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Rohtak News: एमडीयू प्रो. गिल की फाइल पहुंची वीसी के पास, बोले-तथ्य देखकर लूंगा फैसला
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रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशंस विभाग के निलंबित प्रोफेसर नसीब सिंह गिल की पत्रावली कुलपति (वीसी) प्रो. सोमनाथ सचदेवा के पास पहुंच गई है। वीसी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि तथ्य देखकर जल्द ही इस पर निर्णय लूूंगा।
प्रो. गिल की नियुक्ति के खिलाफ आईं शिकायतों की जांच के लिए पूर्व वीसी प्रो. राजबीर सिंह ने एक सदस्यीय डॉ. पी बापैया की अध्यक्षता में फैक्ट फाइंडिंग इनक्वायरी कमेटी गठित की थी। 10 जनवरी को सौंपी रिपोर्ट में डॉ. बापैया ने कहा है कि 37 साल पहले 1989 में चयनित हुए प्रो. गिल लेक्चरर की योग्यता नहीं रखते थे।
उस वक्त एमडीयू की ओर से निकाले गए विज्ञापन (संख्या 7/89) में लेक्चरर के लिए पीएचडी या एमफिल की शर्त रखी गई थी। प्रो. गिल और उनके साथ चयनित राजिंदर सिंह यह योग्यता नहीं रखते थे। एक पद के सापेक्ष दो लेक्चरर की भर्ती भी गलत हुई। अब तो इनकी नियुक्ति के दस्तावेज भी यूनिवर्सिटी रिकॉर्ड से गायब हैं।
फैक्ट फाइंडिंग इनक्वायरी रिपोर्ट में योग्यता नहीं रखने की बात सामने आने के बाद प्रो. गिल पर बर्खास्तगी की भी तलवार लटक रही है। वहीं, प्रो. गिल का दावा है कि उनका चयन पूरी तरह से सही और नियमानुसार है।
प्रोफेसरों का निलंबन रद्द करने की मांग कर चुका है प्रतिनिधिमंडल
एमडीयू शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को डॉ. विकास सिवाच और प्रो. नसीब सिंह गिल के निलंबन को रद्द करने की मांग उठाते हुए रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपा था। कहा था, इनके लंबे समय तक निलंबन से शिक्षकों को तो नुकसान हो ही रहा है, विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल और प्रतिष्ठा भी प्रभावित हो रही है।
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वर्जन
कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रो. गिल की जांच रिपोर्ट और निलंबन के खिलाफ प्रत्यावेदन मेरे पास आया है। फिलहाल तो फाइल देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। इतना तय है कि तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर जो सही होगा, उसी के अनुसार निर्णय लूंगा। -प्रो. सोमनाथ सचदेवा, कुलपति, एमडीयू।
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अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने पर हुआ निलंबन : प्रो. गिल
रोहतक। प्रो. नसीब सिंह गिल का कहना है कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उनका निलंबन हुआ है, न कि फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के कारण। उन्होंने पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन को जानकारी दी थी लेकिन सुनवाई नहीं करने पर सरकार को सच लिख दिया। इसी से खफा होकर कार्रवाई की गई है।
दरअसल, फैक्ट फाइंडिंग इनक्वायरी रिपोर्ट को तत्कालीन वीसी प्रो. राजबीर सिंह ने ईसी की बैठक में रखने का निर्देश दिया था। इस पर प्रो. गिल ने 7 फरवरी को वीसी व कुलसचिव को पत्र लिखकर कहा कि ईसी में उनका एजेंडा तथ्यों के साथ लाया जाए या इसे वापस लिया जाए। 9 फरवरी की इनकी समय सीमा तक विवि ने कोई जवाब नहीं दिया।
