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Rewari News: खाद्य पदार्थों के 20 से 25 प्रतिशत सैंपल होते हैं फेल
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 06 Jun 2026 10:56 PM IST
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रेवाड़ी। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से खाद्य पदार्थों का सैंपल लिए जाने के बाद भी मिलावट खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। जांच में लिए गए सैंपल में 20 से 25 फीसदी फेल पाए जाते हैं।
विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ लोगों को जागरूक किया जाता है। सुरक्षित खाद्य पदार्थ के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर जांच अभियान चलाता है लेकिन इसके बावजूद मिलावटखोरी पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।
मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। इससे पेट संबंधी बीमारियां, एलर्जी, लीवर और किडनी की समस्याएं सहित कई गंभीर रोगों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर इसका प्रभाव और अधिक पड़ता है। रेवाड़ी में कुल नमूनों में 20 से 25 प्रतिशत सैंपल फेल पाए जाते हैं।
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खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा हाल के महीनों में चलाए गए जांच अभियानों में भी चिंताजनक स्थिति सामने आई है। भिवाड़ी में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविंद गेट के अनुसार पिछले चार महीनों के दौरान जिले के विभिन्न प्रतिष्ठानों से लिए गए खाद्य पदार्थों के नमूनों में से करीब 22 फर्मों के सैंपल खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।
जांच के दौरान पनीर, दूध, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूनों में गुणवत्ता संबंधी कमियां सामने आई हैं। इन मामलों में एडीएम कोर्ट द्वारा संबंधित फर्मों पर अब तक करीब 46 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। हालांकि, केवल आर्थिक दंड से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए नियमित निरीक्षण, सख्त कानूनी कार्रवाई और जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
वर्जन
शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की जाती है। दुकानों से खाद्य पदार्थ के सैंपल लिए जाते हैं। सैंपल फेल पाए जाने पर जुर्माना लगाया जाता है। -डॉ. संदीप कुमार, खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी रेवाड़ी।
विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ लोगों को जागरूक किया जाता है। सुरक्षित खाद्य पदार्थ के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर जांच अभियान चलाता है लेकिन इसके बावजूद मिलावटखोरी पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। इससे पेट संबंधी बीमारियां, एलर्जी, लीवर और किडनी की समस्याएं सहित कई गंभीर रोगों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर इसका प्रभाव और अधिक पड़ता है। रेवाड़ी में कुल नमूनों में 20 से 25 प्रतिशत सैंपल फेल पाए जाते हैं।
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जांच के दौरान पनीर, दूध, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूनों में गुणवत्ता संबंधी कमियां सामने आई हैं। इन मामलों में एडीएम कोर्ट द्वारा संबंधित फर्मों पर अब तक करीब 46 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। हालांकि, केवल आर्थिक दंड से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए नियमित निरीक्षण, सख्त कानूनी कार्रवाई और जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
वर्जन
शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की जाती है। दुकानों से खाद्य पदार्थ के सैंपल लिए जाते हैं। सैंपल फेल पाए जाने पर जुर्माना लगाया जाता है। -डॉ. संदीप कुमार, खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी रेवाड़ी।