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Panipat News: भगवान कृष्ण के भजनों पर झूमे श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 22 May 2026 01:44 AM IST
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कथा सुनाते आचार्य लालमणि पांडेय। स्रोत : समिति
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पानीपत। वार्ड-11 स्थित श्री महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का वीरवार को पांचवां दिन रहा। कथाव्यास आचार्य लालमणि पांडेय ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का प्रसंग सुनाया जिसे सुनकर श्रद्धालु आनंदित हो उठे। इस दौरान भगवान कृष्ण के भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे।
आचार्य ने बताया कि पूतना स्तनों में जहर लगाकर प्रभु को मारने आई थी। फिर भी प्रभु ने उसे मारकर परम पद अपना लोक बैकुंठ धाम दे दिया। भगवान के समान और कौन दयालु होगा। संकाटसुर का उद्गार करके बताया कि भोगों को भगवान से ऊपर न समझें। भगवान ने वृजावर्त का उद्गार करके मां को विश्वरूप का दर्शन कराया। भगवान का नामकरण हुआ। बड़े भैया का बलराम और भगवान का कृष्ण। प्रभु बाल लीला करते हैं। गोपियों के घर जाकर माखन खाते हैं, निर्मल मन ही मक्खन है, इन गोपियों को मालूम है कि कृष्ण साक्षात भगवान हैं। भगवान मिट्टी खाते हैं मतलब है ब्रज रस को अपने ह्रदय में रखते हैं। मां के द्वारा रस्सी में बंधकर वृक्ष बने हुए कुबेर के दो पुत्र नलकूबर-मणिग्रीव का उद्धार करते हैं। वो प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि वाणी प्रभु का नाम लें। कान कथा श्रवण करें, नेत्र आपका दर्शन करें, सिर आपके चरणों में झुका रहे और आपके ही शरीर रूप संतों का दर्शन सानिध्य हमें प्राप्त होता रहे। कथा के बाद महिला भजन मंडली ने भजन-कीर्तन किया और भगवान कृष्ण के भजनों का गुणगान किया। समापन पर सबको प्रसाद वितरित किया गया।
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आचार्य ने बताया कि पूतना स्तनों में जहर लगाकर प्रभु को मारने आई थी। फिर भी प्रभु ने उसे मारकर परम पद अपना लोक बैकुंठ धाम दे दिया। भगवान के समान और कौन दयालु होगा। संकाटसुर का उद्गार करके बताया कि भोगों को भगवान से ऊपर न समझें। भगवान ने वृजावर्त का उद्गार करके मां को विश्वरूप का दर्शन कराया। भगवान का नामकरण हुआ। बड़े भैया का बलराम और भगवान का कृष्ण। प्रभु बाल लीला करते हैं। गोपियों के घर जाकर माखन खाते हैं, निर्मल मन ही मक्खन है, इन गोपियों को मालूम है कि कृष्ण साक्षात भगवान हैं। भगवान मिट्टी खाते हैं मतलब है ब्रज रस को अपने ह्रदय में रखते हैं। मां के द्वारा रस्सी में बंधकर वृक्ष बने हुए कुबेर के दो पुत्र नलकूबर-मणिग्रीव का उद्धार करते हैं। वो प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि वाणी प्रभु का नाम लें। कान कथा श्रवण करें, नेत्र आपका दर्शन करें, सिर आपके चरणों में झुका रहे और आपके ही शरीर रूप संतों का दर्शन सानिध्य हमें प्राप्त होता रहे। कथा के बाद महिला भजन मंडली ने भजन-कीर्तन किया और भगवान कृष्ण के भजनों का गुणगान किया। समापन पर सबको प्रसाद वितरित किया गया।
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कथा सुनाते आचार्य लालमणि पांडेय। स्रोत : समिति