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Rewari News: बिजली चोरी मामले में डीएचबीवीएनएल की अपील मंजूर, उपभोक्ता का सिविल वाद खारिज
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रेवाड़ी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सौरभ कुमार ने बिजली चोरी के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (डीएचबीवीएनएल) की अपील स्वीकार कर ली है। अदालत ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन), बावल द्वारा पारित निर्णय को रद्द करते हुए उपभोक्ता बावल निवासी सुदेश देवी का सिविल वाद खारिज कर दिया।
मामले के अनुसार सुदेश देवी के नाम घरेलू बिजली कनेक्शन था। 25 जुलाई 2020 को निगम की टीम ने निरीक्षण के दौरान एलएल-1 रिपोर्ट तैयार कर बिजली चोरी का मामला दर्ज किया था।
इसके आधार पर निगम ने 71,873 रुपये का आकलन शुल्क और 10 हजार रुपये कंपाउंडिंग चार्ज की मांग की थी। उपभोक्ता ने इन मांगों को अवैध बताते हुए सिविल कोर्ट में वाद दायर किया था जिसे ट्रायल कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।
हालांकि, अपील पर सुनवाई करते हुए जिला न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 145 के तहत ऐसे मामलों में सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र बाधित है। अदालत ने कहा कि बिजली चोरी, आकलन और उससे संबंधित कार्रवाई पर विशेष प्राधिकरणों का अधिकार है और सिविल अदालत इस पर न तो हस्तक्षेप कर सकती है और न ही निषेधाज्ञा जारी कर सकती है।
चुनौती देने के लिए सिविल वाद स्वीकार्य नहीं
अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि बिजली अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई को चुनौती देने के लिए सिविल वाद स्वीकार्य नहीं है। ऐसे मामलों में वैकल्पिक वैधानिक उपाय या रिट याचिका ही उपयुक्त रास्ता है। इन आधारों पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए सुदेश देवी का वाद खारिज कर दिया और डीएचबीवीएनएल की अपील मंजूर कर ली।
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मामले के अनुसार सुदेश देवी के नाम घरेलू बिजली कनेक्शन था। 25 जुलाई 2020 को निगम की टीम ने निरीक्षण के दौरान एलएल-1 रिपोर्ट तैयार कर बिजली चोरी का मामला दर्ज किया था।
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इसके आधार पर निगम ने 71,873 रुपये का आकलन शुल्क और 10 हजार रुपये कंपाउंडिंग चार्ज की मांग की थी। उपभोक्ता ने इन मांगों को अवैध बताते हुए सिविल कोर्ट में वाद दायर किया था जिसे ट्रायल कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।
हालांकि, अपील पर सुनवाई करते हुए जिला न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 145 के तहत ऐसे मामलों में सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र बाधित है। अदालत ने कहा कि बिजली चोरी, आकलन और उससे संबंधित कार्रवाई पर विशेष प्राधिकरणों का अधिकार है और सिविल अदालत इस पर न तो हस्तक्षेप कर सकती है और न ही निषेधाज्ञा जारी कर सकती है।
चुनौती देने के लिए सिविल वाद स्वीकार्य नहीं
अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि बिजली अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई को चुनौती देने के लिए सिविल वाद स्वीकार्य नहीं है। ऐसे मामलों में वैकल्पिक वैधानिक उपाय या रिट याचिका ही उपयुक्त रास्ता है। इन आधारों पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए सुदेश देवी का वाद खारिज कर दिया और डीएचबीवीएनएल की अपील मंजूर कर ली।