उन्होंंने 11 फरवरी को सरकार को पत्र लिखकर न्याय दिलाने की अपील की। 15 फरवरी को ईसी सदस्यों को भी पत्र लिखा। ईसी बैठक से पहले ही वीसी ने प्रो. गिल, डॉ. विकास सिवाच और रजिस्ट्रार डॉ. कृष्ण कांत को निलंबित कर दिया। कुलाधिपति ने रजिस्ट्रार का निलंबन और 18 फरवरी को तय ईसी बैठक रद्द कर दी थी। सो, प्रो. गिल का मुद्दा भी वहां नहीं गया।
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प्रो. गिल की नियुक्ति के खिलाफ आईं शिकायतों की जांच के लिए पूर्व वीसी प्रो. राजबीर सिंह ने एक सदस्यीय डॉ. पी बापैया की अध्यक्षता में फैक्ट फाइंडिंग इनक्वायरी कमेटी गठित की थी। 10 जनवरी को सौंपी रिपोर्ट में डॉ. बापैया ने कहा है कि 37 साल पहले 1989 में चयनित हुए प्रो. गिल लेक्चरर की योग्यता नहीं रखते थे।
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उस वक्त एमडीयू की ओर से निकाले गए विज्ञापन (संख्या 7/89) में लेक्चरर के लिए पीएचडी या एमफिल की शर्त रखी गई थी। प्रो. गिल और उनके साथ चयनित राजिंदर सिंह यह योग्यता नहीं रखते थे। एक पद के सापेक्ष दो लेक्चरर की भर्ती भी गलत हुई। अब तो इनकी नियुक्ति के दस्तावेज भी यूनिवर्सिटी रिकॉर्ड से गायब हैं।
फैक्ट फाइंडिंग इनक्वायरी रिपोर्ट में योग्यता नहीं रखने की बात सामने आने के बाद प्रो. गिल पर बर्खास्तगी की भी तलवार लटक रही है। वहीं, प्रो. गिल का दावा है कि उनका चयन पूरी तरह से सही और नियमानुसार है।
प्रोफेसरों का निलंबन रद्द करने की मांग कर चुका है प्रतिनिधिमंडल
एमडीयू शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को डॉ. विकास सिवाच और प्रो. नसीब सिंह गिल के निलंबन को रद्द करने की मांग उठाते हुए रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपा था। कहा था, इनके लंबे समय तक निलंबन से शिक्षकों को तो नुकसान हो ही रहा है, विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल और प्रतिष्ठा भी प्रभावित हो रही है।
वर्जन
कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रो. गिल की जांच रिपोर्ट और निलंबन के खिलाफ प्रत्यावेदन मेरे पास आया है। फिलहाल तो फाइल देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। इतना तय है कि तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर जो सही होगा, उसी के अनुसार निर्णय लूंगा। -प्रो. सोमनाथ सचदेवा, कुलपति, एमडीयू।
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने पर हुआ निलंबन : प्रो. गिल
रोहतक। प्रो. नसीब सिंह गिल का कहना है कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उनका निलंबन हुआ है, न कि फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के कारण। उन्होंने पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन को जानकारी दी थी लेकिन सुनवाई नहीं करने पर सरकार को सच लिख दिया। इसी से खफा होकर कार्रवाई की गई है।
दरअसल, फैक्ट फाइंडिंग इनक्वायरी रिपोर्ट को तत्कालीन वीसी प्रो. राजबीर सिंह ने ईसी की बैठक में रखने का निर्देश दिया था। इस पर प्रो. गिल ने 7 फरवरी को वीसी व कुलसचिव को पत्र लिखकर कहा कि ईसी में उनका एजेंडा तथ्यों के साथ लाया जाए या इसे वापस लिया जाए। 9 फरवरी की इनकी समय सीमा तक विवि ने कोई जवाब नहीं दिया।
उन्होंंने 11 फरवरी को सरकार को पत्र लिखकर न्याय दिलाने की अपील की। 15 फरवरी को ईसी सदस्यों को भी पत्र लिखा। ईसी बैठक से पहले ही वीसी ने प्रो. गिल, डॉ. विकास सिवाच और रजिस्ट्रार डॉ. कृष्ण कांत को निलंबित कर दिया। कुलाधिपति ने रजिस्ट्रार का निलंबन और 18 फरवरी को तय ईसी बैठक रद्द कर दी थी। सो, प्रो. गिल का मुद्दा भी वहां नहीं गया।