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Rohtak News: कुताना का सीईटीपी ठप, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लगाया 3.20 करोड़ का जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Mon, 15 Jun 2026 06:13 AM IST
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02-रोहतक ड्रेन नंबर आठ में डाला जा रहा औद्योगिक क्षेत्र का वेस्टेज। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। हिसार रोड औद्योगिक क्षेत्र के कुताना स्थित सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) पिछले छह साल से बंद पड़ा है। इसके कारण औद्योगिक अपशिष्ट का शोधन नहीं हो पा रहा है। अपशिष्ट को बिना शोधित किए ही सीधे ड्रेन-8 में छोड़ा जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एचएसआईआईडीसी पर 3.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही प्लांट की क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
कुताना में स्थापित सीईटीपी पिछले छह वर्षों से पूरी तरह ठप है। इसके बंद रहने से औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रासायनिक कचरे और दूषित पानी का शोधन नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप फैक्ट्रियों से निकलने वाला सारा प्रदूषित अपशिष्ट बिना किसी शोधन के शहर से गुजरने वाली ड्रेन-8 में डाला जा रहा है। नियमों के अनुसार किसी भी औद्योगिक अपशिष्ट को उपचार किए बिना सीधे प्राकृतिक जल स्रोतों या नालों में छोड़ना अवैध और दंडनीय है।
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ड्रेन के पानी का उपयोग करने वाले 18 गांवों के किसानों पर संकट
पूर्व सरपंच बलराज नांदल का कहना है कि औद्योगिक रसायनों से युक्त यह जहरीला पानी ड्रेन के माध्यम से आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। काहनौर क्षेत्र के करीब 15 गांवों तथा सुंदरपुर क्षेत्र के तीन गांवों के किसान इसी पानी से अपनी फसलों और सब्जियों की सिंचाई कर रहे हैं। इससे खेतों की उर्वरता प्रभावित हो रही है और लोगों में गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि उपायुक्त के दौरे के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। 4 जून को हुए निरीक्षण के बाद भी संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है।
वर्जन
उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जल में रासायनिक तथा अन्य प्रदूषक तत्वों की मात्रा अधिक है। इसी कारण सीईटीपी प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर पा रहा है। इस संबंध में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र लिखकर उद्योगों में ईटीपी अनिवार्य करने का आग्रह किया गया है ताकि उद्योगों में प्राथमिक उपचार के बाद पानी को सीईटीपी में भेजा जा सके और उसका प्रभावी शोधन हो सके। -संदीप कुमार, एसडीओ, एचएसआईआईडीसी।
वर्जन
एसईटीपी पूरी क्षमता अनुसार का काम नहीं कर रहा है। इसकी क्षमता अभी तीन एमएलडी है। इसे बढ़ा कर दस एमएलडी करने की तैयारी है। एसईटीपी के सही ढंग से कार्य नहीं करने पर बोर्ड ने एचएसआईआईडीसी पर 3.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। -दिनेश कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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फोटो : 4
ट्रीटमेंट प्लांट के अंदर ही वेस्टेज पड़ा है। इससे अभी तक नहीं उठाया गया है। प्लांट के रखरखाव और मरम्मत को लेकर फर्जी टेंडर हो रहे हैं। इस साल भी 58 लाख का टेंडर लगाया गया है जबकि प्लांट अभी तक बंद है। -बलराज नांदल, पूर्व सरपंच, कुताना।
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फोटो : 5
ड्रेन नंबर 8 का पानी काहनौर और सुंदरपुर तक किसानों का राहत देता है। किसान खेती के लिए पानी का इस्तेमाल करते हैं। छह साल से बंद पड़े ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर सीएम विंडो, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, डीसी व अन्य को शिकायत दी जा चुकी है। -सुरेंद्र सहरावत, किसान।
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फोटो : 6
