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Rewari News: रेवाड़ी-जयपुर रेल लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे को मिली मंजूरी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 23 Mar 2026 11:55 PM IST
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अनाज मंडी रेलवे स्टेशन की तरफ से गुजरती ट्रेन। संवाद
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रेवाड़ी। रेवाड़ी से जयपुर वाया नीमराणा तक प्रस्तावित नई रेल लाइन परियोजना को रेल मंत्रालय से मंजूरी दे दी है। 191 किलोमीटर लंबी इस नई रेल लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे कराने को हरी झंडी दी गई है। उत्तर पश्चिम रेलवे की ओर से जारी पत्र के अनुसार इस सर्वे पर 5.73 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सर्वे पूरा होने के बाद डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी।
यह परियोजना हरियाणा और राजस्थान के औद्योगिक विकास के लिए काफी अहम है। वर्तमान में रेवाड़ी, बावल, मानेसर और गुरुग्राम जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र रेल नेटवर्क से जुड़े हैं लेकिन राजस्थान के नीमराणा, बहरोड़, शाहजहांपुर, सोतानाला, केशवाना और घीलौठ जैसे औद्योगिक क्षेत्र रेल कनेक्टिविटी से वंचित हैं। यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग-48 के किनारे विकसित हो चुके हैं लेकिन अभी तक इनकी रेल सुविधा नहीं है।
नई रेल लाइन बनने से इन क्षेत्रों की सीधी कनेक्टिविटी दिल्ली-मुंबई रेल नेटवर्क से हो जाएगी। इसका सबसे बड़ा लाभ नीमराणा औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा, जहां राजस्थान का एकमात्र जापानी इंडस्ट्रियल जोन स्थापित है। यहां 400 से अधिक जापानी और भारतीय कंपनियां संचालित हैं। इसके अलावा घीलौठ औद्योगिक क्षेत्र में देश का पहला इलेक्ट्रिक बस निर्माण कारखाना बन रहा है।
बहरोड़ और कोटपूतली क्षेत्र में सीमेंट उद्योग से जुड़ी 100 से अधिक बड़ी कंपनियां काम कर रही हैं। नई रेल लाइन मिलने से माल ढुलाई सस्ती और तेज होगी जिससे उद्योगों की लागत कम होगी और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
इस रेल लाइन के निर्माण के बाद यह पूरा क्षेत्र दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का मजबूत औद्योगिक रेल कॉरिडोर बन सकता है। इससे निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
कुल मिलाकर यह परियोजना हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर के औद्योगिक बेल्ट की तस्वीर बदलने वाली मानी जा रही है। रेल लाइन बनने से न केवल औद्योगिक क्षेत्र जुड़ेंगे बल्कि स्थानीय व्यापार और छोटे उद्योगों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे।
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वर्जन
रेवाड़ी से जयपुर वाया नीमराना की फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी मिल गई है। 191 किमी इस नई रेल लाइन की डीपीआर सर्वे के बाद बनेगी। सर्वे के लिए बजट जारी हो चुका है। - रवि जैन, डीआरएम, उत्तर पश्चिम रेलवे, जयपुर।
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यह परियोजना हरियाणा और राजस्थान के औद्योगिक विकास के लिए काफी अहम है। वर्तमान में रेवाड़ी, बावल, मानेसर और गुरुग्राम जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र रेल नेटवर्क से जुड़े हैं लेकिन राजस्थान के नीमराणा, बहरोड़, शाहजहांपुर, सोतानाला, केशवाना और घीलौठ जैसे औद्योगिक क्षेत्र रेल कनेक्टिविटी से वंचित हैं। यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग-48 के किनारे विकसित हो चुके हैं लेकिन अभी तक इनकी रेल सुविधा नहीं है।
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नई रेल लाइन बनने से इन क्षेत्रों की सीधी कनेक्टिविटी दिल्ली-मुंबई रेल नेटवर्क से हो जाएगी। इसका सबसे बड़ा लाभ नीमराणा औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा, जहां राजस्थान का एकमात्र जापानी इंडस्ट्रियल जोन स्थापित है। यहां 400 से अधिक जापानी और भारतीय कंपनियां संचालित हैं। इसके अलावा घीलौठ औद्योगिक क्षेत्र में देश का पहला इलेक्ट्रिक बस निर्माण कारखाना बन रहा है।
बहरोड़ और कोटपूतली क्षेत्र में सीमेंट उद्योग से जुड़ी 100 से अधिक बड़ी कंपनियां काम कर रही हैं। नई रेल लाइन मिलने से माल ढुलाई सस्ती और तेज होगी जिससे उद्योगों की लागत कम होगी और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
इस रेल लाइन के निर्माण के बाद यह पूरा क्षेत्र दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का मजबूत औद्योगिक रेल कॉरिडोर बन सकता है। इससे निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
कुल मिलाकर यह परियोजना हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर के औद्योगिक बेल्ट की तस्वीर बदलने वाली मानी जा रही है। रेल लाइन बनने से न केवल औद्योगिक क्षेत्र जुड़ेंगे बल्कि स्थानीय व्यापार और छोटे उद्योगों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे।
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रेवाड़ी से जयपुर वाया नीमराना की फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी मिल गई है। 191 किमी इस नई रेल लाइन की डीपीआर सर्वे के बाद बनेगी। सर्वे के लिए बजट जारी हो चुका है। - रवि जैन, डीआरएम, उत्तर पश्चिम रेलवे, जयपुर।