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मानसिक दबाव व चुनौतियों से निपटना सिखाती है गीता : स्वामी ज्ञानानंद
Wed, 12 Aug 2026 11:40 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 12 Aug 2026 11:40 PM IST
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फोटो संख्या:51- स्वामी ज्ञानानंद का स्वागत करते कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार एवं अन्य--स्रोत- हक
- फोटो : गांव रावतखेड़ा में पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई और नलवा के विधायक रणधीर पनिहार का स्वागत करते ग्रामीण। स्रोत : आयोजक
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में बुधवार को गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज का श्रीमद्भगवद्गीता विषय पर व्याख्यान हुआ। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों व शिक्षकों को गीता में निहित जीवन-दर्शन, युवा शक्ति की भूमिका व भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता को समझाया। उन्होंने कहा कि गीता मानसिक दबाव व चुनौतियों से निपटना सिखाती है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने स्वामी ज्ञानानंद महाराज का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा से लेकर आधुनिक विज्ञान व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक के विषयों को शिक्षा का हिस्सा बना रहा है।
स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि युवा वर्ग के लिए गीता का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह जीवन की चुनौतियों के बीच सही दिशा, संतुलन और आत्मविश्वास प्रदान करता है। महाभारत के युद्ध क्षेत्र में अर्जुन भी मानसिक द्वंद्व और विषाद की अवस्था से गुजर रहे थे। श्रीकृष्ण ने उन्हें गीता के ज्ञान के माध्यम से कर्तव्य, आत्मविश्वास और कर्म का मार्ग दिखाया।
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उन्होंने कहा कि आज का युवा भी अनेक प्रकार के मानसिक दबाव, असमंजस और चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे समय में गीता का जीवन-दर्शन उसे अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्टता और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है।
भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र निदेशक प्रो. आनंद शर्मा ने केंद्र की विभिन्न गतिविधियों, उद्देश्यों एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और समकालीन संदर्भों में उसके अध्ययन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इस दौरान जनसंपर्क अधिकारी डॉ. नीरज कर्ण सिंह व हिंदू अध्ययन पाठ्यक्रम के समन्वयक प्रो. नंदकिशोर भी मौजूद रहे।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने स्वामी ज्ञानानंद महाराज का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा से लेकर आधुनिक विज्ञान व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक के विषयों को शिक्षा का हिस्सा बना रहा है।
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स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि युवा वर्ग के लिए गीता का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह जीवन की चुनौतियों के बीच सही दिशा, संतुलन और आत्मविश्वास प्रदान करता है। महाभारत के युद्ध क्षेत्र में अर्जुन भी मानसिक द्वंद्व और विषाद की अवस्था से गुजर रहे थे। श्रीकृष्ण ने उन्हें गीता के ज्ञान के माध्यम से कर्तव्य, आत्मविश्वास और कर्म का मार्ग दिखाया।
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उन्होंने कहा कि आज का युवा भी अनेक प्रकार के मानसिक दबाव, असमंजस और चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे समय में गीता का जीवन-दर्शन उसे अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्टता और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है।
भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र निदेशक प्रो. आनंद शर्मा ने केंद्र की विभिन्न गतिविधियों, उद्देश्यों एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और समकालीन संदर्भों में उसके अध्ययन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इस दौरान जनसंपर्क अधिकारी डॉ. नीरज कर्ण सिंह व हिंदू अध्ययन पाठ्यक्रम के समन्वयक प्रो. नंदकिशोर भी मौजूद रहे।