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Panipat News: फर्जी सी-फार्म जारी कर करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े में पूर्व ईटीओ समेत दो बरी
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Thu, 26 Mar 2026 02:44 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने फर्जी बिल और सी-फार्म के जरिए करोड़ों रुपये के टैक्स घोटाले के मामले में पूर्व ईटीओ समेत दो आरोपियों को बरी कर दिया है। सुनवाई के दौरान सबूतों के अभाव में दोनों आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया।
अदालत के आदेश के अनुसार पानीपत ईटीओ द्वारा 11 जुलाई 2019 में चांदनी बाग थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप था कि एम/एस पारास एंटरप्राइजेज नाम से एक फर्जी फर्म बनाई गई थी जिसका प्रोपराइटर तरुण को दर्शाया गया था। फर्म के नाम पर 2016-17 व 2017-18 के दौरान करीब 155 करोड़ रुपये के सी-फार्म जारी किए गए। इसके आधार पर 17.33 करोड़ रुपये के टैक्स क्रेडिट का दावा किया गया था। पूरे मामले में सरकार को करीब 30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इस मामले में गोविंद और तत्कालीन एक्साइज एंड टैक्सेशन ऑफिसर (ईटीओ) दिविक शर्मा को आरोपी बनाया था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था।
मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा कुल 31 गवाह अदालत में पेश किए। साथ ही दस्तावेज भी अदालत में सामने पेश किए गए। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि आरोपियों ने कोई रिश्वत ली या उनके बीच किसी प्रकार की साजिश हुई। साथ ही, किसी आरोपी के पास से अवैध कमाई का भी ठोस प्रमाण नहीं मिला। तथ्यों के आधार पर अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में असफल रहा, ऐसे में दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है।
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अदालत के आदेश के अनुसार पानीपत ईटीओ द्वारा 11 जुलाई 2019 में चांदनी बाग थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप था कि एम/एस पारास एंटरप्राइजेज नाम से एक फर्जी फर्म बनाई गई थी जिसका प्रोपराइटर तरुण को दर्शाया गया था। फर्म के नाम पर 2016-17 व 2017-18 के दौरान करीब 155 करोड़ रुपये के सी-फार्म जारी किए गए। इसके आधार पर 17.33 करोड़ रुपये के टैक्स क्रेडिट का दावा किया गया था। पूरे मामले में सरकार को करीब 30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इस मामले में गोविंद और तत्कालीन एक्साइज एंड टैक्सेशन ऑफिसर (ईटीओ) दिविक शर्मा को आरोपी बनाया था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था।
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मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा कुल 31 गवाह अदालत में पेश किए। साथ ही दस्तावेज भी अदालत में सामने पेश किए गए। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि आरोपियों ने कोई रिश्वत ली या उनके बीच किसी प्रकार की साजिश हुई। साथ ही, किसी आरोपी के पास से अवैध कमाई का भी ठोस प्रमाण नहीं मिला। तथ्यों के आधार पर अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में असफल रहा, ऐसे में दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है।