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Rohtak News: डिजिटल के युग में पूर्व सैनिकों को अब भी जाना पड़ रहा कैंटीन

संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Thu, 25 Jun 2026 06:39 AM IST
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In the digital age, ex-servicemen still have to visit canteens
18-विजयदीप पंघाल, पूर्व सैनिक।
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संवाद न्यूज एजेंसी

रोहतक। तकनीक हर घर तक पहुंच गई है। अब लोग यूपीआई से सब्जी का भुगतान कर रहे हैं तो एप से दवाइयां मंगवा रहे हैं मगर देश की रक्षा करने वाले सैनिक और उनके परिवार आज भी कैंटीन के चक्कर काट रहे हैं। पूर्व सैनिकों ने सवाल उठाया है कि डिजिटल युग में भी उन्हें होम डिलीवरी क्यों नहीं मिलती?
सैनिकों के लिए अभी तक होम डिलीवरी की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। इसको लेकर पूर्व सैनिकों का कहना है कि बुजुर्ग सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए कैंटीन तक जाना अब आसान नहीं रहा।
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उम्र, बीमारी और लंबी दूरी के कारण कई बार उन्हें बस-ऑटो बदलकर कैंटीन पहुंचना पड़ता है। लाइन में लगकर राशन, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान लेना पड़ता है। पूर्व सैनिकों की मांग है कि उनके लिए होम डिलीवरी शुरू की जाए। अगर घर पर ही खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान पहुंच जाए तो उनको बड़ी राहत मिलेगी।
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वर्जन
अभी मंत्रालय और सैनिक बोर्ड की ओर से होम डिलीवरी की सुविधा को लेकर कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। अभी कैंटीन स्मार्ट कार्ड बेस्ड है। इसके लिए सैनिक कैंटीन में आकर सामान खरीदते हैं। जैसे ही कोई आदेश जारी होगा उसे लागू किया जाएगा। - कर्नल समुंद्र कुमार कुंडू, मैनेजर, एक्स सर्विसमैन कैंटीन।
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फोटो : 18
होम डिलीवरी की सुविधा देने से कैंटीन का रेवेन्यू भी बढ़ेगा। हर कोई कैंटीन तक पहुंचने में सक्षम नहीं है। हैंडलिंग की समस्या भी दूर होगी। अगर सामान्य नागरिक के लिए होम डिलीवरी की पहुंच है तो सैनिक के लिए क्यों नहीं। -विजयदीप पंघाल, पूर्व सैनिक।
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फोटो : 19
होम डिलीवरी की सुविधा मिल जाए तो सैनिकों और उनके परिजनों को काफी राहत मिलेगी। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा और समय की बचत होगी। साथ ही एक्स सर्विसमैन कैंटीन की कार्यप्रणाली में भी सुधार होगा। -अत्तर सिंह कादियान, पूर्व सैनिक, नौसेना।
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फोटो : 20
बुजुर्ग सैनिक कैंटीन तक पहुंचने में असमर्थ होते हैं। ऐसी स्थिति में पूर्व सैनिकों व सैनिक परिवारों के लिए होम डिलीवरी सुविधा शत-प्रतिशत फायदेमंद होगी। इससे वह घर पर ही अपने लिए सामान मंगवा सकेंगे। -कैप्टन जगवीर मलिक, प्रवक्ता, पूर्व सैनिक संघ।

18-विजयदीप पंघाल, पूर्व सैनिक।

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18-विजयदीप पंघाल, पूर्व सैनिक।

18-विजयदीप पंघाल, पूर्व सैनिक।

18-विजयदीप पंघाल, पूर्व सैनिक।

18-विजयदीप पंघाल, पूर्व सैनिक।

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