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किसी दुर्घटना को देखकर पीछे न हटें, त्वरित सहायता को बढ़ाएं हाथ : डीसी
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रेवाड़ी। सड़क दुर्घटना के समय घायल को गोल्डन ऑवर के भीतर चिकित्सा सहायता दिलाने में मदद करने वाले व्यक्ति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ‘राह-वीर योजना’ शुरू की है। योजना के तहत जो व्यक्ति दुर्घटना पीड़ित की मदद करता है उसे 25,000 रुपये का पुरस्कार व प्रशंसा पत्र प्रदान किया जाता है।
एक वर्ष में अधिकतम पांच बार तक यह सम्मान मिल सकता है। डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि राह-वीर केवल एक योजना नहीं, बल्कि मानवता, साहस और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। किसी दुर्घटना को देखकर पीछे न हटें। आपकी तत्परता की गई सहायता से किसी के जीवन को बचाया जा सकता है।
डीसी ने बताया कि सड़क दुर्घटना के समय ‘गोल्डन ऑवर’ में दी गई त्वरित सहायता किसी की जान बचा सकती है और ऐसे में आगे आने वाले राह-वीरों को किसी भी प्रकार के डर या कानूनी झंझट की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने बताया कि मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 134ए के तहत अधिसूचित गुड समैरिटन नियमों के अनुसार दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को न तो हिरासत में लिया जा सकता है, न उससे जबरन व्यक्तिगत जानकारी मांगी जा सकती है और न ही उसे अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं में उलझाया जा सकता है।
डीसी ने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल की सहायता करने पर किसी प्रकार की कानूनी परेशानी नहीं होती है। कानून के तहत राह-वीर को गुमनाम रहने का पूरा अधिकार है, उससे व्यक्तिगत विवरण साझा करने के लिए दबाव नहीं बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कानून राह-वीरों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करती है ताकि लोग बिना डर के आगे आकर अनमोल जीवन बचा सके। राह-वीर बनने के लिए किसी चिकित्सकीय प्रशिक्षण या विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होती है। कभी-कभी केवल मदद करने की इच्छाशक्ति ही सबसे बड़ा योगदान होती है।
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एक वर्ष में अधिकतम पांच बार तक यह सम्मान मिल सकता है। डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि राह-वीर केवल एक योजना नहीं, बल्कि मानवता, साहस और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। किसी दुर्घटना को देखकर पीछे न हटें। आपकी तत्परता की गई सहायता से किसी के जीवन को बचाया जा सकता है।
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डीसी ने बताया कि सड़क दुर्घटना के समय ‘गोल्डन ऑवर’ में दी गई त्वरित सहायता किसी की जान बचा सकती है और ऐसे में आगे आने वाले राह-वीरों को किसी भी प्रकार के डर या कानूनी झंझट की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने बताया कि मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 134ए के तहत अधिसूचित गुड समैरिटन नियमों के अनुसार दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को न तो हिरासत में लिया जा सकता है, न उससे जबरन व्यक्तिगत जानकारी मांगी जा सकती है और न ही उसे अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं में उलझाया जा सकता है।
डीसी ने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल की सहायता करने पर किसी प्रकार की कानूनी परेशानी नहीं होती है। कानून के तहत राह-वीर को गुमनाम रहने का पूरा अधिकार है, उससे व्यक्तिगत विवरण साझा करने के लिए दबाव नहीं बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कानून राह-वीरों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करती है ताकि लोग बिना डर के आगे आकर अनमोल जीवन बचा सके। राह-वीर बनने के लिए किसी चिकित्सकीय प्रशिक्षण या विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होती है। कभी-कभी केवल मदद करने की इच्छाशक्ति ही सबसे बड़ा योगदान होती है।
