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Rewari News: अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में बिकेंगे रेवाड़ी के मिलेट्स के लड्डू
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 01 Feb 2026 01:08 AM IST
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मिलेट्स के बने लड्डू। संवाद
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रेवाड़ी। कहते हैं कि हौसले बुलंद हों तो विपरीत हालात भी आपके अनुकूल हो जाते हैं। चिमनावास गांव की रहने वाली 37 वर्षीय अनीता देवी ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। कभी घर की चहारदीवारी तक सीमित रहने वाली अनीता आज अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले में खुद बनाए देसी और पौष्टिक उत्पादों के साथ पहचान बना रही हैं।
फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में मिलेट्स और मोरिंगा से बने उत्पादों का स्टाल लगाकर न केवल रोजगार सृजन कर रही हैं बल्कि महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की मिसाल भी पेश कर रही हैं। अनीता देवी पांच वर्षों से मिलेट्स आधारित उत्पादों के क्षेत्र में काम कर रही हैं। सूरजकुंड मेले में यह उनका तीसरा अवसर है। मेले के लिए वह पहले ही लगभग 30 किलो लड्डू तैयार कर चुकी हैं।
इसके अलावा स्टाल पर मिलेट्स के लड्डू, तिल के लड्डू, मोरिंगा लड्डू, मोरिंगा नमकीन और बिस्किट की बिक्री होगी। अनीता बताती हैं कि मेले में वह ताजा सामान भी वहीं पर तैयार करेंगी क्योंकि लोग न केवल खाद्य पदार्थ खरीदना पसंद करते हैं बल्कि यह भी देखना चाहते हैं कि चीजें कैसे बनाई जाती हैं।
मेले में विदेशों से भी लोग आते हैं। काम बढ़ने के साथ-साथ अनीता ने अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा है। अनीता ने बताया कि जब कार्यभार ज्यादा होता है तो वह 6 से 7 महिलाओं का सहयोगी लेती हैं जबकि दो महिलाएं नियमित उनके साथ काम करती हैं। इससे अन्य महिलाओं को भी आय का साधन मिल रहा है। मेले के लिए 7 लोगों की टीम है। मेला 1 से 15 फरवरी तक चलेगा।
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28 से 30 हजार रुपये तक पिछले वर्ष हुई थी बिक्री
सूरजकुंड मेले को लेकर अनीता उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष के मेले में रोजाना 28 से 30 हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती थी। इससे इस बार भी बेहतर बिक्री की उम्मीद है। सामान्य दिनों में भी उनकी मासिक आमदनी करीब 30 हजार रुपये तक पहुंच जाती है जो किसी ग्रामीण महिला उद्यमी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है। अनीता के दो बेटे हैं, जो पढ़ाई कर रहे हैं जबकि पति एक निजी अस्पताल में कार्यरत हैं।
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अनीता का सफर नहीं था आसान
अनीता का सफर आसान नहीं रहा। वह बताती हैं कि पहले घर के लोग उन्हें बाहर जाकर काम करने की अनुमति नहीं देते थे। क्योंकि गांव में महिलाओं का बाहर निकलकर काम करना सहज नहीं माना जाता था लेकिन करीब पांच साल पहले उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली संस्था लॉर्ड कृष्णा फाउंडेशन से जुड़कर प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण ने सोच और जीवन दोनों को बदल दिया। संस्था के प्रधान रतिराम के माध्यम से उन्होंने 50 हजार रुपये का लोन लेकर छोटा काम शुरू किया। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और आज काम अच्छा चल रहा है। लियो चौक के पास दुकान है जहां आसपास के इलाकों से ऑर्डर आते रहते हैं। दुकान पर रोजाना कम से कम 8 से 10 किलो लड्डू के ऑर्डर मिल जाते हैं। पति भी उनके काम में सहयोग करते हैं।
