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Panipat News: एचटी के नीचे 32 मीटर दायरे में अवैध निर्माणों को ढहाएगा निगम
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Wed, 10 Jun 2026 02:50 AM IST
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आवासीय क्षेत्र में लगी टावर लाइन। स्रोत : निगम
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। शहर में हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे बने अवैध निर्माणों पर अब कार्रवाई की जाएगी। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) और नगर निगम पानीपत ने पहली बार ऐसी कॉलोनियों, मकानों, फैक्ट्रियों और सड़कों की रिपोर्ट तैयार की है। इन सभी अवैध ढांचों को गिराने के नोटिस जारी किए जाएंगे। यह कार्रवाई 32 मीटर के प्रतिबंधित गलियारे में आने वाले निर्माणों पर की जाएगी।
बीबीएमबी पावर विंग के इंजीनियरों और नगर निगम पानीपत की एक संयुक्त टीम ने मंगलवार को करीब आधा दर्जन स्थानों का मौका मुआयना किया। टीम ने 32 मीटर के प्रतिबंधित गलियारे में आने वाले हर अवैध ढांचे, प्लॉट और सड़क की पहचान की। इनमें मकान, दुकान और अन्य प्रतिष्ठान शामिल हैं।
इन सभी को हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के तहत काम रोकने और अवैध निर्माण ढहाने के नोटिस दिए जाएंगे। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सुरक्षा और विद्युत आपूर्ति) नियमावली 2010 की धारा 63 के तहत 220 केवी लाइनों के नीचे 32 मीटर का गलियारा पूरी तरह प्रतिबंधित है।
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इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का ढांचा खड़ा करना पूरी तरह वर्जित है। निजी कॉलोनाइजरों द्वारा इस दायरे में व्यावसायिक निर्माण और अनधिकृत सड़क विकास नगर निगम के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
जानलेवा हादसों का खतरा
बीबीएमबी के तकनीकी अधिकारियों ने इन लाइनों के नीचे अत्यधिक खतरनाक इंडक्टेंस जोन बनने की बात कही है। इस क्षेत्र में निर्माण करने या रहने से करंट लगने का सीधा खतरा रहता है। फ्लैश ओवर और बड़े जानलेवा हादसे होने की आशंका भी बनी रहती है। इसके अलावा, ये अतिक्रमण आपातकालीन मरम्मत के समय बीबीएमबी की टीमों का रास्ता रोकते हैं। इससे पूरे क्षेत्र की ग्रिड स्थिरता को भी खतरा पैदा हो गया है।
महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन लाइनें
पानीपत से दो प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनें गुजरती हैं। इनमें 220 केवी डबल सर्किट दुलकोट-पानीपत लाइन शामिल है, जो वर्ष 1964 से संचालित है। यह लाइन नांगल से देश की राजधानी दिल्ली तक बिजली आपूर्ति करती है। दूसरी 220 केवी सिंगल सर्किट कुरुक्षेत्र-पानीपत लाइन है, जो वर्ष 1975 से चल रही है। यह लाइन बीबीएमबी कुरुक्षेत्र को 400 केवी बीबीएमबी पानीपत सबस्टेशन से जोड़ती है।
वर्जन :
विशिष्ट ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे किसी प्रकार की निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। यह खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसी संपतियों को बिना किसी पूर्व सूचना के ध्वस्त किया जाएगा। बीबीएमबी द्वारा प्रतिवर्ष इसकी चेतावनी भी जारी की जाती है। बावजूद इसके कुछ लोग गतिविधियां चला रहे हैं। लोगों से अपील है कि इन लाइनों के नीचे किसी डीलर से कोई भी प्लॉट न खरीदें और न ही कोई निर्माण करें। -डॉ. पंकज, आयुक्त, नगर निगम।
पानीपत। शहर में हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे बने अवैध निर्माणों पर अब कार्रवाई की जाएगी। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) और नगर निगम पानीपत ने पहली बार ऐसी कॉलोनियों, मकानों, फैक्ट्रियों और सड़कों की रिपोर्ट तैयार की है। इन सभी अवैध ढांचों को गिराने के नोटिस जारी किए जाएंगे। यह कार्रवाई 32 मीटर के प्रतिबंधित गलियारे में आने वाले निर्माणों पर की जाएगी।
बीबीएमबी पावर विंग के इंजीनियरों और नगर निगम पानीपत की एक संयुक्त टीम ने मंगलवार को करीब आधा दर्जन स्थानों का मौका मुआयना किया। टीम ने 32 मीटर के प्रतिबंधित गलियारे में आने वाले हर अवैध ढांचे, प्लॉट और सड़क की पहचान की। इनमें मकान, दुकान और अन्य प्रतिष्ठान शामिल हैं।
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इन सभी को हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के तहत काम रोकने और अवैध निर्माण ढहाने के नोटिस दिए जाएंगे। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सुरक्षा और विद्युत आपूर्ति) नियमावली 2010 की धारा 63 के तहत 220 केवी लाइनों के नीचे 32 मीटर का गलियारा पूरी तरह प्रतिबंधित है।
इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का ढांचा खड़ा करना पूरी तरह वर्जित है। निजी कॉलोनाइजरों द्वारा इस दायरे में व्यावसायिक निर्माण और अनधिकृत सड़क विकास नगर निगम के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
जानलेवा हादसों का खतरा
बीबीएमबी के तकनीकी अधिकारियों ने इन लाइनों के नीचे अत्यधिक खतरनाक इंडक्टेंस जोन बनने की बात कही है। इस क्षेत्र में निर्माण करने या रहने से करंट लगने का सीधा खतरा रहता है। फ्लैश ओवर और बड़े जानलेवा हादसे होने की आशंका भी बनी रहती है। इसके अलावा, ये अतिक्रमण आपातकालीन मरम्मत के समय बीबीएमबी की टीमों का रास्ता रोकते हैं। इससे पूरे क्षेत्र की ग्रिड स्थिरता को भी खतरा पैदा हो गया है।
महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन लाइनें
पानीपत से दो प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनें गुजरती हैं। इनमें 220 केवी डबल सर्किट दुलकोट-पानीपत लाइन शामिल है, जो वर्ष 1964 से संचालित है। यह लाइन नांगल से देश की राजधानी दिल्ली तक बिजली आपूर्ति करती है। दूसरी 220 केवी सिंगल सर्किट कुरुक्षेत्र-पानीपत लाइन है, जो वर्ष 1975 से चल रही है। यह लाइन बीबीएमबी कुरुक्षेत्र को 400 केवी बीबीएमबी पानीपत सबस्टेशन से जोड़ती है।
वर्जन :
विशिष्ट ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे किसी प्रकार की निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। यह खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसी संपतियों को बिना किसी पूर्व सूचना के ध्वस्त किया जाएगा। बीबीएमबी द्वारा प्रतिवर्ष इसकी चेतावनी भी जारी की जाती है। बावजूद इसके कुछ लोग गतिविधियां चला रहे हैं। लोगों से अपील है कि इन लाइनों के नीचे किसी डीलर से कोई भी प्लॉट न खरीदें और न ही कोई निर्माण करें। -डॉ. पंकज, आयुक्त, नगर निगम।