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UP: यूपी में गेंहू व उत्पादों के 1600 करोड़ के निर्यात पर युद्ध का साया, तीन साल बाद मिला था मौका; सौदे रद्द

अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Tue, 10 Mar 2026 09:41 AM IST
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सार

यूपी में गेंहू व उत्पादों के 1600 करोड़ के निर्यात पर पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध का साया पड़ गया है। तीन साल बाद निर्यात का फिर मौका मिला था, लेकिन युद्ध के चलते सौदे रद्द हो गए हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर...

UP export of wheat and produce worth 1,600 crore cancel due to war after three-year opportunity
निर्यात के सौदे रद्द (Demo) - फोटो : Istock
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विस्तार

उत्तर प्रदेश में तीन साल बाद शुरू होने जा रहे गेहूं और गेहूं से बने उत्पादों (आटा, मैदा, सूजी) के निर्यात पर पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध का साया पड़ गया है। भारत सरकार ने 2026 में सीमित मात्रा में गेहूं और गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम, बीमा लागत और शिपिंग संकट के कारण खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात फिर से अनिश्चितता में घिर गया है। इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के गेहूं व्यापार और मिलिंग उद्योग पर पड़ा है।

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निर्यातक संगठनों के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और युद्ध जोखिम बीमा के महंगे होने से कई नए निर्यात सौदे फिलहाल टाल दिए गए हैं। भारत सरकार ने फरवरी 2026 में 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दी थी। यह कदम 2022 में लगे प्रतिबंध के बाद निर्यात को आंशिक रूप से फिर खोलने जैसा था। सरकार का मानना था कि बेहतर उत्पादन और पर्याप्त भंडार के कारण यह निर्यात किसानों को बेहतर कीमत दिलाने में मदद करेगा। 

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यूपी में आटा-मैदा मिलों का बड़ा नेटवर्क

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के महासचिव और यूपी रोलर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक बजाज ने कहा कि उत्तर प्रदेश सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्यों में है। यहां आटा-मैदा मिलों का बड़ा नेटवर्क है। गेहूं आधारित उत्पादों के निर्यात में प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 25-35 प्रतिशत तक है।


उन्होंने कहा कि यूपी से ही 1500 से 1700 करोड़ रुपये का निर्यात के दरवाजे खुल गए थे। इनका सबसे ज्यादा लाभ गेहूं आधारित प्रोसेसिंग और निर्यात के प्रमुख नेटवर्क क्षेत्र कानपुर, आगरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, बरेली सहित कम से कम 20 जिलों को मिलता। 

आटा-मैदा उद्योग को लग सकता बड़ा झटका

इन क्षेत्रों की मिलें खाड़ी देशों यूएई, सऊदी अरब, ओमान, कुवैत और कतर में आटा, मैदा और सूजी की आपूर्ति करती रही हैं। आशंका जताई कि यदि युद्ध जारी रहा तो शिपिंग लागत 40-50% तक और बीमा प्रीमियम दोगुना हो सकता है। ऐसे में तीन साल बाद खुलने जा रहा निर्यात बाजार में उत्तर प्रदेश के आटा-मैदा उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है।

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