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Rewari News: होटलों में सुरक्षा भगवान भरोसे, 80 फीसदी के पास नहीं फायर एनओसी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 06 Jun 2026 12:27 AM IST
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ब्रास मार्केट में खुले कोचिंग सेंटर व अन्य संस्थान। संवाद
- फोटो : रामेश्वर दास
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रेवाड़ी। जिले के 80 फीसदी होटल बगैर फायर विभाग के अनापत्ति प्रमाणपत्र के चल रहे हैं। ये होटल फायर विभाग के मानक के प्रतिकूल हैं। अधिकतर होटल 15 से 18 फीट चौड़ी इमारतों में संचालित हो रहे हैं जिनमें आपातकालीन निकास का इंतजाम नहीं है। दरवाजे और सीढि़यां भी नियमों के अनुकूल नहीं है। ऐसे में अगर दिल्ली जैसी आग की घटना हुई तो बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान से इंकार नहीं किया जा सकता है।
जिले में 100 से अधिक होटल संचालित हो रहे हैं। इनमें से कुछ नामी 15-20 होटलों के पास ही फायर एनओसी है। अधिकतर होटल बगैर फायर एनओसी के चल रहे हैं। इनमें से अधिकांश होटल 15 से 18 फीट चौड़ी इमारतों में संचालित हो रहे हैं।
दो से तीन मंजिल इन भवनों में आने-जाने के लिए केवल एक सीढ़ी ही है। किसी भी होटल में वैकल्पिक आपातकालीन निकास नहीं है। ऐसे में आग लगने या भगदड़ मचने की स्थिति में ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों के पास बचने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं होगा।
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बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन रोड और प्रमुख बाजारों के आसपास स्थित कई होटलों की स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। इन होटलों के भूतल पर ढाबे, रेस्टोरेंट और हलवाई की दुकानें संचालित हो रही हैं जहां बड़ी संख्या में एलपीजी सिलिंडरों का इस्तेमाल किया जाता है।
यदि किसी कारणवश गैस रिसाव या सिलेंडर विस्फोट हो जाए तो आग कुछ ही मिनटों में होटल तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में एकमात्र सीढ़ी से लोगों का सुरक्षित बाहर निकलना लगभग असंभव होगा।
इन भवनों का मूल नक्शा व्यावसायिक दुकानों के लिए स्वीकृत था लेकिन अब उनमें होटल चल रहे हैं। भवनों की चौड़ाई सीमित होने के कारण फायर सेफ्टी के लिए जरूरी मानकों का पालन कर पाना भी चुनौती है।
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अधिकांश छोटे होटलों में सुविधाएं नदारद
दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भवन का नक्शा ही स्वीकृत नहीं है या होटल अवैध रूप से संचालित हो रहा है तो उस पर पहली कार्रवाई संबंधित विभाग की बनती है। फायर एनओसी के लिए आवेदन आने पर ही मौके का निरीक्षण किया जाता है। किसी हादसे की स्थिति में पूरी जिम्मेदारी होटल संचालक की होगी। होटलों में केवल अग्निशामक यंत्र लगाना ही पर्याप्त नहीं है। सुरक्षित निकास मार्ग, फायर अलार्म सिस्टम, आपातकालीन लाइटिंग, स्मोक डिटेक्टर और नियमित सुरक्षा ऑडिट भी उतने ही जरूरी हैं लेकिन अधिकांश छोटे होटलों में ये सुविधाएं नदारद हैं।
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कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा इंतजाम नदारद
होटलों की तरह जिले के कोचिंग संस्थानों की स्थिति चिंताजनक है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 120 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। अब शहर के मुख्य एरिया के अलावा कॉलोनियों में भी कोचिंग इंस्टीट्यूट बड़ी संख्या में खुल गए हैं। नामी कोचिंग सेंटरों को छोड़कर किसी गिने चुने के पास ही फायर एनओसी है। पड़ताल के दौरान कई ऐसे संस्थान मिले जहां दूसरी और तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए मात्र ढाई फीट चौड़ी सीढ़ियां हैं। कई संस्थानों में एक भी अग्निशामक यंत्र नहीं मिला। रोजाना सैकड़ों छात्र इन भवनों में पढ़ाई करने पहुंचते हैं लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती।
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फायर एनओसी के हैं यह नियम
फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) भवनों में अग्नि सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बाद जारी की जाती है। इसके लिए भवन में पर्याप्त चौड़ाई वाले प्रवेश एवं निकास मार्ग, आपातकालीन निकास, अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर, पानी की उपलब्धता, फायर हाइड्रेंट और आपातकालीन लाइटिंग जैसी सुविधाएं होनी आवश्यक हैं। बहुमंजिला इमारतों में फायर लिफ्ट और स्प्रिंकलर सिस्टम अनिवार्य हैं। भवन का नक्शा स्वीकृत होना चाहिए और अग्निशमन विभाग की ओर से निरीक्षण के बाद ही एनओसी जारी की जाती है। नियमों का पालन नही होने पर कार्रवाई की जा सकती है।
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वर्जन
एनओसी की जांच के लिए सर्वे किया जाएगा। इसके लिए टीम गठित की गई है। सर्वे के बाद जो रिपोर्ट आएगी उसी हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। -नितेश भारद्वाज, अग्निशमन अधिकारी रेवाड़ी।
जिले में 100 से अधिक होटल संचालित हो रहे हैं। इनमें से कुछ नामी 15-20 होटलों के पास ही फायर एनओसी है। अधिकतर होटल बगैर फायर एनओसी के चल रहे हैं। इनमें से अधिकांश होटल 15 से 18 फीट चौड़ी इमारतों में संचालित हो रहे हैं।
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दो से तीन मंजिल इन भवनों में आने-जाने के लिए केवल एक सीढ़ी ही है। किसी भी होटल में वैकल्पिक आपातकालीन निकास नहीं है। ऐसे में आग लगने या भगदड़ मचने की स्थिति में ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों के पास बचने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं होगा।
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यदि किसी कारणवश गैस रिसाव या सिलेंडर विस्फोट हो जाए तो आग कुछ ही मिनटों में होटल तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में एकमात्र सीढ़ी से लोगों का सुरक्षित बाहर निकलना लगभग असंभव होगा।
इन भवनों का मूल नक्शा व्यावसायिक दुकानों के लिए स्वीकृत था लेकिन अब उनमें होटल चल रहे हैं। भवनों की चौड़ाई सीमित होने के कारण फायर सेफ्टी के लिए जरूरी मानकों का पालन कर पाना भी चुनौती है।
अधिकांश छोटे होटलों में सुविधाएं नदारद
दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भवन का नक्शा ही स्वीकृत नहीं है या होटल अवैध रूप से संचालित हो रहा है तो उस पर पहली कार्रवाई संबंधित विभाग की बनती है। फायर एनओसी के लिए आवेदन आने पर ही मौके का निरीक्षण किया जाता है। किसी हादसे की स्थिति में पूरी जिम्मेदारी होटल संचालक की होगी। होटलों में केवल अग्निशामक यंत्र लगाना ही पर्याप्त नहीं है। सुरक्षित निकास मार्ग, फायर अलार्म सिस्टम, आपातकालीन लाइटिंग, स्मोक डिटेक्टर और नियमित सुरक्षा ऑडिट भी उतने ही जरूरी हैं लेकिन अधिकांश छोटे होटलों में ये सुविधाएं नदारद हैं।
कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा इंतजाम नदारद
होटलों की तरह जिले के कोचिंग संस्थानों की स्थिति चिंताजनक है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 120 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। अब शहर के मुख्य एरिया के अलावा कॉलोनियों में भी कोचिंग इंस्टीट्यूट बड़ी संख्या में खुल गए हैं। नामी कोचिंग सेंटरों को छोड़कर किसी गिने चुने के पास ही फायर एनओसी है। पड़ताल के दौरान कई ऐसे संस्थान मिले जहां दूसरी और तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए मात्र ढाई फीट चौड़ी सीढ़ियां हैं। कई संस्थानों में एक भी अग्निशामक यंत्र नहीं मिला। रोजाना सैकड़ों छात्र इन भवनों में पढ़ाई करने पहुंचते हैं लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती।
फायर एनओसी के हैं यह नियम
फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) भवनों में अग्नि सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बाद जारी की जाती है। इसके लिए भवन में पर्याप्त चौड़ाई वाले प्रवेश एवं निकास मार्ग, आपातकालीन निकास, अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर, पानी की उपलब्धता, फायर हाइड्रेंट और आपातकालीन लाइटिंग जैसी सुविधाएं होनी आवश्यक हैं। बहुमंजिला इमारतों में फायर लिफ्ट और स्प्रिंकलर सिस्टम अनिवार्य हैं। भवन का नक्शा स्वीकृत होना चाहिए और अग्निशमन विभाग की ओर से निरीक्षण के बाद ही एनओसी जारी की जाती है। नियमों का पालन नही होने पर कार्रवाई की जा सकती है।
वर्जन
एनओसी की जांच के लिए सर्वे किया जाएगा। इसके लिए टीम गठित की गई है। सर्वे के बाद जो रिपोर्ट आएगी उसी हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। -नितेश भारद्वाज, अग्निशमन अधिकारी रेवाड़ी।