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Panipat News: झगड़े में घायल नौवीं के छात्र की दो माह बाद मौत, एंबुलेंस रोकने पर फूटा परिजनों का गुस्सा
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शेखर का फाइल फोटो। परिजन
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। थाना सदर क्षेत्र के बड़ौली गांव में दो माह पहले टेंपो खड़ा करने के विवाद में सिर में ईंट लगने से घायल शेखर शर्मा (15) की मंगलवार शाम रोहतक पीजीआई में मौत हो गई। बुधवार को परिजन शेखर का शव लेकर पानीपत आ रहे थे। डाहर चौक पर इसराना पुलिस ने एंबुलेंस रोक ली। इससे आक्रोशित परिजनों ने जिला सचिवालय के सामने शव रखकर हंगामा किया। उन्होंने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की और आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की।
परिजनों ने जांच अधिकारी हवलदार राकेश पर आरोपियों से मिलीभगत करने के गंभीर आरोप लगाए। तीन घंटे चले हंगामे के बाद एसपी भूपेंद्र सिंह ने परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
एसपी ने जांच अधिकारी हवलदार राकेश को तत्काल लाइन हाजिर करने के आदेश दिए। मामले की जांच सीआईए-1 को सौंप दी गई है। एसपी ने बताया कि दो आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। दो अन्य को हिरासत में लिया गया है। परिजनों ने सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने और मुख्य आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की। यह विवाद 22 अप्रैल को बड़ौली गांव में शेखर के बड़े भाई कृष्णलाल के परिवार के साथ हुआ था।
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रामेश्वर ने बताया कि उनके बेटे शेखर के सिर में ईंट मारी गई थी। उस पर गंडासी से भी वार किए गए थे। शेखर का दिल्ली और गुरुग्राम के निजी अस्पतालों में इलाज चला। बाद में उसे रोहतक पीजीआई में वेंटिलेटर पर रखा गया था। दो माह तक चले उपचार के बाद मंगलवार शाम उसकी मौत हो गई।
एंबुलेंस रोकने पर परिजनों का आक्रोश
शेखर की मौसी ज्योति ने बताया कि पुलिस शव को सीधे गांव ले जाने की बात कह रही थी। इस कारण इसराना थाना प्रभारी ने डाहर चौक पर एंबुलेंस रोक दी। पुलिस ने एंबुलेंस को एलिवेटेड हाईवे से निकालने के लिए कहा। इस पर परिजन आक्रोशित हो गए और शव को सचिवालय लाने का फैसला किया।
करीब 1:45 बजे एंबुलेंस शव लेकर जिला सचिवालय पहुंची। परिजनों ने शव को एलिवेटेड हाईवे के नीचे रखकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शहर में जाम होने के कारण एंबुलेंस को ऊपर हाईवे से निकालने के लिए कहा गया था। उन्होंने एंबुलेंस रोकने के आरोपों को गलत बताया।
जांच अधिकारी पर मिलीभगत के आरोप
परिजनों ने जांच अधिकारी हवलदार राकेश पर आरोपियों से मिलीभगत करने के गंभीर आरोप लगाए। शेखर की मां पूनम ने भी जांच अधिकारी पर धमकाने का आरोप लगाया। परिजनों ने मांग की कि सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने मुख्य आरोपियों को फांसी की सजा देने की भी मांग की।
डीएसपी राजबीर और डीएसपी नवीन संधू ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया। डीएसपी राजबीर ने परिजनों को बताया कि आरोपी कृष्णलाल और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया गया है। उन्होंने थाने से वीडियो कॉल कर आरोपियों को हवालात में बैठे हुए भी दिखाया। इसके बावजूद परिजन एसपी से मिलने की जिद पर अड़े रहे।
इलाज में खर्च हुए लाखों रुपये
शेखर की मां पूनम ने बताया- मेरे बेटे की कोई गलती नहीं थी। वह अपने पिता को रोक रहा था। मासूम बच्चे के सिर में ईंट और गंडासी से हमला कर उसे घायल कर दिया गया। पूनम ने आगे कहा- दो माह तक वह जिंदगी और मौत से जूझता रहा। जमीन बेचकर 70 लाख रुपये उसके इलाज में खर्च कर दिए। अब हमारे हाथ पूरी तरह से खाली हो गए हैं। शेखर परिवार का इकलौता पुत्र था। उसकी दो बहनें हैं। भाई का शव देखकर वे बेसुध हो गईं। बहनों ने भी आरोपियों को फांसी दिए जाने की मांग की है।
एसपी का आश्वासन और आगे की कार्रवाई
एसपी भूपेंद्र सिंह ने कष्ट निवारण समिति की बैठक छोड़कर परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। एसपी ने जांच अधिकारी हवलदार राकेश को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर करने के आदेश दिए।
उन्होंने पूरे मामले की जांच सीआईए-1 को सौंपने की बात कही। एसपी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि जांच अधिकारी को लाइन हाजिर कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच सीआईए को सौंपी गई है। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। पहले गिरफ्तार हुए आरोपी अजय व विजय को दोबारा रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। एसपी के आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए। तीन घंटे चले हंगामे के बाद वे शव लेकर गांव चले गए।
