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प्रेम बनता नहीं प्रकट होता है : राधे राधे महाराज
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कथा सुनाते राधे राधे महाराज। स्रोत : समिति
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पानीपत। प्रेम बनता नहीं प्रकट होता है ये शब्द रविवार को श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन राधे राधे महाराज ने कहे। कार्यक्रम का आयोजन श्री अवध धाम मंदिर में वार्षिक महोत्सव और हनुमान जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में श्री अवध धाम सेवा समिति के तत्वावधान में किया जा रहा है।
कथा वाचक पंडित राधे-राधे महाराज ने कहा कि प्रेम स्वतः है स्वाभाविक है। कोशिश करके नहीं किया जा सकता। कई लोग कहते हैं हम साठ के बाद भक्ति ही करेंगे। ऐसे नहीं होता है। ये तो पता नहीं कहां हो जाय, कब हो जाए। मीरा को मइया ने बस इतना सा ही कह दिया कि देख सामने मूर्ति जो बैठे हैं गोपालजी वही तेरे पति हैं। बस हो गया काम। जाके सिर मोर मुकुट मेरोपति सोइ। ये तो अंदर हृदय में भाव रहे कहां किसको देखकर बात बन जाए।
उन्होंने कहा कि कोई योजना बनाकर ये चीज नहीं होती, धीरे-धीरे हम जगत छोड़ रहे हैं धीरे-धीरे अब हम भगवान से प्रेम करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रेम तो धर्माचरण के पथ पर चलकर किसी संत की कृपा हो जाए, सत्संग में बैठे-बैठै किस महापुरुष की कृपा हो जाए। साधु दया करुणा का स्वरूप है। साधु इस संसार में भजन दयालु होकर देता है जब-जब यहां की दयनीय स्थिति देखता है तब-तब उसके मन में जिज्ञासा होती है कि ये सामने वाला कभी भजन का सुख भी लेकर देखे।
अवध धाम मंदिर के परमाध्यक्ष दाऊजी महाराज ने कहा कि नंद महोत्सव प्रभु का महोत्सव है इसको पारिवारिक रूप देकर पुण्य के भागी बनें। जिस प्रकार से अपने बच्चों का जन्म उत्सव मनाते हैं उसी प्रकार से हमें भगवान का भी जन्म उत्सव मनाना चाहिए ताकि भगवान भी आपके घर को अपना घर मानकर आपके घर पर वास करें। कृष्ण जन्मोत्सव पर पंडाल को फूलों से सजाया गया। माखन मिश्री का भोग लगाया गया साथ ही फूलों की पुष्प वर्षा की गई। श्रद्धालुओं ने नंद महोत्सव के उपलक्ष्य में नृत्य किया। इस अवसर पर संजय अग्रवाल, डॉ. रमेश चुग, सतीष तागरा, धीरज छावड़ा, तिलकराज मिगलानी, प्रीतम गुज्जर, अजय बंसल, मंच संचालक मास्टर मुकेश बॉस उपस्थित रहे।
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कथा वाचक पंडित राधे-राधे महाराज ने कहा कि प्रेम स्वतः है स्वाभाविक है। कोशिश करके नहीं किया जा सकता। कई लोग कहते हैं हम साठ के बाद भक्ति ही करेंगे। ऐसे नहीं होता है। ये तो पता नहीं कहां हो जाय, कब हो जाए। मीरा को मइया ने बस इतना सा ही कह दिया कि देख सामने मूर्ति जो बैठे हैं गोपालजी वही तेरे पति हैं। बस हो गया काम। जाके सिर मोर मुकुट मेरोपति सोइ। ये तो अंदर हृदय में भाव रहे कहां किसको देखकर बात बन जाए।
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उन्होंने कहा कि कोई योजना बनाकर ये चीज नहीं होती, धीरे-धीरे हम जगत छोड़ रहे हैं धीरे-धीरे अब हम भगवान से प्रेम करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रेम तो धर्माचरण के पथ पर चलकर किसी संत की कृपा हो जाए, सत्संग में बैठे-बैठै किस महापुरुष की कृपा हो जाए। साधु दया करुणा का स्वरूप है। साधु इस संसार में भजन दयालु होकर देता है जब-जब यहां की दयनीय स्थिति देखता है तब-तब उसके मन में जिज्ञासा होती है कि ये सामने वाला कभी भजन का सुख भी लेकर देखे।
अवध धाम मंदिर के परमाध्यक्ष दाऊजी महाराज ने कहा कि नंद महोत्सव प्रभु का महोत्सव है इसको पारिवारिक रूप देकर पुण्य के भागी बनें। जिस प्रकार से अपने बच्चों का जन्म उत्सव मनाते हैं उसी प्रकार से हमें भगवान का भी जन्म उत्सव मनाना चाहिए ताकि भगवान भी आपके घर को अपना घर मानकर आपके घर पर वास करें। कृष्ण जन्मोत्सव पर पंडाल को फूलों से सजाया गया। माखन मिश्री का भोग लगाया गया साथ ही फूलों की पुष्प वर्षा की गई। श्रद्धालुओं ने नंद महोत्सव के उपलक्ष्य में नृत्य किया। इस अवसर पर संजय अग्रवाल, डॉ. रमेश चुग, सतीष तागरा, धीरज छावड़ा, तिलकराज मिगलानी, प्रीतम गुज्जर, अजय बंसल, मंच संचालक मास्टर मुकेश बॉस उपस्थित रहे।