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Rohtak News: ईरान-इस्राइल युद्ध...कच्चा माल नहीं मिलने से रोहतक का नट बोल्ट कारोबार प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 10 Mar 2026 04:26 AM IST
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24-रोहतक की नट बोल्ट इंडस्ट्री में काम करते मजदूर। स्रोत : उद्यमी
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रोहित राठौर
रोहतक। ईरान-इस्राइल युद्ध की लपटें रोहतक के उद्योगों तक पहुंचने लगी हैं। नट बोल्ट उद्यमियों का यूरोप की ओर से आयात किया जा रहा कच्चा माल बीच रास्ते में फंस गया है। युद्ध के कारण अब यह माल लंबे मार्ग से घूमकर यहां आ रहा है। इससे उद्यमियों का खर्च भी बढ़ गया है। हालांकि, अभी इंडस्ट्री के काम पर असर कम दिख रहा है।
एलपीएस बोसार्ड के प्रबंध निदेशक राजेश जैन ने बताया कि यूरोप से करीब 1.5 करोड़ का कच्चा माल जहाज के माध्यम से सप्लाई होना है। बेल्जियम की ओर से जहाज आना था जोकि बीच रास्ते में फंसा हुआ है। युद्ध की स्थिति के कारण निर्यात खर्च में भी साढ़े तीन गुना तक की बढ़ोतरी हो गई है। निर्यात व आयात खर्च बढ़ने से जनरेटर की भी कोस्ट बढ़ोतरी देखी गई।
राजेश जैन ने बताया कि इंडस्ट्री में नट बोल्ट से संबंधित कच्चा माल (फिनिश गुड) आना था। विदेश से डिफेंशन और एयरोस्पेस का लगभग कच्चा माल आयात ही होता है, क्योंकि भारत में स्पेशल स्टेनलेस स्टील नहीं बनता है। तेल की कीमत बढ़ने से हर माल पर खर्च बढ़ेगा। भविष्य में व्यापार पर शत-प्रतिशत प्रभाव पड़ेगा। (संवाद)
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फोटो : 26
दुबई, ईरान व इराक से ऑर्डर मिलने हुए बंद
माइक्रोन ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक करण विज ने बताया कि करीब 500 टन तैयार नट बोल्ट यूरोप और अमेरिका में पहुंचने हैं। ईरानी समुद्री मार्ग से जाने वाला माल अफ्रीका से होते हुए जा रहा है। इस बीच निर्यात खर्च अधिक बढ़ गया है। एक लाख रुपये में भेजा जाने वाला एक कंटेनर (20 टन)
3.5 लाख रुपये
में भेजा जा रहा है। अब हमने करीब 500 टन माल अतिरिक्त खर्च से यूरोप में निर्यात किया है। 15 दिन में पहुंचने वाला यह माल डेढ़ महीने में पहुंचेगा। साथ ही, दुबई, ईरान व इराक के ऑर्डर बंद हो गए हैं।
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एलपीएस बोसार्ड के प्रबंध निदेशक राजेश जैन ने बताया कि यूरोप से करीब 1.5 करोड़ का कच्चा माल जहाज के माध्यम से सप्लाई होना है। बेल्जियम की ओर से जहाज आना था जोकि बीच रास्ते में फंसा हुआ है। युद्ध की स्थिति के कारण निर्यात खर्च में भी साढ़े तीन गुना तक की बढ़ोतरी हो गई है। निर्यात व आयात खर्च बढ़ने से जनरेटर की भी कोस्ट बढ़ोतरी देखी गई।
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राजेश जैन ने बताया कि इंडस्ट्री में नट बोल्ट से संबंधित कच्चा माल (फिनिश गुड) आना था। विदेश से डिफेंशन और एयरोस्पेस का लगभग कच्चा माल आयात ही होता है, क्योंकि भारत में स्पेशल स्टेनलेस स्टील नहीं बनता है। तेल की कीमत बढ़ने से हर माल पर खर्च बढ़ेगा। भविष्य में व्यापार पर शत-प्रतिशत प्रभाव पड़ेगा। (संवाद)
फोटो : 26
दुबई, ईरान व इराक से ऑर्डर मिलने हुए बंद
माइक्रोन ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक करण विज ने बताया कि करीब 500 टन तैयार नट बोल्ट यूरोप और अमेरिका में पहुंचने हैं। ईरानी समुद्री मार्ग से जाने वाला माल अफ्रीका से होते हुए जा रहा है। इस बीच निर्यात खर्च अधिक बढ़ गया है। एक लाख रुपये में भेजा जाने वाला एक कंटेनर (20 टन)
3.5 लाख रुपये
में भेजा जा रहा है। अब हमने करीब 500 टन माल अतिरिक्त खर्च से यूरोप में निर्यात किया है। 15 दिन में पहुंचने वाला यह माल डेढ़ महीने में पहुंचेगा। साथ ही, दुबई, ईरान व इराक के ऑर्डर बंद हो गए हैं।

24-रोहतक की नट बोल्ट इंडस्ट्री में काम करते मजदूर। स्रोत : उद्यमी

24-रोहतक की नट बोल्ट इंडस्ट्री में काम करते मजदूर। स्रोत : उद्यमी