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Panipat News: बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या के दोषी तांत्रिक को आखिरी सांस तक कैद की सजा
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दोषी शिवकुमार। अभियोजन
- फोटो : samvad
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश पीयूष शर्मा की अदालत ने सात साल की बच्ची की दुष्कर्म से हत्या के साढ़े तीन साल पुराने मामले में आरोपी तांत्रिक शिवकुमार (35) को मंगलवार को दोषी करार देते हुए आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई। उस पर 1.35 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। 24 अक्तूबर 2022 को दिवाली के दिन हुई इस घटना में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की, मासूम बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या करना बेहद जघन्य अपराध है। ऐसा कृत्य करने के दोषी अपराधी को समाज के बीच नहीं रखा जा सकता है। शहर के पुराना औद्योगिक क्षेत्र में हुई इस घटना में फैसले का आधार अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए 27 लोगों की गवाही और विधि विज्ञान प्रयोगशाला ( एफएसएल) की रिपोर्ट बनी। गवाहों और साक्ष्यों में सबसे अहम डीएनए रिपोर्ट रही।
बच्ची के शव पर मिले तरल पदार्थ का डीएनए परीक्षण कराया गया था। यह डीएनए तांत्रिक शिव कुमार का पाया गया था। कोर्ट के फैसले के अनुसार, मूल रूप से यूपी के लखीमपुर खीरी के नीम गांव क्षेत्र के बड़रिया गांव का निवासी शिव कुमार पानीपत में कुलदीप नगर में रहता था और आरा मशीन पर काम करता था। पानीपत से पहले वह यमुनानगर के गुलाब नगर में रहता था। पानीपत में आने के बाद उसका बच्ची के मजदूरी करने वाले परिवार के साथ मेलजोल हो गया था।
24 अक्तूबर 2022 को बच्ची के परिजन बाहर गए थे। बच्ची घर में खेल रही थी। शिव कुमार उसे घर से ही अगवा कर झाडि़यों में ले गया था। वहां दरिंदगी के बाद बच्ची की पायजामी से ही गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी। बच्ची के न मिलने पर 25 अक्तूबर पिता ने गुमशुदगी दर्ज कराई। शिव कुमार भी बच्ची के परिजनों के साथ उसे तलाश करने का नाटक करता रहा।
पुलिस तलाश करते करते जैसे ही उन झाडि़यों तक पहुंचीं जिनमें बच्ची का शव मिला था, वैसे ही शिव कुमार भाग निकला। इससे पुलिस को उस पर शक हो गया। उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस ने उसे 27 अक्तूबर को पश्चिम बंगाल के हावड़ा से गिरफ्तार किया था।
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पानीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश पीयूष शर्मा की अदालत ने सात साल की बच्ची की दुष्कर्म से हत्या के साढ़े तीन साल पुराने मामले में आरोपी तांत्रिक शिवकुमार (35) को मंगलवार को दोषी करार देते हुए आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई। उस पर 1.35 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। 24 अक्तूबर 2022 को दिवाली के दिन हुई इस घटना में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की, मासूम बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या करना बेहद जघन्य अपराध है। ऐसा कृत्य करने के दोषी अपराधी को समाज के बीच नहीं रखा जा सकता है। शहर के पुराना औद्योगिक क्षेत्र में हुई इस घटना में फैसले का आधार अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए 27 लोगों की गवाही और विधि विज्ञान प्रयोगशाला ( एफएसएल) की रिपोर्ट बनी। गवाहों और साक्ष्यों में सबसे अहम डीएनए रिपोर्ट रही।
बच्ची के शव पर मिले तरल पदार्थ का डीएनए परीक्षण कराया गया था। यह डीएनए तांत्रिक शिव कुमार का पाया गया था। कोर्ट के फैसले के अनुसार, मूल रूप से यूपी के लखीमपुर खीरी के नीम गांव क्षेत्र के बड़रिया गांव का निवासी शिव कुमार पानीपत में कुलदीप नगर में रहता था और आरा मशीन पर काम करता था। पानीपत से पहले वह यमुनानगर के गुलाब नगर में रहता था। पानीपत में आने के बाद उसका बच्ची के मजदूरी करने वाले परिवार के साथ मेलजोल हो गया था।
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24 अक्तूबर 2022 को बच्ची के परिजन बाहर गए थे। बच्ची घर में खेल रही थी। शिव कुमार उसे घर से ही अगवा कर झाडि़यों में ले गया था। वहां दरिंदगी के बाद बच्ची की पायजामी से ही गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी। बच्ची के न मिलने पर 25 अक्तूबर पिता ने गुमशुदगी दर्ज कराई। शिव कुमार भी बच्ची के परिजनों के साथ उसे तलाश करने का नाटक करता रहा।
पुलिस तलाश करते करते जैसे ही उन झाडि़यों तक पहुंचीं जिनमें बच्ची का शव मिला था, वैसे ही शिव कुमार भाग निकला। इससे पुलिस को उस पर शक हो गया। उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस ने उसे 27 अक्तूबर को पश्चिम बंगाल के हावड़ा से गिरफ्तार किया था।