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Rewari News: मारपीट मामले में पांच दोषी करार, एक-एक साल की सजा

संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Mon, 08 Jun 2026 11:54 PM IST
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Five convicted in assault case, sentenced to one year each
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रेवाड़ी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मिताली अग्रवाल की अदालत ने गांव धवाना में जमीन विवाद को लेकर हुई मारपीट और धमकी देने के सात साल पुराने मामले में पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए एक-एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

अदालत ने यह फैसला करीब सात वर्ष सात माह तक चली सुनवाई के बाद 6 जून को सुनाया। अदालत ने आरोपी सतबीर, सुरेश कुमार, बाबूलाल, भरपाई और सुनीता को भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (मारपीट), 506 (आपराधिक धमकी) तथा धारा 34 (साझा मंशा) के तहत दोषी ठहराया।
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प्रत्येक दोषी को एक-एक वर्ष के कठोर कारावास और कुल छह हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने की राशि वसूल होने पर पीड़ितों को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
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मामला थाना खोल क्षेत्र के गांव धवाना का है। 8 जुलाई 2018 को गांव में एक जमीन पर निर्माण कार्य को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया था। शिकायतकर्ता सुमन ने आरोप लगाया था कि विवादित जमीन पर निर्माण कराया जा रहा था, जिसका उसने विरोध किया। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी हुई और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस दोनों पक्षों को थाने भी ले गई, लेकिन मामला नहीं सुलझा।
शिकायत के अनुसार बाद में आरोपी पक्ष के लोग उसके घर पहुंचे और उसके परिवार पर हमला कर दिया। आरोप था कि सतबीर ने कुल्हाड़ी से सुमन के सिर पर वार किया, जबकि अन्य आरोपियों ने उसके पुत्र के साथ मारपीट की। घटना के दौरान जान से मारने और अपहरण की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए थे। घायल परिवार के सदस्यों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने नौ गवाहों को अदालत में पेश किया। इनमें शिकायतकर्ता सुमन, उसके परिवार के सदस्य, जांच अधिकारी और चिकित्सक शामिल थे। मेडिकल अधिकारी ने अपनी गवाही में बताया कि सुमन और राकेश के शरीर पर कई चोटें पाई गई थीं। अदालत ने माना कि घायल गवाहों के बयान विश्वसनीय हैं और मेडिकल रिपोर्ट से उनकी पुष्टि होती है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की संलिप्तता साबित करने में सफल रहा है। गवाहों के बयानों में कोई ऐसा विरोधाभास नहीं मिला जिससे मामले पर संदेह पैदा हो। सभी आरोपी साझा मंशा के तहत एक साथ घटनास्थल पर पहुंचे और शिकायतकर्ता पक्ष पर हमला किया।
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