एनजीटी को वर्ष 2016 में उद्योगों के वेस्टेज वाटर की शिकायत को लेकर अवगत करवाया था। उद्योगों का केमिकल खुले या ड्रेन में डालने से जमीन और पानी खराब हो रहा है। इसके बाद से सीईटीपी बनाया लेकिन वह अच्छी तरह काम ने करने से बंद पड़ा है। -अधिवक्ता सुरेंद्र नांदल।
रोहतक। हिसार रोड औद्योगिक क्षेत्र के कुताना स्थित सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) पिछले छह साल से बंद पड़ा है। इसके कारण औद्योगिक अपशिष्ट का शोधन नहीं हो पा रहा है। अपशिष्ट को बिना शोधित किए ही सीधे ड्रेन-8 में छोड़ा जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एचएसआईआईडीसी पर 3.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही प्लांट की क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
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कुताना में स्थापित सीईटीपी पिछले छह वर्षों से पूरी तरह ठप है। इसके बंद रहने से औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रासायनिक कचरे और दूषित पानी का शोधन नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप फैक्ट्रियों से निकलने वाला सारा प्रदूषित अपशिष्ट बिना किसी शोधन के शहर से गुजरने वाली ड्रेन-8 में डाला जा रहा है। नियमों के अनुसार किसी भी औद्योगिक अपशिष्ट को उपचार किए बिना सीधे प्राकृतिक जल स्रोतों या नालों में छोड़ना अवैध और दंडनीय है।
ड्रेन के पानी का उपयोग करने वाले 18 गांवों के किसानों पर संकट
पूर्व सरपंच बलराज नांदल का कहना है कि औद्योगिक रसायनों से युक्त यह जहरीला पानी ड्रेन के माध्यम से आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। काहनौर क्षेत्र के करीब 15 गांवों तथा सुंदरपुर क्षेत्र के तीन गांवों के किसान इसी पानी से अपनी फसलों और सब्जियों की सिंचाई कर रहे हैं। इससे खेतों की उर्वरता प्रभावित हो रही है और लोगों में गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि उपायुक्त के दौरे के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। 4 जून को हुए निरीक्षण के बाद भी संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है।
वर्जन
उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जल में रासायनिक तथा अन्य प्रदूषक तत्वों की मात्रा अधिक है। इसी कारण सीईटीपी प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर पा रहा है। इस संबंध में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र लिखकर उद्योगों में ईटीपी अनिवार्य करने का आग्रह किया गया है ताकि उद्योगों में प्राथमिक उपचार के बाद पानी को सीईटीपी में भेजा जा सके और उसका प्रभावी शोधन हो सके। -संदीप कुमार, एसडीओ, एचएसआईआईडीसी।
वर्जन
एसईटीपी पूरी क्षमता अनुसार का काम नहीं कर रहा है। इसकी क्षमता अभी तीन एमएलडी है। इसे बढ़ा कर दस एमएलडी करने की तैयारी है। एसईटीपी के सही ढंग से कार्य नहीं करने पर बोर्ड ने एचएसआईआईडीसी पर 3.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। -दिनेश कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
फोटो : 4
ट्रीटमेंट प्लांट के अंदर ही वेस्टेज पड़ा है। इससे अभी तक नहीं उठाया गया है। प्लांट के रखरखाव और मरम्मत को लेकर फर्जी टेंडर हो रहे हैं। इस साल भी 58 लाख का टेंडर लगाया गया है जबकि प्लांट अभी तक बंद है। -बलराज नांदल, पूर्व सरपंच, कुताना।
फोटो : 5
ड्रेन नंबर 8 का पानी काहनौर और सुंदरपुर तक किसानों का राहत देता है। किसान खेती के लिए पानी का इस्तेमाल करते हैं। छह साल से बंद पड़े ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर सीएम विंडो, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, डीसी व अन्य को शिकायत दी जा चुकी है। -सुरेंद्र सहरावत, किसान।
फोटो : 6
एनजीटी को वर्ष 2016 में उद्योगों के वेस्टेज वाटर की शिकायत को लेकर अवगत करवाया था। उद्योगों का केमिकल खुले या ड्रेन में डालने से जमीन और पानी खराब हो रहा है। इसके बाद से सीईटीपी बनाया लेकिन वह अच्छी तरह काम ने करने से बंद पड़ा है। -अधिवक्ता सुरेंद्र नांदल।

02-रोहतक ड्रेन नंबर आठ में डाला जा रहा औद्योगिक क्षेत्र का वेस्टेज। संवाद

02-रोहतक ड्रेन नंबर आठ में डाला जा रहा औद्योगिक क्षेत्र का वेस्टेज। संवाद

02-रोहतक ड्रेन नंबर आठ में डाला जा रहा औद्योगिक क्षेत्र का वेस्टेज। संवाद

02-रोहतक ड्रेन नंबर आठ में डाला जा रहा औद्योगिक क्षेत्र का वेस्टेज। संवाद