सामने आया है। तस्करों द्वारा हजारों खैर के पेड़ काटे जाने की आशंका जताई जा रही है।

Thousands of Khair trees cut down by smugglers from Asarewali forest in Panchkula
काटे गए खैर के पेड़। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हरियाणा के पंचकूला में पुष्पा की एंट्री हो चुकी है। ऐसा इसलिए क्योंकि पंचकूला स्थित आसरेवाली जंगल क्षेत्र में बड़ी संख्या में खैर के पेड़ काटे गए हैं। जंगल में खैर के पड़ों की बड़े पैमाने पर तस्करी का मामला सामने आया है। तस्करों द्वारा हजारों खैर के पेड़ काटे जाने की आशंका जताई जा रही है। मामला पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह के संज्ञान में आने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया। मंत्री के निर्देश पर शनिवार सुबह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और सर्च अभियान शुरू किया गया। मामले की जांच के लिए विभागीय अधिकारियों की एक कमेटी भी गठित की गई है।

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मुख्य वन्य जीव अधिकारी, पंचकूला आईएफएस अधिकारी बी निवेदिता के नेतृत्व में टीम ने कटे हुए पेड़ों की संख्या का आकलन शुरू कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में ताजे और पुराने दोनों तरह के कटे पेड़ों को शामिल किया जा रहा है। प्रारंभिक तौर पर आशंका है कि तस्कर काफी समय से पेड़ों को काटकर धीरे-धीरे जंगल से बाहर निकाल रहे थे। हरियाणा के जंगलों में खैर के पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह प्रतिबंध है। प्रदेश में सबसे अधिक खैर के पेड़ मोरनी और यमुनानगर डिवीजन के जंगलों में पाए जाते हैं और कटान की शिकायतें भी इन्हीं क्षेत्रों से अधिक आती रही हैं। बाजार में खैर की लकड़ी की कीमत वर्तमान में करीब 16 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बताई जा रही है, जिसके कारण इसकी तस्करी की घटनाएं बढ़ रही हैं।
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विंग बदलने से निगरानी व्यवस्था प्रभावित

पहले जंगल क्षेत्र क्षेत्रीय विंग के अधीन आते थे जहां वन रक्षकों के साथ सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की व्यवस्था भी थी। करीब डेढ़ वर्ष पहले यह व्यवस्था बदलकर जंगल क्षेत्रों को वाइल्ड लाइफ विंग के अधीन कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार इस विंग में मैनपॉवर की कमी के कारण निगरानी व्यवस्था प्रभावित हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने शनिवार देर शाम जांच एवं मूल्यांकन टीम का गठन कर दिया। टीम रविवार सुबह से जांच शुरू करेगी। टीम यह पता लगाएगी कि कुल कितने पेड़ों की कटाई हुई, कटान किस अवधि में किया गया, तस्करी का तरीका क्या था। टीम को तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट विभाग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

आसरेवाली क्षेत्र में खैर के पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। प्राथमिक जांच में कुछ पेड़ पुराने कटे हुए प्रतीत हो रहे हैं। टीम पेड़ों की संख्या का आकलन कर रही है और मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाएगी। -बी निवेदिता, आईएफएस, मुख्य वन्य जीव अधिकारी, पंचकूला

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