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Panipat News: सम्मान समारोह में प्रशासन की बेरुखी से मलाल

Mon, 29 Jun 2026 06:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Mon, 29 Jun 2026 06:03 AM IST
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Disappointment due to the indifference of the administration in the award ceremony
कैप्टन प्रताप सिंह।
पानीपत। देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों की यादों को संजोने और उनके परिवारों का हौसला बढ़ाने के लिए पूर्व सैनिक संगठन ने एक अनूठी और सराहनीय पहल शुरू की है। संगठन के सदस्य अब सरकारी मदद का इंतजार किए बिना अपने स्तर पर बजट जुटाकर बलिदानियों के परिवारों के बीच पहुंच रहे हैं। शहादत के दिन संगठन के पदाधिकारी वीरांगनाओं और उनके बच्चों से मिलते हैं। इसके अलावा कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें सम्मानित कर देश के प्रति उनके सर्वोच्च बलिदान की याद को ताजा भी करते हैं। इस कार्य में प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की बेरुखी से पूर्व सैनिकों में गहरा मलाल है।
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पूर्व सैनिक संगठन 1962, 65 और 71 की लड़ाई के दिन पर जिला स्तर पर कार्यक्रम करता है। इसके साथ अन्य युद्धों व ऑपरेशन में बलिदान देने के दिन पर उनके पहुंचता है। जिला स्तर पर आयोजित होने वाले इन सम्मान समारोहों को भव्य और गरिमापूर्ण बनाने में काफी खर्च आता है। संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक, एक सम्मान समारोह के आयोजन में औसतन 50 हजार रुपये तक का खर्च आ जाता है। यह पूरा खर्च संगठन के पदाधिकारी और सदस्य अपने व्यक्तिगत स्तर पर चंदा या योगदान देकर वहन करते हैं। अब तक इन आयोजनों के लिए सरकार या जिला प्रशासन की तरफ से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता या बजट में सहयोग नहीं मिला है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि यदि प्रशासन रेडक्रॉस सोसाइटी या अन्य सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से इस काम में सहयोग करें तो कार्यक्रमों का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
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शहीद परिवारों के सम्मान से दूरी बना रहे प्रशासनिक अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि
कैप्टन प्रताप सिंह ने कहा कि जब भी वे किसी बलिदानी के गांव में परिवार को सम्मानित करने जाते हैं, तो वहां की तस्वीर बेहद निराशाजनक होती है। कार्यक्रम में न तो जिला प्रशासन या पुलिस का कोई बड़ा अधिकारी पहुंचता है और न ही स्थानीय ग्राम पंचायत की तरफ से कोई प्रतिनिधि शामिल होता है। पूर्व सैनिकों ने कहा कि प्रशासन को इस संवेदनशील विषय पर संगठन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे आना चाहिए।
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प्रशासनिक और संस्थागत सहयोग की जरूरत
सतबीर सिंह ने बताया कि हम अपने खर्च पर हर बलिदानी के घर जाकर उनके परिजनों को यह अहसास कराते हैं कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है। लेकिन दुख की बात है कि स्थानीय स्तर पर प्रशासन या पंचायतों का कोई सहयोग नहीं मिलता। हमारी मांग है कि प्रशासन रेडक्रॉस या अन्य माध्यमों से इन कार्यक्रमों में मदद करे और स्वयं भी इनमें भागीदारी सुनिश्चित करे ताकि इन परिवारों का गौरव बढ़े। यदि प्रशासनिक स्तर पर ऐसे गरिमापूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं या सरकारी भागीदारी सुनिश्चित हो, तो इससे न केवल पूर्व सैनिकों बल्कि बलिदानियों के परिवारों का भी समाज में मान-सम्मान और उत्साह कई गुना बढ़ेगा।

कैप्टन प्रताप सिंह।

कैप्टन प्रताप सिंह।

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