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Panipat News: 10 करोड़ के श्रमिक कार्ड घोटाले में दो कंप्यूटर ऑपरेटर गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 26 Jun 2026 02:55 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। हरियाणा भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (श्रम विभाग) में हुए करीब 10 करोड़ रुपये के बहुचर्चित फर्जी श्रमिक कार्ड घोटाले में स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच टीम ने विभाग के दो कंप्यूटर ऑपरेटरों सागर पुनिया और कमल सैनी को गिरफ्तार किया है। क्राइम ब्रांच की लगातार कार्रवाई के बाद श्रम विभाग के दूसरे कर्मचारियों और उच्च अधिकारियों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
स्टेट क्राइम ब्रांच के अधिकारी ने बताया कि जांच टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए कंप्यूटर ऑपरेटर सागर पुनिया को बुधवार को समालखा के पास डिडवाड़ी गांव से गिरफ्तार किया था। आरोपी सागर को वीरवार को अदालत में पेश किया गया। उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
इससे पहले क्राइम ब्रांच ने एक अन्य कंप्यूटर ऑपरेटर कमल सैनी निवासी घड़ौली, शहजादपुर, अंबाला को 22 जून को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी कमल सैनी को अदालत से एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया था। उससे घोटाले से जुड़े कई अहम सुराग हाथ लगे हैं।
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रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद कमल को भी कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दोनों कंप्यूटर ऑपरेटरों से पहले स्टेट क्राइम ब्रांच इस घोटाले के मुख्य आरोपियों में शामिल सहायक कल्याण अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंघल को भी गिरफ्तार कर चुकी है।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पी करोड़ों की राशि
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने मिलीभगत कर बिना किसी भौतिक सत्यापन के हजारों फर्जी श्रमिक कार्ड (लेबर कूपन) तैयार किए और सरकार द्वारा पंजीकृत मजदूरों को मिलने वाली कल्याणकारी योजनाओं की करोड़ों रुपये की राशि का गबन कर लिया।
कंप्यूटर ऑपरेटरों पर फर्जी डेटा को विभाग के पोर्टल पर अपलोड और अप्रूव करने का आरोप है। एडवोकेट सुभाष चंद्र ने मामले में शिकायत दी थी। उनका आरोप है कि अधिकारियों ने कोरोना काल में करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा किया है।
श्रम विभाग के अधिकारियों ने जांच की तो प्रथम दृष्टया में करीब 10 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था। एडवोकेट सुभाष चंद्र ने इसके लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट के आदेश पर थाना शहर पुलिस में हरेंद्र मान और नरेंद्र कुमार सिंघल को नामजद कर प्राथमिकी दर्ज की थी। मुख्य आरोपियों में हरेंद्र मान की गिरफ्तारी बाकी है।
वर्जन :
10 करोड़ रुपये के इस श्रमिक कार्ड घोटाले की जांच गहराई से की जा रही है। मामले में संलिप्त दो कंप्यूटर ऑपरेटरों सागर पुनिया और कमल सैनी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। इस घोटाले के हर पहलू को खंगाला जा रहा है। सरकारी धन का गबन करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य बड़े चेहरों की गिरफ्तारी की जाएगी। -नायब सिंह, डीएसपी, स्टेट क्राइम ब्रांच, मधुबन।
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पानीपत। हरियाणा भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (श्रम विभाग) में हुए करीब 10 करोड़ रुपये के बहुचर्चित फर्जी श्रमिक कार्ड घोटाले में स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच टीम ने विभाग के दो कंप्यूटर ऑपरेटरों सागर पुनिया और कमल सैनी को गिरफ्तार किया है। क्राइम ब्रांच की लगातार कार्रवाई के बाद श्रम विभाग के दूसरे कर्मचारियों और उच्च अधिकारियों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
स्टेट क्राइम ब्रांच के अधिकारी ने बताया कि जांच टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए कंप्यूटर ऑपरेटर सागर पुनिया को बुधवार को समालखा के पास डिडवाड़ी गांव से गिरफ्तार किया था। आरोपी सागर को वीरवार को अदालत में पेश किया गया। उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
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इससे पहले क्राइम ब्रांच ने एक अन्य कंप्यूटर ऑपरेटर कमल सैनी निवासी घड़ौली, शहजादपुर, अंबाला को 22 जून को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी कमल सैनी को अदालत से एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया था। उससे घोटाले से जुड़े कई अहम सुराग हाथ लगे हैं।
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रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद कमल को भी कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दोनों कंप्यूटर ऑपरेटरों से पहले स्टेट क्राइम ब्रांच इस घोटाले के मुख्य आरोपियों में शामिल सहायक कल्याण अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंघल को भी गिरफ्तार कर चुकी है।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पी करोड़ों की राशि
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने मिलीभगत कर बिना किसी भौतिक सत्यापन के हजारों फर्जी श्रमिक कार्ड (लेबर कूपन) तैयार किए और सरकार द्वारा पंजीकृत मजदूरों को मिलने वाली कल्याणकारी योजनाओं की करोड़ों रुपये की राशि का गबन कर लिया।
कंप्यूटर ऑपरेटरों पर फर्जी डेटा को विभाग के पोर्टल पर अपलोड और अप्रूव करने का आरोप है। एडवोकेट सुभाष चंद्र ने मामले में शिकायत दी थी। उनका आरोप है कि अधिकारियों ने कोरोना काल में करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा किया है।
श्रम विभाग के अधिकारियों ने जांच की तो प्रथम दृष्टया में करीब 10 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था। एडवोकेट सुभाष चंद्र ने इसके लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट के आदेश पर थाना शहर पुलिस में हरेंद्र मान और नरेंद्र कुमार सिंघल को नामजद कर प्राथमिकी दर्ज की थी। मुख्य आरोपियों में हरेंद्र मान की गिरफ्तारी बाकी है।
वर्जन :
10 करोड़ रुपये के इस श्रमिक कार्ड घोटाले की जांच गहराई से की जा रही है। मामले में संलिप्त दो कंप्यूटर ऑपरेटरों सागर पुनिया और कमल सैनी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। इस घोटाले के हर पहलू को खंगाला जा रहा है। सरकारी धन का गबन करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य बड़े चेहरों की गिरफ्तारी की जाएगी। -नायब सिंह, डीएसपी, स्टेट क्राइम ब्रांच, मधुबन।