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Rewari News: ड्रॉपआउट से डेस्क तक, 700 बच्चों की पढ़ाई में होगी वापसी
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रेवाड़ी। शैक्षिक सत्र 2026-27 की तैयारियों के तहत शिक्षा विभाग ने जिलेभर में ड्रॉपआउट और आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान के लिए डोर-टू-डोर सर्वे अभियान चलाया। इस सर्वे के दौरान 700 ऐसे बच्चों को चिह्नित किया गया है जो विभिन्न कारणों से स्कूल की पढ़ाई छोड़ चुके हैं या कभी नामांकन के बाद नियमित रूप से विद्यालय नहीं जा सके।
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार बीते चार वर्षों में जिले में ड्रॉपआउट और स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। इसके पीछे आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियां, कामकाज के लिए पलायन और शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी जैसे कारण सामने आए हैं।
शिक्षा विभाग ने इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए घर-घर जाकर बच्चों की शैक्षणिक स्थिति का आकलन किया। अधिकारियों के मुताबिक सर्वे के दौरान कई ऐसे बच्चे भी सामने आए हैं जो दोबारा पढ़ाई शुरू करना चाहते हैं लेकिन संसाधनों के अभाव में स्कूल नहीं जा पा रहे थे।
ऐसे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभाग की ओर से ठोस कार्ययोजना बनाई जा रही है। चिह्नित बच्चों को सरकार की विभिन्न छात्र हितैषी योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
इनमें निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, यूनिफॉर्म, छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं शामिल हैं ताकि आर्थिक कारण किसी भी बच्चे की शिक्षा में बाधा न बने।
विभाग का दावा है कि इन प्रयासों से जिले में ड्रॉपआउट दर को कम करने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि यह सर्वे शीतकालीन अवकाश के दौरान किया गया था ताकि घरों में बच्चों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके और वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
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सर्वे रिपोर्ट के अनुसार बीते चार वर्षों में जिले में ड्रॉपआउट और स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। इसके पीछे आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियां, कामकाज के लिए पलायन और शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी जैसे कारण सामने आए हैं।
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शिक्षा विभाग ने इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए घर-घर जाकर बच्चों की शैक्षणिक स्थिति का आकलन किया। अधिकारियों के मुताबिक सर्वे के दौरान कई ऐसे बच्चे भी सामने आए हैं जो दोबारा पढ़ाई शुरू करना चाहते हैं लेकिन संसाधनों के अभाव में स्कूल नहीं जा पा रहे थे।
ऐसे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभाग की ओर से ठोस कार्ययोजना बनाई जा रही है। चिह्नित बच्चों को सरकार की विभिन्न छात्र हितैषी योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
इनमें निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, यूनिफॉर्म, छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं शामिल हैं ताकि आर्थिक कारण किसी भी बच्चे की शिक्षा में बाधा न बने।
विभाग का दावा है कि इन प्रयासों से जिले में ड्रॉपआउट दर को कम करने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि यह सर्वे शीतकालीन अवकाश के दौरान किया गया था ताकि घरों में बच्चों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके और वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
