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Panipat News: कंपनी से नहीं कर्मचारी से करें वसूली
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पानीपत। सिंगापुर के हॉलीडे टूर पैकेज में पूरी सुविधाएं न मिलने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने ट्रेवल कंपनी को राहत दी है। शिकायतकर्ता के दावे को खारिज करते हुए कहा कि कंपनी को जितना भुगतान मिला उसी के हिसाब से सुविधाएं दी।
अतिरिक्त भुगतान की वसूली एजेंसी के कर्मचारियों ने की थी। उन्हीं कर्मचारियों से वसूली के लिए अलग ने याचिका दाखिल की जाए। पानीपत के दीपक ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना कहना थ कि उन्होंने ट्रेवल कंपनी के जरिए सिंगापुर टूर पैकेज के लिए संपर्क किया था।
कंपनी के कर्मचारियों ने करीब 2.06 लाख रुपये लिए, लेकिन पैकेज पूरा नहीं कराया। जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे तो पैसे भी वापस नहीं किए। बाद में कुछ टिकट जारी किए गए, लेकिन शेष राशि लौटाने में टालमटोल की गई।
शिकायतकर्ता ने 1.44 लाख रुपये की वापसी, एक लाख रुपये मुआवजा और 22 हजार रुपए खर्च की मांग की थी। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से दलील दी गई कि उनके खाते में केवल 1.20 लाख रुपये ही जमा हुए थे और उसी के अनुसार टिकट व अन्य सेवाएं प्रदान कर दी गईं।
कंपनी ने यह भी कहा कि बाकी रकम कर्मचारियों के निजी खातों में जमा कराई गई, जिसकी कंपनी को जानकारी नहीं थी। सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि कंपनी के खिलाफ सीधे तौर पर भुगतान और अनुबंध का स्पष्ट संबंध साबित नहीं होता। जिन रसीदों के आधार पर अतिरिक्त भुगतान का दावा किया गया है, वे कंपनी के अधिकृत लेनदेन से संबंधित नहीं हैं। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यदि शिकायतकर्ता को किसी राशि की वसूली करनी है तो वह संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सिविल कोर्ट में रिकवरी सूट दायर कर सकता है।
कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता शिकायत इस रूप में बनाए रखने योग्य नहीं है। सुनवाई के बाद आयोग ने याचिका को खारिज कर दिया।
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अतिरिक्त भुगतान की वसूली एजेंसी के कर्मचारियों ने की थी। उन्हीं कर्मचारियों से वसूली के लिए अलग ने याचिका दाखिल की जाए। पानीपत के दीपक ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना कहना थ कि उन्होंने ट्रेवल कंपनी के जरिए सिंगापुर टूर पैकेज के लिए संपर्क किया था।
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कंपनी के कर्मचारियों ने करीब 2.06 लाख रुपये लिए, लेकिन पैकेज पूरा नहीं कराया। जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे तो पैसे भी वापस नहीं किए। बाद में कुछ टिकट जारी किए गए, लेकिन शेष राशि लौटाने में टालमटोल की गई।
शिकायतकर्ता ने 1.44 लाख रुपये की वापसी, एक लाख रुपये मुआवजा और 22 हजार रुपए खर्च की मांग की थी। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से दलील दी गई कि उनके खाते में केवल 1.20 लाख रुपये ही जमा हुए थे और उसी के अनुसार टिकट व अन्य सेवाएं प्रदान कर दी गईं।
कंपनी ने यह भी कहा कि बाकी रकम कर्मचारियों के निजी खातों में जमा कराई गई, जिसकी कंपनी को जानकारी नहीं थी। सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि कंपनी के खिलाफ सीधे तौर पर भुगतान और अनुबंध का स्पष्ट संबंध साबित नहीं होता। जिन रसीदों के आधार पर अतिरिक्त भुगतान का दावा किया गया है, वे कंपनी के अधिकृत लेनदेन से संबंधित नहीं हैं। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यदि शिकायतकर्ता को किसी राशि की वसूली करनी है तो वह संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सिविल कोर्ट में रिकवरी सूट दायर कर सकता है।
कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता शिकायत इस रूप में बनाए रखने योग्य नहीं है। सुनवाई के बाद आयोग ने याचिका को खारिज कर दिया।