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Rewari News: उद्योगों को नहीं मिल रही राहत, संचालकों को सता रही चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 31 Mar 2026 04:58 AM IST
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रेवाड़ी। खाड़ी देशों के मौजूदा हालातों का असर अब जिले के औद्योगिक क्षेत्र पर साफ दिखाई देने लगा है। जिले में संचालित 600 से अधिक उद्योग इस समय प्रभावित हो रहे हैं जिससे उत्पादन और रोजगार दोनों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कई श्रमिक तो अपने प्रदेश लौट चुके हैं। इससे संचालकों की चिंता बढ़ गई है।
औद्योगिक क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति में भारी कटौती ने उद्योग संचालकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। पहले जहां उद्योगों को करीब 80 प्रतिशत तक गैस उपलब्ध हो जाती थी वहीं अब इसे घटाकर महज 55 प्रतिशत कर दिया गया है जिससे उत्पादन क्षमता पर सीधा असर पड़ रहा है।
रेवाड़ी चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रधान कृष्ण यादव के अनुसार 80 प्रतिशत गैस आपूर्ति के दौरान भी उद्योग किसी तरह उत्पादन जारी रख पा रहे थे लेकिन 55 प्रतिशत आपूर्ति में मशीनों को पूरी क्षमता से चलाना संभव नहीं रह गया है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है और कई कंपनियों में काम धीमा हो गया है।
उनका कहना है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो उद्योगों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ेगा। जिले की करीब 400 कंपनियों में उत्पादन प्रभावित हो चुका है। उत्पादन में गिरावट का असर कारोबार पर भी पड़ रहा है जिससे उद्योग संचालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
कई इकाइयों में लागत बढ़ने और उत्पादन घटने के कारण मुनाफा लगभग समाप्त हो गया है। ऐसे में उद्योगों के सामने कर्मचारियों की छंटनी करने जैसी कठोर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
गैस आपूर्ति में कटौती बड़ा संकट
दक्षिण हरियाणा लघु उद्योग भारती के संयोजक संजय डाटा ने भी मौजूदा हालात को बेहद चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि जिले में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) के करीब 200 उद्योग संचालित हैं जो इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इन उद्योगों के पास सीमित संसाधन होते हैं ऐसे में गैस आपूर्ति में कटौती उनके लिए बड़ा संकट बन गई है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो कई छोटे उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।
प्रवासी श्रमिक भी प्रभावित
गैस की कमी का असर केवल औद्योगिक उत्पादन तक ही सीमित नहीं है बल्कि प्रवासी श्रमिक भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। उन्हें घरेलू उपयोग के लिए भी पर्याप्त गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है। कई श्रमिकों के पास 5-5 किलो के सिलिंडर हैं उन्हें गैस नहीं मिल पा रही है। उद्योग संगठनों ने सरकार से मांग की है कि पीएनजी की आपूर्ति जल्द से जल्द बढ़ाई जाए ताकि उद्योगों को राहत मिल सके। यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया तो इसका असर न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा बल्कि हजारों श्रमिकों के रोजगार पर भी पड़ सकता है।
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औद्योगिक क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति में भारी कटौती ने उद्योग संचालकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। पहले जहां उद्योगों को करीब 80 प्रतिशत तक गैस उपलब्ध हो जाती थी वहीं अब इसे घटाकर महज 55 प्रतिशत कर दिया गया है जिससे उत्पादन क्षमता पर सीधा असर पड़ रहा है।
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रेवाड़ी चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रधान कृष्ण यादव के अनुसार 80 प्रतिशत गैस आपूर्ति के दौरान भी उद्योग किसी तरह उत्पादन जारी रख पा रहे थे लेकिन 55 प्रतिशत आपूर्ति में मशीनों को पूरी क्षमता से चलाना संभव नहीं रह गया है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है और कई कंपनियों में काम धीमा हो गया है।
उनका कहना है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो उद्योगों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ेगा। जिले की करीब 400 कंपनियों में उत्पादन प्रभावित हो चुका है। उत्पादन में गिरावट का असर कारोबार पर भी पड़ रहा है जिससे उद्योग संचालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
कई इकाइयों में लागत बढ़ने और उत्पादन घटने के कारण मुनाफा लगभग समाप्त हो गया है। ऐसे में उद्योगों के सामने कर्मचारियों की छंटनी करने जैसी कठोर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
गैस आपूर्ति में कटौती बड़ा संकट
दक्षिण हरियाणा लघु उद्योग भारती के संयोजक संजय डाटा ने भी मौजूदा हालात को बेहद चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि जिले में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) के करीब 200 उद्योग संचालित हैं जो इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इन उद्योगों के पास सीमित संसाधन होते हैं ऐसे में गैस आपूर्ति में कटौती उनके लिए बड़ा संकट बन गई है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो कई छोटे उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।
प्रवासी श्रमिक भी प्रभावित
गैस की कमी का असर केवल औद्योगिक उत्पादन तक ही सीमित नहीं है बल्कि प्रवासी श्रमिक भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। उन्हें घरेलू उपयोग के लिए भी पर्याप्त गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है। कई श्रमिकों के पास 5-5 किलो के सिलिंडर हैं उन्हें गैस नहीं मिल पा रही है। उद्योग संगठनों ने सरकार से मांग की है कि पीएनजी की आपूर्ति जल्द से जल्द बढ़ाई जाए ताकि उद्योगों को राहत मिल सके। यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया तो इसका असर न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा बल्कि हजारों श्रमिकों के रोजगार पर भी पड़ सकता है।