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Panipat News: हर बार गणित में अटक जाती थी, इस बार परीक्षा तैयारी की नीति में बदलाव कर गणित को भी अपनाया
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पानीपत। एक ही प्रकार की परीक्षा तैयारी की नीति अपनाने से तीन बार यूजीसी नेट-जेआरएफ की परीक्षा में असफलता का मुंह देख चुकी वंदिता मोर ने इस बार कार्यनीति में बदलाव किया और देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश-जिले का मान बढ़ाया। वंदिता ने यूजीसी नेट अंग्रेजी विषय में 99.998 परसेंटाइल हासिल की। तीन बार असफलता के बाद भी हार न मानने वाली वंदिता मोर अब युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई है।
वंदिता मोर ने बताया कि वह उग्राखेड़ी गांव की बहू है उनकी शादी निशान सिंह मलिक के बेटे रोहित मलिक से हुई है। शादी से पहले भी उसके माता-पिता ने उसे हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है और अब शादी के बाद सास-ससुर, पति भी उन्हें पढ़ाई व आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और उनकी इस सफलता में परिवार का बहुत सहयोग रहा है। बिना परिवार के सहयोग से सफलता प्राप्त करना मुश्किल था क्योंकि उनकी करीब डेढ़ साल की बेटी है। बेटी, पति और पारिवारिक जिम्मेदारियां अकेले संभालना मुश्किल था लेकिन परिवार के सहयोग से उन्होंने यह कर दिखाया और कड़ी मेहनत व लग्न से चौथे प्रयास में सफलता प्राप्त कर ली।
कार्यनीति में गणित का किया शामिल, मिली सफलता -
वंदिता ने बताया कि उनका गणित शुरू से कमजोर रहा है और यह उनकी असफलता का कारण बनता था। इस बार उन्होंने पहले ही अपनी कार्यनीति में बदलाव कर परीक्षा की तैयारी की थी। डेढ़ महीना सिर्फ गणित की तैयारी की और चौथे प्रयास में 99.998 परसेंटाइल प्राप्त कर सफलता प्राप्त की। वंदिता हाल में रोहतक की बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रही है और आगामी समय में अपनी स्वयं की किताब लिखना चाहती है इसलिए वह पीएचडी के साथ रिसर्च भी करती रहती है।
तीसरे प्रयास में पाई सफलता : रचना
मन के हारे हार है मन के जीते जीत यह कहावत संजय कॉलोनी की रचना ने सच साबित कर दी है। रचना ने तीसरे प्रयास में यूजीसी नेट-जेआरएफ कंप्यूटर साइंस में 97.451 परसेंटाइल प्राप्त कर सफलता हासिल की है। रचना ने बताया कि वह दो बार पहले भी प्रयास कर चुकी है लेकिन यह बार एक या कुछ प्वाइंट से रह जाती थी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और मेहनत व लग्न से तीसरे प्रयास में सफलता प्राप्त कर ली। रचना ने बताया कि उनके पिता वकील है जो बचपन से उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। दो बार असफलता का मुंह देखने के बाद वह थोड़ी कमजोर पड़ गई थी लेकिन पिता के मार्गदर्शन व साथ ने उन्हें दोबारा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने साथ जुनून भर दिया और मेहनत व जज्बे के साथ तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की।
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वंदिता मोर ने बताया कि वह उग्राखेड़ी गांव की बहू है उनकी शादी निशान सिंह मलिक के बेटे रोहित मलिक से हुई है। शादी से पहले भी उसके माता-पिता ने उसे हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है और अब शादी के बाद सास-ससुर, पति भी उन्हें पढ़ाई व आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और उनकी इस सफलता में परिवार का बहुत सहयोग रहा है। बिना परिवार के सहयोग से सफलता प्राप्त करना मुश्किल था क्योंकि उनकी करीब डेढ़ साल की बेटी है। बेटी, पति और पारिवारिक जिम्मेदारियां अकेले संभालना मुश्किल था लेकिन परिवार के सहयोग से उन्होंने यह कर दिखाया और कड़ी मेहनत व लग्न से चौथे प्रयास में सफलता प्राप्त कर ली।
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कार्यनीति में गणित का किया शामिल, मिली सफलता -
वंदिता ने बताया कि उनका गणित शुरू से कमजोर रहा है और यह उनकी असफलता का कारण बनता था। इस बार उन्होंने पहले ही अपनी कार्यनीति में बदलाव कर परीक्षा की तैयारी की थी। डेढ़ महीना सिर्फ गणित की तैयारी की और चौथे प्रयास में 99.998 परसेंटाइल प्राप्त कर सफलता प्राप्त की। वंदिता हाल में रोहतक की बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रही है और आगामी समय में अपनी स्वयं की किताब लिखना चाहती है इसलिए वह पीएचडी के साथ रिसर्च भी करती रहती है।
तीसरे प्रयास में पाई सफलता : रचना
मन के हारे हार है मन के जीते जीत यह कहावत संजय कॉलोनी की रचना ने सच साबित कर दी है। रचना ने तीसरे प्रयास में यूजीसी नेट-जेआरएफ कंप्यूटर साइंस में 97.451 परसेंटाइल प्राप्त कर सफलता हासिल की है। रचना ने बताया कि वह दो बार पहले भी प्रयास कर चुकी है लेकिन यह बार एक या कुछ प्वाइंट से रह जाती थी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और मेहनत व लग्न से तीसरे प्रयास में सफलता प्राप्त कर ली। रचना ने बताया कि उनके पिता वकील है जो बचपन से उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। दो बार असफलता का मुंह देखने के बाद वह थोड़ी कमजोर पड़ गई थी लेकिन पिता के मार्गदर्शन व साथ ने उन्हें दोबारा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने साथ जुनून भर दिया और मेहनत व जज्बे के साथ तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की।