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Rewari News: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने साहबी बैराज मामले में दिए कार्रवाई के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 06 Jun 2026 10:46 PM IST
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गांव जड़थल के पास डाला जा रहा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों का प्रदूषित पानी। स्रोत : स्थानीय नागरिक
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धारूहेड़ा। साहबी बैराज में प्रदूषित पानी छोड़ने की शिकायत को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने संज्ञान में लेते हुए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
गांव खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, हरियाणा के पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह, केंद्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण विभाग को शिकायत भेजी थी। इसी आधार पर आयोग ने कार्रवाई के लिए पत्र जारी किया है।
क्षेत्र के कई सरकारी विभागों के सीवरेज शोधन संयंत्र निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं। शोधन के बाद वर्तमान में लगातार गंदा पानी सहाबी बैराज में छोड़ा जा रहा है, जिससे जल स्रोत लगातार प्रदूषित हो रहे हैं।
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यह प्रकरण पहले से ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण में विचाराधीन है। इस मामले में करीब 15 प्रतिवादी पक्ष शामिल हैं और प्रकाश यादव कई वर्षों से इस मुद्दे को न्यायिक एवं प्रशासनिक स्तर पर लगातार उठा रहे हैं।
बैराज में प्रदूषित पानी पहुंचने से भूजल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह समस्या स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर संकट का रूप ले सकती है। क्षेत्र में जलजनित बीमारियों, त्वचा संबंधी समस्याओं और कृषि पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।
गांव खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, हरियाणा के पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह, केंद्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण विभाग को शिकायत भेजी थी। इसी आधार पर आयोग ने कार्रवाई के लिए पत्र जारी किया है।
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क्षेत्र के कई सरकारी विभागों के सीवरेज शोधन संयंत्र निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं। शोधन के बाद वर्तमान में लगातार गंदा पानी सहाबी बैराज में छोड़ा जा रहा है, जिससे जल स्रोत लगातार प्रदूषित हो रहे हैं।
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बैराज में प्रदूषित पानी पहुंचने से भूजल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह समस्या स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर संकट का रूप ले सकती है। क्षेत्र में जलजनित बीमारियों, त्वचा संबंधी समस्याओं और कृषि पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।