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Rohtak News: मुंह के कैंसर की समय पर पहचान के लिए बनेगा एप
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Fri, 12 Jun 2026 10:01 PM IST
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33-मिडास की सफलता पर डॉ. माला कंबोज, स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल
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मुंह के कैंसर के लक्षण पहचानने में मदद करेगा नया डिजिटल हेल्थ ऐप
फोटो : 33
माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। मुंह में तीन सप्ताह से ज्यादा समय तक रहने वाला छाला, सफेद-लाल धब्बा, जलन या मुंह खोलने में दिक्कत हो तो दंत विशेषज्ञ से परामर्श करें। मुंह के कैंसर के लक्षणों को समय रहते पहचान कर पहले ही मरीज का इलाज कर जीवन बचाया जा सकता है। काम को आसान बनाने के लिए पीजीआई्रडीएस ऐप तैयार कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हर साल देश में मुंह के कैंसर के करीब 1.77 लाख नए मामले सामने आते हैं। इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक मरीज देरी से डॉक्टर तक पहुंचते हैं। बीमारी का समय पर पता चल जाए तो 90 प्रतिशत मरीजों के जीवन को बचाया जा सकता है। बीमार लोगों के फोटो जुटाए जा रहे हैं। इन्हें डिजिटल रूप में ऐप से जोड़ा जाएगा। इससे बीमारी के लक्षण को ऐप तुरंत पहचान सकेगा।
परियोजना का नेतृत्व पीजीआईडीएस के ओरल पैथोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. माला कंबोज कर रही हैं। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने मिडास प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए कहा कि पीजीआईडीएस का यह प्रयास डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
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तंबाकू से होने वाली बीमारियों का बोझ हरियाणा में ज्यादा है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट विशेष महत्व रखता है। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. रूप सिंह, निदेशक डॉ. एसके सिंघल, प्राचार्य डॉ. मनु राठी भी माैजूद रही।
डॉ. माला कंबोज ने बताया कि आईसीएमआर ने मिडास प्रोजेक्ट के लिए 65 लाख 92 हजार 853 रुपये की राशि स्वीकृत की है। अब तक इस प्रोजेक्ट में 700 से अधिक मरीजों को शामिल किया जा चुका है। हजारों उच्च गुणवत्ता वाली क्लिनिकल और हिस्टोपैथोलॉजिकल तस्वीरों का डाटाबेस तैयार किया गया है।
फोटो : 33
माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। मुंह में तीन सप्ताह से ज्यादा समय तक रहने वाला छाला, सफेद-लाल धब्बा, जलन या मुंह खोलने में दिक्कत हो तो दंत विशेषज्ञ से परामर्श करें। मुंह के कैंसर के लक्षणों को समय रहते पहचान कर पहले ही मरीज का इलाज कर जीवन बचाया जा सकता है। काम को आसान बनाने के लिए पीजीआई्रडीएस ऐप तैयार कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हर साल देश में मुंह के कैंसर के करीब 1.77 लाख नए मामले सामने आते हैं। इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक मरीज देरी से डॉक्टर तक पहुंचते हैं। बीमारी का समय पर पता चल जाए तो 90 प्रतिशत मरीजों के जीवन को बचाया जा सकता है। बीमार लोगों के फोटो जुटाए जा रहे हैं। इन्हें डिजिटल रूप में ऐप से जोड़ा जाएगा। इससे बीमारी के लक्षण को ऐप तुरंत पहचान सकेगा।
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परियोजना का नेतृत्व पीजीआईडीएस के ओरल पैथोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. माला कंबोज कर रही हैं। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने मिडास प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए कहा कि पीजीआईडीएस का यह प्रयास डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
तंबाकू से होने वाली बीमारियों का बोझ हरियाणा में ज्यादा है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट विशेष महत्व रखता है। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. रूप सिंह, निदेशक डॉ. एसके सिंघल, प्राचार्य डॉ. मनु राठी भी माैजूद रही।
डॉ. माला कंबोज ने बताया कि आईसीएमआर ने मिडास प्रोजेक्ट के लिए 65 लाख 92 हजार 853 रुपये की राशि स्वीकृत की है। अब तक इस प्रोजेक्ट में 700 से अधिक मरीजों को शामिल किया जा चुका है। हजारों उच्च गुणवत्ता वाली क्लिनिकल और हिस्टोपैथोलॉजिकल तस्वीरों का डाटाबेस तैयार किया गया है।