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बरसत रोड प्रकरण : पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने मुआवजे के लिए चलाई फाइल, अदालत से मुक्त की विभाग की गाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 30 Jan 2026 01:56 AM IST
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पानीपत। बरसत रोड प्रकरण में पीडब्ल्यूडी को अदालत से कुछ राहत मिली है। अदालत ने जब्त की विभाग की गाड़ी को छोड़ने के आदेश दिए हैं। विभाग ने अदालत से अपील की थी कि उनके पास 1051.46 किमी लंबी सड़क की निगरानी के लिए एक ही गाड़ी है। गाड़ी जब्त होने के कारण सरकारी काम ठप हो रहे हैं। जिस पर अदालत से कहा कि जमीन के मुआवजे की धनराशि के सामने गाड़ी की कीमत कुछ नहीं है, जिस कारण अदालत से गाड़ी को मुक्त करने के आदेश दिए।
बरसत रोड की जमीन पर मालिकाना हक के लिए भारत भूषण बनाम राज्य सरकार प्रकरण की सुनवाई सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में चल रही है। अदालत ने पहले 21 मई 2025 को डिक्री का अनुपालन न होने पर विभाग की गाड़ी जब्त करने के आदेश दिए थे, जिसके बाद से ही गाड़ी अदालत के आदेश पर जब्त कर ली थी गई थी। 15 जनवरी को मामले की सुनवाई के दौरान विभाग ने अदालत में प्रार्थनापत्र सौंपा था कि विभाग के तीन उप-डिवीजन हैं, लेकिन पूरे जिले में निरीक्षण के लिए केवल एक ही जीप उपलब्ध है। इसी वाहन से 1051.46 किलोमीटर लंबी सड़कों की निगरानी की जाती है, इतना ही नहीं, इसी जीप का इस्तेमाल चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय में आवश्यक और आपात बैठकों के लिए भी किया जाता है।
वाहन की जब्ती से सरकारी कार्य प्रभावित हो रहा है, इसके साथ ही विभाग ने यह भी बताया था कि उन्होंने जमीन के मुआवजे के लिए 17 अक्तूबर 2025 को अधिग्रहण अधिकारी को प्रस्ताव भेज दिया है और उच्च अधिकारियों से स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है। सुनवाई के बाद अदालत से कहा कि जब्त वाहन की कीमत डिक्री की राशि की तुलना में अपर्याप्त है और फिलहाल वाहन की नीलामी की कोई प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है, सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जीप को मुक्त करने के आदेश दिए गए।
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बरसत रोड की जमीन पर मालिकाना हक के लिए भारत भूषण बनाम राज्य सरकार प्रकरण की सुनवाई सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में चल रही है। अदालत ने पहले 21 मई 2025 को डिक्री का अनुपालन न होने पर विभाग की गाड़ी जब्त करने के आदेश दिए थे, जिसके बाद से ही गाड़ी अदालत के आदेश पर जब्त कर ली थी गई थी। 15 जनवरी को मामले की सुनवाई के दौरान विभाग ने अदालत में प्रार्थनापत्र सौंपा था कि विभाग के तीन उप-डिवीजन हैं, लेकिन पूरे जिले में निरीक्षण के लिए केवल एक ही जीप उपलब्ध है। इसी वाहन से 1051.46 किलोमीटर लंबी सड़कों की निगरानी की जाती है, इतना ही नहीं, इसी जीप का इस्तेमाल चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय में आवश्यक और आपात बैठकों के लिए भी किया जाता है।
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वाहन की जब्ती से सरकारी कार्य प्रभावित हो रहा है, इसके साथ ही विभाग ने यह भी बताया था कि उन्होंने जमीन के मुआवजे के लिए 17 अक्तूबर 2025 को अधिग्रहण अधिकारी को प्रस्ताव भेज दिया है और उच्च अधिकारियों से स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है। सुनवाई के बाद अदालत से कहा कि जब्त वाहन की कीमत डिक्री की राशि की तुलना में अपर्याप्त है और फिलहाल वाहन की नीलामी की कोई प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है, सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जीप को मुक्त करने के आदेश दिए गए।