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Rewari News: अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार
Fri, 17 Jul 2026 12:11 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 17 Jul 2026 12:11 AM IST
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भिवाड़ी पुलिस ने साइबर ठगी के मामले में तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है। संवाद
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भिवाड़ी। भिवाड़ी पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। तीनों आशियाना टाउन सोसाइटी में ठगी का अड्डा चलाते थे। आरोपी अमेरिका, कनाडा और भारत के कई राज्यों में लोगों को ठगी का शिकार बना रहे थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मोहित गुप्ता और राहुल सिंह निवासी दिल्ली और जेम्स अनिल मंडल निवासी कोलकाता है। पुलिस ने इनके कब्जे से सात लैपटॉप, चार मोबाइल फोन और एक स्कॉर्पियो बरामद की है।
भिवाड़ी के पुलिस अधीक्षक बृजेश उपाध्याय ने बताया कि आरोपियों ने आशियाना टाउन सोसाइटी के फ्लैट नंबर बी-20/1480 में दो फ्लैटों की दीवार तोड़कर साइबर ठगी का पूरा सेटअप तैयार किया था। यहां हाई स्पीड इंटरनेट, राउटर, यूपीएस सहित अन्य उपकरणों की मदद से कई लैपटॉप संचालित किए जा रहे थे।
आरोपी अपनी पहचान और लोकेशन छिपाने के लिए वीपीएन का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद अंग्रेजी में बातचीत कर खुद को अमेरिका के न्याय विभाग या अन्य सरकारी विभागों का अधिकारी बताते थे।
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पुलिस के अनुसार आरोपी लोगों को फर्जी गिरफ्तारी वारंट, सेटलमेंट नोटिस और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर पैसे ऐंठते थे। गिरोह का मुख्य निशाना वरिष्ठ नागरिक होते थे।
ठगी से प्राप्त रकम को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भारत लाया जाता था। पूछताछ में आरोपियों से करीब एक लाख डॉलर यानी लगभग 96 लाख रुपये की ठगी का अनुमान लगाया गया है। पुलिस मामले से जुड़े अन्य साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।
पुलिस अधीक्षक बृजेश उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद साइबर अपराधों पर कार्रवाई के लिए बनाई गई विशेष कार्य योजना के तहत यह कार्रवाई की गई।
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भिवाड़ी के पुलिस अधीक्षक बृजेश उपाध्याय ने बताया कि आरोपियों ने आशियाना टाउन सोसाइटी के फ्लैट नंबर बी-20/1480 में दो फ्लैटों की दीवार तोड़कर साइबर ठगी का पूरा सेटअप तैयार किया था। यहां हाई स्पीड इंटरनेट, राउटर, यूपीएस सहित अन्य उपकरणों की मदद से कई लैपटॉप संचालित किए जा रहे थे।
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आरोपी अपनी पहचान और लोकेशन छिपाने के लिए वीपीएन का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद अंग्रेजी में बातचीत कर खुद को अमेरिका के न्याय विभाग या अन्य सरकारी विभागों का अधिकारी बताते थे।
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पुलिस के अनुसार आरोपी लोगों को फर्जी गिरफ्तारी वारंट, सेटलमेंट नोटिस और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर पैसे ऐंठते थे। गिरोह का मुख्य निशाना वरिष्ठ नागरिक होते थे।
ठगी से प्राप्त रकम को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भारत लाया जाता था। पूछताछ में आरोपियों से करीब एक लाख डॉलर यानी लगभग 96 लाख रुपये की ठगी का अनुमान लगाया गया है। पुलिस मामले से जुड़े अन्य साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।
पुलिस अधीक्षक बृजेश उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद साइबर अपराधों पर कार्रवाई के लिए बनाई गई विशेष कार्य योजना के तहत यह कार्रवाई की गई।