{"_id":"69ac8fa01965fce0060c50cc","slug":"an-example-of-womens-power-two-friends-campaign-empowered-50000-daughters-rohtak-news-c-17-1-roh1007-820524-2026-03-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिला शक्ति की मिसाल: दो सहेलियों की मुहिम ने 50 हजार बेटियों को किया सशक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिला शक्ति की मिसाल: दो सहेलियों की मुहिम ने 50 हजार बेटियों को किया सशक्त
विज्ञापन
विज्ञापन
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष....
-बेटी बचाओ अभियान की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवेश आर्य और पूनम आर्य देश-विदेश में फैला रहीं जागरूकता
रोहतक। एक कहावत है कि लड़की ही लड़की की दुश्मन होती है लेकिन रोहतक के रीठार गांव की प्रवेश आर्य (45) और सोनीपत के गोहाना की पूनम आर्य (45) ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया। दोनों सहेलियां मिलकर अब तक 50 हजार से अधिक लड़कियों को नैतिक शिक्षा, योग साधना के साथ-साथ आर्थिक रुप से सशक्त बनाने के लिए प्रशिक्षण दे चुकी हैं।
इतना ही नहीं वह विदेशों में भी भारतीय मूल की बेटियों को शिविर लगाकर प्रशिक्षित करती हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उनका यह अभियान समाज के लिए प्रेरणा बन चुका है। प्रवेश आर्य कहती हैं कि सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए बेटी बचाओ अभियान की शुरुआत वर्ष 2006 में स्वामी इंद्रवेश ने की थी।
उनके निधन के बाद दोस्त पूनम आर्य के साथ मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाया। उनका उद्देश्य है कि बेटियां नैतिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति से जुड़ें और आत्मविश्वास के साथ समाज में आगे बढ़ें।
प्रवेश आर्य बताती हैं कि शुरुआत में परिवार ने विरोध किया लेकिन बाद में पूरा सपोर्ट भी किया। उन्होंने बताया कि आर्य समाज की तरफ से गांव टिटौली स्थित स्वामी इंद्रवेश विद्यापीठ आश्रम में 2012 से समय समय पर प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं। यहां नैतिक शिक्षा, योग साधना, आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति से जुड़ने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
विदेश में भी पहुंचा अभियान
दोनों सहेलियां मिलकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों में भी एक सप्ताह के शिविरों के माध्यम से बेटियों को प्रशिक्षित करती हैं। इसके अलावा वह अमेरिका में भी शिविर आयोजित कर चुकी हैं। वर्ष 2017, 2024 और 2025 में वहां आयोजित शिविरों में भारतीय मूल की लड़कियों को उनके अधिकार व भारतीय संस्कृति के बारे में जागरूक किया।
कॉलेज से शुरू हुई दोस्ती
दोनों सहेलियों की दोस्ती रोहतक के महारानी किशोरी कॉलेज से शुरू हुई थी। प्रवेश आर्य ने चार साल तक महारानी किशोरी कॉलेज में अध्यापन का कार्य भी किया है। वहीं पूनम आर्य ने एमए की पढ़ाई की है।
लड़कों को भी देती हैं संस्कार
प्रवेश आर्य ने बताया कि वो चरित्र निर्माण शिविर के माध्यम से लड़कों को भी प्रशिक्षित करती हैं। शिविर में उन्हें बहन-बेटियों की रक्षा करना और महिलाओं का सम्मान करने के बारे में बताया जाता है।
प्रवेश आर्य बताती हैं कि वे चार भाई-बहन हैं। वह तीसरे नम्बर की हैं। उनके बड़े भाई शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं और छोटा भाई डेंटिस्ट है। उनके माता पिता भी अध्यापन के कार्य से जुड़े रहे हैं।
Trending Videos
-बेटी बचाओ अभियान की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवेश आर्य और पूनम आर्य देश-विदेश में फैला रहीं जागरूकता
रोहतक। एक कहावत है कि लड़की ही लड़की की दुश्मन होती है लेकिन रोहतक के रीठार गांव की प्रवेश आर्य (45) और सोनीपत के गोहाना की पूनम आर्य (45) ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया। दोनों सहेलियां मिलकर अब तक 50 हजार से अधिक लड़कियों को नैतिक शिक्षा, योग साधना के साथ-साथ आर्थिक रुप से सशक्त बनाने के लिए प्रशिक्षण दे चुकी हैं।
इतना ही नहीं वह विदेशों में भी भारतीय मूल की बेटियों को शिविर लगाकर प्रशिक्षित करती हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उनका यह अभियान समाज के लिए प्रेरणा बन चुका है। प्रवेश आर्य कहती हैं कि सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए बेटी बचाओ अभियान की शुरुआत वर्ष 2006 में स्वामी इंद्रवेश ने की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
उनके निधन के बाद दोस्त पूनम आर्य के साथ मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाया। उनका उद्देश्य है कि बेटियां नैतिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति से जुड़ें और आत्मविश्वास के साथ समाज में आगे बढ़ें।
प्रवेश आर्य बताती हैं कि शुरुआत में परिवार ने विरोध किया लेकिन बाद में पूरा सपोर्ट भी किया। उन्होंने बताया कि आर्य समाज की तरफ से गांव टिटौली स्थित स्वामी इंद्रवेश विद्यापीठ आश्रम में 2012 से समय समय पर प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं। यहां नैतिक शिक्षा, योग साधना, आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति से जुड़ने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
विदेश में भी पहुंचा अभियान
दोनों सहेलियां मिलकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों में भी एक सप्ताह के शिविरों के माध्यम से बेटियों को प्रशिक्षित करती हैं। इसके अलावा वह अमेरिका में भी शिविर आयोजित कर चुकी हैं। वर्ष 2017, 2024 और 2025 में वहां आयोजित शिविरों में भारतीय मूल की लड़कियों को उनके अधिकार व भारतीय संस्कृति के बारे में जागरूक किया।
कॉलेज से शुरू हुई दोस्ती
दोनों सहेलियों की दोस्ती रोहतक के महारानी किशोरी कॉलेज से शुरू हुई थी। प्रवेश आर्य ने चार साल तक महारानी किशोरी कॉलेज में अध्यापन का कार्य भी किया है। वहीं पूनम आर्य ने एमए की पढ़ाई की है।
लड़कों को भी देती हैं संस्कार
प्रवेश आर्य ने बताया कि वो चरित्र निर्माण शिविर के माध्यम से लड़कों को भी प्रशिक्षित करती हैं। शिविर में उन्हें बहन-बेटियों की रक्षा करना और महिलाओं का सम्मान करने के बारे में बताया जाता है।
प्रवेश आर्य बताती हैं कि वे चार भाई-बहन हैं। वह तीसरे नम्बर की हैं। उनके बड़े भाई शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं और छोटा भाई डेंटिस्ट है। उनके माता पिता भी अध्यापन के कार्य से जुड़े रहे हैं।