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Panipat News: पानीपत के डॉ. देवेश व्हाइट हाउस को देंगे एलियन और यूएफओ पर सलाह
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। पानीपत जिले के जाटल गांव के डॉ. देवेश नांदल को अमेरिका की शीर्ष वैज्ञानिक परिषद में शामिल किया गया है। यह परिषद सीधे व्हाइट हाउस, पेंटागन और एफबीआई को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसमें 37 वर्षीय डॉ. देवेश एलियन और यूएफओ पर सलाह देंगे। वह वर्तमान में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में सीनियर रिसर्चर के तौर पर ब्रह्मांड के रहस्यों पर शोध कर रहे हैं।
डॉ. देवेश नांदल को अमेरिका के यूएपी साइंस एडवाइजरी काउंसिल का वैज्ञानिक सदस्य चुना गया है। यह काउंसिल हार्वर्ड के खगोल वैज्ञानिक प्रोफेसर एवी लोएब के नेतृत्व में गठित की गई है। परिषद का उद्देश्य रहस्यमयी हवाई घटनाओं और संभावित परग्रही जीवन का वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन करना है।
शिक्षा और शोध यात्रा
देवेश नांदल ने यूनाइटेड किंगडम के यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में बैचलर्स की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने स्वीडन के जेटीएच और स्विट्जरलैंड के ईटीएच ज्यूरिख से इलेक्ट्रोफिजिक्स में मास्टर्स किया। उन्होंने स्विट्जरलैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा से एस्ट्रोफिजिक्स में पीएचडी की डिग्री पूरी की। इस दौरान उन्होंने यूरोपियन ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (सीईआरएन) के एंटीमैटर प्रयोगों और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) के रॉकेट प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया।
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खेल से विज्ञान तक का सफर
देवेश के पिता सुमेर नांदल, जो खेल विभाग के उप निदेशक पद से सेवानिवृत्त हैं, ने बताया कि देवेश बचपन से किशोरावस्था तक खेलों में सक्रिय थे। वे नेशनल जूडो चैंपियन रहने के साथ जूडो में ब्लैक बेल्ट भी हैं। उन्होंने 2006 में खेलों की शुरुआत की थी। खेल के साथ-साथ उनकी विज्ञान में भी रुचि थी, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
प्रारंभिक शोध और प्रकाशन
देवेश ने छोटी उम्र में ही तारों और ब्रह्मांड के बारे में रुचि दिखाई थी। उनके पिता ने बताया कि आठवीं कक्षा के दौरान वे अपनी मां के साथ कॉलेज की लाइब्रेरी जाते थे और फिजिक्स की किताबें पढ़ते थे। उन्होंने ब्रह्मांड की शुरुआत में बने विशालकाय तारों के विकास और उनसे ब्लैक होल बनने की प्रक्रिया पर गहन शोध किया है। उनका इस पर आधारित एक रिसर्च पेपर 11वीं कक्षा में प्रकाशित हुआ था।
पिता ने बताया कि हाल ही में नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप द्वारा खोजे गए लिटिल रेड डॉट्स को लेकर उनका शोध अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में रहा है। उन्होंने समझाया था कि ये बिना धातुओं वाले शुरुआती ब्रह्मांड के विशालकाय तारे हो सकते हैं जो ब्लैक होल के बीज बन रहे हैं।
पानीपत। पानीपत जिले के जाटल गांव के डॉ. देवेश नांदल को अमेरिका की शीर्ष वैज्ञानिक परिषद में शामिल किया गया है। यह परिषद सीधे व्हाइट हाउस, पेंटागन और एफबीआई को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसमें 37 वर्षीय डॉ. देवेश एलियन और यूएफओ पर सलाह देंगे। वह वर्तमान में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में सीनियर रिसर्चर के तौर पर ब्रह्मांड के रहस्यों पर शोध कर रहे हैं।
डॉ. देवेश नांदल को अमेरिका के यूएपी साइंस एडवाइजरी काउंसिल का वैज्ञानिक सदस्य चुना गया है। यह काउंसिल हार्वर्ड के खगोल वैज्ञानिक प्रोफेसर एवी लोएब के नेतृत्व में गठित की गई है। परिषद का उद्देश्य रहस्यमयी हवाई घटनाओं और संभावित परग्रही जीवन का वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन करना है।
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शिक्षा और शोध यात्रा
देवेश नांदल ने यूनाइटेड किंगडम के यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में बैचलर्स की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने स्वीडन के जेटीएच और स्विट्जरलैंड के ईटीएच ज्यूरिख से इलेक्ट्रोफिजिक्स में मास्टर्स किया। उन्होंने स्विट्जरलैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा से एस्ट्रोफिजिक्स में पीएचडी की डिग्री पूरी की। इस दौरान उन्होंने यूरोपियन ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (सीईआरएन) के एंटीमैटर प्रयोगों और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) के रॉकेट प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया।
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खेल से विज्ञान तक का सफर
देवेश के पिता सुमेर नांदल, जो खेल विभाग के उप निदेशक पद से सेवानिवृत्त हैं, ने बताया कि देवेश बचपन से किशोरावस्था तक खेलों में सक्रिय थे। वे नेशनल जूडो चैंपियन रहने के साथ जूडो में ब्लैक बेल्ट भी हैं। उन्होंने 2006 में खेलों की शुरुआत की थी। खेल के साथ-साथ उनकी विज्ञान में भी रुचि थी, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
प्रारंभिक शोध और प्रकाशन
देवेश ने छोटी उम्र में ही तारों और ब्रह्मांड के बारे में रुचि दिखाई थी। उनके पिता ने बताया कि आठवीं कक्षा के दौरान वे अपनी मां के साथ कॉलेज की लाइब्रेरी जाते थे और फिजिक्स की किताबें पढ़ते थे। उन्होंने ब्रह्मांड की शुरुआत में बने विशालकाय तारों के विकास और उनसे ब्लैक होल बनने की प्रक्रिया पर गहन शोध किया है। उनका इस पर आधारित एक रिसर्च पेपर 11वीं कक्षा में प्रकाशित हुआ था।
पिता ने बताया कि हाल ही में नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप द्वारा खोजे गए लिटिल रेड डॉट्स को लेकर उनका शोध अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में रहा है। उन्होंने समझाया था कि ये बिना धातुओं वाले शुरुआती ब्रह्मांड के विशालकाय तारे हो सकते हैं जो ब्लैक होल के बीज बन रहे हैं।