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Rohtak News: एआई, दूरबीन और मिनी ओपन तकनीक ने आसान किया हड्डियों का ऑपरेशन
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अभिषेक कीरत
रोहतक। वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), दूरबीन और मिनी ओपन तकनीकों की मदद से हड्डियों से जुड़े जटिल ऑपरेशन आसान बन रहे हैं। इन तकनीकों के इस्तेमाल से ऑपरेशन के दौरान ज्यादा चीर-फाड़ करने की जरूरत नहीं पड़ती है। इससे मरीजों के घाव जल्द भर जाते हैं।
इस तकनीक से इंफेक्शन का खतरा भी कम रहता है। एआई से जोड़ प्रत्योरोपण भी आसान हो गया है। यह जानकारी पीजीआई के हड्डी रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आशीष देवगन ने नॉर्थ जोन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस के बाद बातचीत में दी।
उन्होंने बताया कि दूरबीन तकनीक से बिना ज्यादा चीर-फाड़ के खिलाड़ियों की चोट का ऑपरेशन आसानी से किया जा सकता है। इसमें नई लिगामेंट डाली जाती है। गद्दी की सिलाई होती है। हरियाणा और पंजाब के खिलाड़ियों को लिगामेंट की ज्यादा आवश्यकता पड़ती है।
घुटनों में गठिया की समस्या ज्यादा फैल रही है। इस कारण ज्यादा घुटने बदलने की आवश्यकता पड़ रही है। इसके लिए नई तकनीकों व पहले घुटनों का ऑपरेशन कराने के बाद भी इंफेक्शन के कारण रिवाइज करने जैसी समस्याओं पर भी चर्चा हुई।
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मिनी ओपन तकनीक से कम चीर-फाड़ की आवश्यकता
रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर क्लॉसेस व टीबी, रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन जटिल माने जाते हैं। इस ऑपरेशन में रीढ़ की हड्डी में पेच डालकर सीधा किया जाता है। पहले इसमें ज्यादा चीर-फाड़ करनी पड़ती थी लेकिन अब कम चीरा लगाकर ऑपरेशन किया जाता है। इससे घाव जल्दी से भर जाता है। इससे इंफेक्शन होने का खतरा भी कम हो जाता है। इसको मिनी ओपन टेक्निक कहा जाता है। कॉन्फ्रेंस में सर्जनों को इस टेक्निक की भी जानकारी दी गई। -डॉ. आशीष देवगन, वरिष्ठ चिकित्सक, पीजीआई
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एआई से जोड़ प्रत्यारोपण हुआ आसान
डॉ. आशीष ने बताया कि एआई से गंभीर जोड़ प्रत्यारोपण को आसानी से सरल बनाया जा सकता है। इसमें कंप्यूटर से थ्रीडी प्रिटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इससे मरीज के घुटने का सीटी स्कैन कर थ्रीडी मॉडल तैयार होता है। फिर मरीज के घुटनों के हिसाब से मॉडल को सर्जन की तरफ से स्टडी किया जाएगा। इसके बाद मरीज के मुताबिक प्रत्यारोपण के लिए घुटने तैयार किए जाते हैं। फिलहाल देश के कई स्थानों पर ही इसका इस्तेमाल हो रहा है।
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रोहतक। वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), दूरबीन और मिनी ओपन तकनीकों की मदद से हड्डियों से जुड़े जटिल ऑपरेशन आसान बन रहे हैं। इन तकनीकों के इस्तेमाल से ऑपरेशन के दौरान ज्यादा चीर-फाड़ करने की जरूरत नहीं पड़ती है। इससे मरीजों के घाव जल्द भर जाते हैं।
इस तकनीक से इंफेक्शन का खतरा भी कम रहता है। एआई से जोड़ प्रत्योरोपण भी आसान हो गया है। यह जानकारी पीजीआई के हड्डी रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आशीष देवगन ने नॉर्थ जोन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस के बाद बातचीत में दी।
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उन्होंने बताया कि दूरबीन तकनीक से बिना ज्यादा चीर-फाड़ के खिलाड़ियों की चोट का ऑपरेशन आसानी से किया जा सकता है। इसमें नई लिगामेंट डाली जाती है। गद्दी की सिलाई होती है। हरियाणा और पंजाब के खिलाड़ियों को लिगामेंट की ज्यादा आवश्यकता पड़ती है।
घुटनों में गठिया की समस्या ज्यादा फैल रही है। इस कारण ज्यादा घुटने बदलने की आवश्यकता पड़ रही है। इसके लिए नई तकनीकों व पहले घुटनों का ऑपरेशन कराने के बाद भी इंफेक्शन के कारण रिवाइज करने जैसी समस्याओं पर भी चर्चा हुई।
मिनी ओपन तकनीक से कम चीर-फाड़ की आवश्यकता
रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर क्लॉसेस व टीबी, रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन जटिल माने जाते हैं। इस ऑपरेशन में रीढ़ की हड्डी में पेच डालकर सीधा किया जाता है। पहले इसमें ज्यादा चीर-फाड़ करनी पड़ती थी लेकिन अब कम चीरा लगाकर ऑपरेशन किया जाता है। इससे घाव जल्दी से भर जाता है। इससे इंफेक्शन होने का खतरा भी कम हो जाता है। इसको मिनी ओपन टेक्निक कहा जाता है। कॉन्फ्रेंस में सर्जनों को इस टेक्निक की भी जानकारी दी गई। -डॉ. आशीष देवगन, वरिष्ठ चिकित्सक, पीजीआई
एआई से जोड़ प्रत्यारोपण हुआ आसान
डॉ. आशीष ने बताया कि एआई से गंभीर जोड़ प्रत्यारोपण को आसानी से सरल बनाया जा सकता है। इसमें कंप्यूटर से थ्रीडी प्रिटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इससे मरीज के घुटने का सीटी स्कैन कर थ्रीडी मॉडल तैयार होता है। फिर मरीज के घुटनों के हिसाब से मॉडल को सर्जन की तरफ से स्टडी किया जाएगा। इसके बाद मरीज के मुताबिक प्रत्यारोपण के लिए घुटने तैयार किए जाते हैं। फिलहाल देश के कई स्थानों पर ही इसका इस्तेमाल हो रहा है।