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Panipat News: तैयारी आधी-अधूरी, बाढ़ के खौफ की दास्तान पूरी
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जगमहेंद्र सरोहा/उमेश त्यागी पानीपत/सनौली। यमुना नदी का पानी हर साल तटवर्ती गांवों में तबाही मचाता है। मानसून दस्तक दे चुका है और परंतु बाढ़ से निपटने की तैयारियां आधी - अधूरी हैं। इससे लोगों में बाढ़ का खौफ है। सिंचाई विभाग ने बाढ़ से बचाव कार्य के लिए जिले के चार गांवों में पांच स्थानों पर 9.60 करोड़ की लागत से 15 नई ठोकर बनाए जाने के साथ करीब सात हजार फीट पुश्ताबंदी करनी थी।
30 जून की समय सीमा बीत जाने के बाद सिर्फ गोयला में पत्थरों की ठोकर लगाने का काम चल रहा है। बाकी जगहों पर सिर्फ पत्थर गिराया गया है, काम की शुरुआत होनी है। अधिकारी काम में देरी कारण सरकारी कमेटियों के निरीक्षण और टेंडर में देरी बता रहे हैं।
प्रदेश में मानसून की दस्तक हो चुकी है। मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है। पिछले बारिश में यमुना की तबाही से सबक लेकर तैयार की गई बाढ़ बचाव योजना को जमीन विभाग नहीं उतार पाया। सिंचाई विभाग यमुना नदी पर ठोकर लगाने के सबसे महत्वपूर्ण कार्य को पूरा नहीं कर पाया है। ऐसे में यमुना किनारे बसे लोगों में बाढ़ का डर सताने लगा है। स्थिति यह है कि 22 मई से ठेकेदारों द्वारा यमुना बांध के किनारे बड़ी मात्रा में पत्थर लाकर डाले गए हैं। यमुना किनारे इन पत्थरों को कंक्रीट और लोहे के तारों के जाल (तार काटने और क्रेटिंग) में बांधने का काम चल रहा है। इसके बाद इन्हें नदी के अंदर ठोकरों के रूप में स्थापित किया जाना है।
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याद आ गया 11 जुलाई 2023 का मंजर : यमुना किनारे बसे लोगों के जेहन में 11 जुलाई 2023 का खौफनाक मंजर आज भी ताजा है। तब अचानक पानी बढ़ने से सनौली क्षेत्र के गांव नवादा आर के पास यमुना का मजबूत माना जाने वाला तटबंध टूट गया था।
इसके चलते दो दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था और हजारों एकड़ खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई थीं। ग्रामीणों को डर है कि यदि इस बार भी लापरवाही बरती गई, तो इतिहास खुद को दोहरा सकता है। पानीपत जिले में यमुना नदी गांव राणा माजरा से हथवाला व राक्सेडा तक करीब 37 किलोमीटर के दायरे में बहती है। इससे सटे 22 से अधिक गांव सीधे तौर पर बाढ़ के प्रति संवेदनशील हैं। ब्यूरो/संवाद
बैराज से पानी छोड़ा गया तो पत्थर भी नहीं बचेंगे
यमुना सुधार समिति के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट रत्तन सिंह रावल, जिला पार्षद प्रतिनिधि विपिन पांचाल सनौली, सनौली खुर्द के सरपंच संजय त्यागी, रिशपुर के सरपंच राजदीप, पत्थरगढ़ के सरपंच सलीम अहमद और नवादा आर के सरपंच जोगेंद्र सहित ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग की अनदेखी पर रोष व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि तामशाबाद और अन्य संवेदनशील स्थलों पर केवल पत्थर लाकर डाल दिए हैं। जुलाई महीने में हर दिन पानी का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ता है। यदि हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़ दिया गया तो नदी के तेज बहाव के बीच पत्थरों की क्रेटिंग करना मुश्किल हो जाएगा। करोड़ों के पत्थर पानी में बह जाएंगे।
बजट की मंजूरी देरी से मिल पाई थी। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी करने में समय लगा। यमुना में सभी जगह पत्थर पहुंच गया है। गोयला में पत्थरों की ठोकर लगाने का काम शुरू कर दिया है। बाकी जगहों पर तुरंत चालू किया जाएगा। -सतीश कुमार, उपमंडलीय अधिकारी, सिंचाई विभाग, पानीपत।
सुरक्षा कार्यों के लिए 9.60 करोड़ का बजट मंजूर
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सिंचाई विभाग ने इस वर्ष बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए 9.60 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया
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जिले के चार गांवों में पांच चिह्नित संवेदनशील स्थानों पर काम होना तय हुआ
g तामशाबाद में करीब दो करोड़ रुपये से पत्थरों की पांच नई ठोकरें लगाई जानी हैं और तटबंध की ढलान पर पानी के कटाव को रोकने के लिए 500 फीट की पुश्ताबंदी की जानी है।
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खोजकीपुर में करीब 80 लाख रुपये की लागत से पत्थरों की दो नई ठोकरें लगेंगी। 1 पुरानी ठोकर की मरम्मत की जानी है। यहां 500 मीटर क्षेत्र में पुश्ताबंदी की जाएगी। खोजकीपुर गांव के दूसरे हिस्से में करीब दो करोड़ रुपये से दो नई ठोकर, दो पुरानी ठोकरों की रिपेयर और 2500 फीट लंबी पुश्ताबंदी का कार्य होना है।
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बिलासपुर गांव में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से छह नई ठोकरें बनाई जाएंगी। इसके साथ 2200 फीट लंबी पुश्ताबंदी की जानी है।
