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Panipat News: जयमल और फत्ते की बलिदान गाथा सुन जोश से भर उठे दर्शक
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पानीपत। आर्य पीजी कॉलेज चार दिवसीय 11वें रत्नावली युवा सांग महोत्सव में रविवार को जयमल फत्ते के वीर का मंचन किया गया। कलाकरों ने शानदार प्रस्तुति के साथ सबका मन मोह लिया। इस दौरान जयमल और फत्ते के बलिदान की गाथा सुनकर दर्शक जोश से भर उठे।
इसके साथ चार दिवसीय महोत्सव का समापन हो गया। मुख्यातिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष एवं बीआर जनता कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. ऋषिपाल रहे। विशिष्ट अतिथि लोक कलाकार महावीर गुड्डू के शिष्य अशोक गुड्डू रहे। महोत्सव के अंतिम दिन मेजबान आर्य पीजी कॉलेज के विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक और वीर रस से परिपूर्ण सांग जयमल-फत्ते का मंचन किया।
कलाकारों ने चित्तौड़गढ़ की रक्षा के लिए जयमल और फत्ते के बलिदान की गाथा को इतनी ओजस्वी वाणी में प्रस्तुत किया कि पूरा सभागार जय हरियाणा के नारों से गूंज उठा। शहर और आस-पास के गांवों से आए बुजुर्गों और युवाओं ने मटके पर पड़ी हर चोट पर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
कॉलेज प्रबंधन ने लोक संस्कृति के संरक्षक लाखू बुआना के बुजुर्ग भीम सिंह मलिक, मामचंद मतरौली सहित क्षेत्र के कई बुजुर्गों को पगड़ी और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने कहा कि बुजुर्ग हमारी संस्कृति की जड़ हैं और उनका आशीर्वाद ही इस महोत्सव की सफलता का आधार है। मुख्यातिथि प्रो. डॉ. ऋषिपाल ने कहा कि रत्नावली महोत्सव युवाओं के साथ संस्कृति को नई दिशा देता है। हमें अपनी संस्कृति को बचाकर रखना है। इससे समाज व देश को मजबूती मिलेगी।
सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रभारी डॉ. रामनिवास ने अतिथियोंर विशेष रूप से दूर-दराज से आए दर्शकों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन डॉ. दिनेश गाहल्याण ने किया। इस अवसर पर डॉ. विजय सिंह, डॉ. नीलू खालसा, प्राध्यापक अकरम खान व प्राध्यापिका दीक्षा नंदा आदि मौजूद रहीं।
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इसके साथ चार दिवसीय महोत्सव का समापन हो गया। मुख्यातिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष एवं बीआर जनता कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. ऋषिपाल रहे। विशिष्ट अतिथि लोक कलाकार महावीर गुड्डू के शिष्य अशोक गुड्डू रहे। महोत्सव के अंतिम दिन मेजबान आर्य पीजी कॉलेज के विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक और वीर रस से परिपूर्ण सांग जयमल-फत्ते का मंचन किया।
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कलाकारों ने चित्तौड़गढ़ की रक्षा के लिए जयमल और फत्ते के बलिदान की गाथा को इतनी ओजस्वी वाणी में प्रस्तुत किया कि पूरा सभागार जय हरियाणा के नारों से गूंज उठा। शहर और आस-पास के गांवों से आए बुजुर्गों और युवाओं ने मटके पर पड़ी हर चोट पर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
कॉलेज प्रबंधन ने लोक संस्कृति के संरक्षक लाखू बुआना के बुजुर्ग भीम सिंह मलिक, मामचंद मतरौली सहित क्षेत्र के कई बुजुर्गों को पगड़ी और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने कहा कि बुजुर्ग हमारी संस्कृति की जड़ हैं और उनका आशीर्वाद ही इस महोत्सव की सफलता का आधार है। मुख्यातिथि प्रो. डॉ. ऋषिपाल ने कहा कि रत्नावली महोत्सव युवाओं के साथ संस्कृति को नई दिशा देता है। हमें अपनी संस्कृति को बचाकर रखना है। इससे समाज व देश को मजबूती मिलेगी।
सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रभारी डॉ. रामनिवास ने अतिथियोंर विशेष रूप से दूर-दराज से आए दर्शकों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन डॉ. दिनेश गाहल्याण ने किया। इस अवसर पर डॉ. विजय सिंह, डॉ. नीलू खालसा, प्राध्यापक अकरम खान व प्राध्यापिका दीक्षा नंदा आदि मौजूद रहीं।