पानीपत। थाना सदर क्षेत्र के बड़ौली गांव में दो माह पहले टेंपो खड़ा करने के विवाद में सिर में ईंट लगने से घायल शेखर शर्मा (15) की मंगलवार शाम रोहतक पीजीआई में मौत हो गई। बुधवार को परिजन शेखर का शव लेकर पानीपत आ रहे थे। डाहर चौक पर इसराना पुलिस ने एंबुलेंस रोक ली। इससे आक्रोशित परिजनों ने जिला सचिवालय के सामने शव रखकर हंगामा किया। उन्होंने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की और आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की।
परिजनों ने जांच अधिकारी हवलदार राकेश पर आरोपियों से मिलीभगत करने के गंभीर आरोप लगाए। तीन घंटे चले हंगामे के बाद एसपी भूपेंद्र सिंह ने परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
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एसपी ने जांच अधिकारी हवलदार राकेश को तत्काल लाइन हाजिर करने के आदेश दिए। मामले की जांच सीआईए-1 को सौंप दी गई है। एसपी ने बताया कि दो आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। दो अन्य को हिरासत में लिया गया है। परिजनों ने सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने और मुख्य आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की। यह विवाद 22 अप्रैल को बड़ौली गांव में शेखर के बड़े भाई कृष्णलाल के परिवार के साथ हुआ था।
रामेश्वर ने बताया कि उनके बेटे शेखर के सिर में ईंट मारी गई थी। उस पर गंडासी से भी वार किए गए थे। शेखर का दिल्ली और गुरुग्राम के निजी अस्पतालों में इलाज चला। बाद में उसे रोहतक पीजीआई में वेंटिलेटर पर रखा गया था। दो माह तक चले उपचार के बाद मंगलवार शाम उसकी मौत हो गई।
एंबुलेंस रोकने पर परिजनों का आक्रोश
शेखर की मौसी ज्योति ने बताया कि पुलिस शव को सीधे गांव ले जाने की बात कह रही थी। इस कारण इसराना थाना प्रभारी ने डाहर चौक पर एंबुलेंस रोक दी। पुलिस ने एंबुलेंस को एलिवेटेड हाईवे से निकालने के लिए कहा। इस पर परिजन आक्रोशित हो गए और शव को सचिवालय लाने का फैसला किया।
करीब 1:45 बजे एंबुलेंस शव लेकर जिला सचिवालय पहुंची। परिजनों ने शव को एलिवेटेड हाईवे के नीचे रखकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शहर में जाम होने के कारण एंबुलेंस को ऊपर हाईवे से निकालने के लिए कहा गया था। उन्होंने एंबुलेंस रोकने के आरोपों को गलत बताया।
जांच अधिकारी पर मिलीभगत के आरोप
परिजनों ने जांच अधिकारी हवलदार राकेश पर आरोपियों से मिलीभगत करने के गंभीर आरोप लगाए। शेखर की मां पूनम ने भी जांच अधिकारी पर धमकाने का आरोप लगाया। परिजनों ने मांग की कि सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने मुख्य आरोपियों को फांसी की सजा देने की भी मांग की।
डीएसपी राजबीर और डीएसपी नवीन संधू ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया। डीएसपी राजबीर ने परिजनों को बताया कि आरोपी कृष्णलाल और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया गया है। उन्होंने थाने से वीडियो कॉल कर आरोपियों को हवालात में बैठे हुए भी दिखाया। इसके बावजूद परिजन एसपी से मिलने की जिद पर अड़े रहे।
इलाज में खर्च हुए लाखों रुपये
शेखर की मां पूनम ने बताया- मेरे बेटे की कोई गलती नहीं थी। वह अपने पिता को रोक रहा था। मासूम बच्चे के सिर में ईंट और गंडासी से हमला कर उसे घायल कर दिया गया। पूनम ने आगे कहा- दो माह तक वह जिंदगी और मौत से जूझता रहा। जमीन बेचकर 70 लाख रुपये उसके इलाज में खर्च कर दिए। अब हमारे हाथ पूरी तरह से खाली हो गए हैं। शेखर परिवार का इकलौता पुत्र था। उसकी दो बहनें हैं। भाई का शव देखकर वे बेसुध हो गईं। बहनों ने भी आरोपियों को फांसी दिए जाने की मांग की है।
एसपी का आश्वासन और आगे की कार्रवाई
एसपी भूपेंद्र सिंह ने कष्ट निवारण समिति की बैठक छोड़कर परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। एसपी ने जांच अधिकारी हवलदार राकेश को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर करने के आदेश दिए।
उन्होंने पूरे मामले की जांच सीआईए-1 को सौंपने की बात कही। एसपी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि जांच अधिकारी को लाइन हाजिर कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच सीआईए को सौंपी गई है। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। पहले गिरफ्तार हुए आरोपी अजय व विजय को दोबारा रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। एसपी के आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए। तीन घंटे चले हंगामे के बाद वे शव लेकर गांव चले गए।

शेखर का फाइल फोटो। परिजन

शेखर का फाइल फोटो। परिजन

शेखर का फाइल फोटो। परिजन