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उत्पादों की ये है खासियत
उत्पादों की विशेषता बताते हुए अनीता ने कहा कि मोरिंगा एक औषधीय पेड़ है जो घुटनों और पीठ के दर्द में काफी लाभकारी होता है। इसकी पत्तियां, फल, बीज और यहां तक कि फूल भी उपयोग में लाए जाते हैं। आयुर्वेद में मोरिंगा को बेहद लाभकारी माना गया है। वहीं मिलेट्स से बने लड्डू बीपी, शुगर और मोटापे को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
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फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में मिलेट्स और मोरिंगा से बने उत्पादों का स्टाल लगाकर न केवल रोजगार सृजन कर रही हैं बल्कि महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की मिसाल भी पेश कर रही हैं। अनीता देवी पांच वर्षों से मिलेट्स आधारित उत्पादों के क्षेत्र में काम कर रही हैं। सूरजकुंड मेले में यह उनका तीसरा अवसर है। मेले के लिए वह पहले ही लगभग 30 किलो लड्डू तैयार कर चुकी हैं।
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इसके अलावा स्टाल पर मिलेट्स के लड्डू, तिल के लड्डू, मोरिंगा लड्डू, मोरिंगा नमकीन और बिस्किट की बिक्री होगी। अनीता बताती हैं कि मेले में वह ताजा सामान भी वहीं पर तैयार करेंगी क्योंकि लोग न केवल खाद्य पदार्थ खरीदना पसंद करते हैं बल्कि यह भी देखना चाहते हैं कि चीजें कैसे बनाई जाती हैं।
मेले में विदेशों से भी लोग आते हैं। काम बढ़ने के साथ-साथ अनीता ने अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा है। अनीता ने बताया कि जब कार्यभार ज्यादा होता है तो वह 6 से 7 महिलाओं का सहयोगी लेती हैं जबकि दो महिलाएं नियमित उनके साथ काम करती हैं। इससे अन्य महिलाओं को भी आय का साधन मिल रहा है। मेले के लिए 7 लोगों की टीम है। मेला 1 से 15 फरवरी तक चलेगा।
28 से 30 हजार रुपये तक पिछले वर्ष हुई थी बिक्री
सूरजकुंड मेले को लेकर अनीता उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष के मेले में रोजाना 28 से 30 हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती थी। इससे इस बार भी बेहतर बिक्री की उम्मीद है। सामान्य दिनों में भी उनकी मासिक आमदनी करीब 30 हजार रुपये तक पहुंच जाती है जो किसी ग्रामीण महिला उद्यमी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है। अनीता के दो बेटे हैं, जो पढ़ाई कर रहे हैं जबकि पति एक निजी अस्पताल में कार्यरत हैं।
अनीता का सफर नहीं था आसान
अनीता का सफर आसान नहीं रहा। वह बताती हैं कि पहले घर के लोग उन्हें बाहर जाकर काम करने की अनुमति नहीं देते थे। क्योंकि गांव में महिलाओं का बाहर निकलकर काम करना सहज नहीं माना जाता था लेकिन करीब पांच साल पहले उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली संस्था लॉर्ड कृष्णा फाउंडेशन से जुड़कर प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण ने सोच और जीवन दोनों को बदल दिया। संस्था के प्रधान रतिराम के माध्यम से उन्होंने 50 हजार रुपये का लोन लेकर छोटा काम शुरू किया। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और आज काम अच्छा चल रहा है। लियो चौक के पास दुकान है जहां आसपास के इलाकों से ऑर्डर आते रहते हैं। दुकान पर रोजाना कम से कम 8 से 10 किलो लड्डू के ऑर्डर मिल जाते हैं। पति भी उनके काम में सहयोग करते हैं।
उत्पादों की ये है खासियत
उत्पादों की विशेषता बताते हुए अनीता ने कहा कि मोरिंगा एक औषधीय पेड़ है जो घुटनों और पीठ के दर्द में काफी लाभकारी होता है। इसकी पत्तियां, फल, बीज और यहां तक कि फूल भी उपयोग में लाए जाते हैं। आयुर्वेद में मोरिंगा को बेहद लाभकारी माना गया है। वहीं मिलेट्स से बने लड्डू बीपी, शुगर और मोटापे को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