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गोयला गांव करीब 80 लाख रुपये की लागत से एक ठोकर की मरम्मत और पुश्ताबंदी का काम किया जाना है।
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30 जून की समय सीमा बीत जाने के बाद सिर्फ गोयला में पत्थरों की ठोकर लगाने का काम चल रहा है। बाकी जगहों पर सिर्फ पत्थर गिराया गया है, काम की शुरुआत होनी है। अधिकारी काम में देरी कारण सरकारी कमेटियों के निरीक्षण और टेंडर में देरी बता रहे हैं।
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प्रदेश में मानसून की दस्तक हो चुकी है। मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है। पिछले बारिश में यमुना की तबाही से सबक लेकर तैयार की गई बाढ़ बचाव योजना को जमीन विभाग नहीं उतार पाया। सिंचाई विभाग यमुना नदी पर ठोकर लगाने के सबसे महत्वपूर्ण कार्य को पूरा नहीं कर पाया है। ऐसे में यमुना किनारे बसे लोगों में बाढ़ का डर सताने लगा है। स्थिति यह है कि 22 मई से ठेकेदारों द्वारा यमुना बांध के किनारे बड़ी मात्रा में पत्थर लाकर डाले गए हैं। यमुना किनारे इन पत्थरों को कंक्रीट और लोहे के तारों के जाल (तार काटने और क्रेटिंग) में बांधने का काम चल रहा है। इसके बाद इन्हें नदी के अंदर ठोकरों के रूप में स्थापित किया जाना है।
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याद आ गया 11 जुलाई 2023 का मंजर : यमुना किनारे बसे लोगों के जेहन में 11 जुलाई 2023 का खौफनाक मंजर आज भी ताजा है। तब अचानक पानी बढ़ने से सनौली क्षेत्र के गांव नवादा आर के पास यमुना का मजबूत माना जाने वाला तटबंध टूट गया था।
इसके चलते दो दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था और हजारों एकड़ खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई थीं। ग्रामीणों को डर है कि यदि इस बार भी लापरवाही बरती गई, तो इतिहास खुद को दोहरा सकता है। पानीपत जिले में यमुना नदी गांव राणा माजरा से हथवाला व राक्सेडा तक करीब 37 किलोमीटर के दायरे में बहती है। इससे सटे 22 से अधिक गांव सीधे तौर पर बाढ़ के प्रति संवेदनशील हैं। ब्यूरो/संवाद
बैराज से पानी छोड़ा गया तो पत्थर भी नहीं बचेंगे
यमुना सुधार समिति के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट रत्तन सिंह रावल, जिला पार्षद प्रतिनिधि विपिन पांचाल सनौली, सनौली खुर्द के सरपंच संजय त्यागी, रिशपुर के सरपंच राजदीप, पत्थरगढ़ के सरपंच सलीम अहमद और नवादा आर के सरपंच जोगेंद्र सहित ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग की अनदेखी पर रोष व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि तामशाबाद और अन्य संवेदनशील स्थलों पर केवल पत्थर लाकर डाल दिए हैं। जुलाई महीने में हर दिन पानी का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ता है। यदि हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़ दिया गया तो नदी के तेज बहाव के बीच पत्थरों की क्रेटिंग करना मुश्किल हो जाएगा। करोड़ों के पत्थर पानी में बह जाएंगे।
बजट की मंजूरी देरी से मिल पाई थी। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी करने में समय लगा। यमुना में सभी जगह पत्थर पहुंच गया है। गोयला में पत्थरों की ठोकर लगाने का काम शुरू कर दिया है। बाकी जगहों पर तुरंत चालू किया जाएगा। -सतीश कुमार, उपमंडलीय अधिकारी, सिंचाई विभाग, पानीपत।
सुरक्षा कार्यों के लिए 9.60 करोड़ का बजट मंजूर
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सिंचाई विभाग ने इस वर्ष बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए 9.60 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया
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जिले के चार गांवों में पांच चिह्नित संवेदनशील स्थानों पर काम होना तय हुआ
g तामशाबाद में करीब दो करोड़ रुपये से पत्थरों की पांच नई ठोकरें लगाई जानी हैं और तटबंध की ढलान पर पानी के कटाव को रोकने के लिए 500 फीट की पुश्ताबंदी की जानी है।
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खोजकीपुर में करीब 80 लाख रुपये की लागत से पत्थरों की दो नई ठोकरें लगेंगी। 1 पुरानी ठोकर की मरम्मत की जानी है। यहां 500 मीटर क्षेत्र में पुश्ताबंदी की जाएगी। खोजकीपुर गांव के दूसरे हिस्से में करीब दो करोड़ रुपये से दो नई ठोकर, दो पुरानी ठोकरों की रिपेयर और 2500 फीट लंबी पुश्ताबंदी का कार्य होना है।
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बिलासपुर गांव में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से छह नई ठोकरें बनाई जाएंगी। इसके साथ 2200 फीट लंबी पुश्ताबंदी की जानी है।
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गोयला गांव करीब 80 लाख रुपये की लागत से एक ठोकर की मरम्मत और पुश्ताबंदी का काम किया जाना है।