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माइक्रोबायोम से इम्यूनोथेरेपी को मिल सकती है मजबूती : डॉ. अमित ग्रोवर
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रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के बायोकेमिस्ट्री विभाग की ओर से सोमवार को ब्लड, बग्स एंड बायोलॉजी : डिकोडिंग द एजिंग एक्सिस विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। इसमें एस्ट्राजेनेका, कैम्ब्रिज (यूके) के चीफ साइंटिस्ट (ऑन्कोलॉजी रिसर्च) डॉ. अमित ग्रोवर ने बढ़ती उम्र के साथ रक्त, प्रतिरक्षा तंत्र और आंतों के माइक्रोबायोम में होने वाले बदलावों पर जानकारी दी।
डॉ. ग्रोवर ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में हल्की लेकिन लगातार रहने वाली सूजन (इन्फ्लेमेजिंग) बढ़ती है, जिससे संक्रमण और पुरानी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र में एडाप्टिव इम्यूनिटी कमजोर होने लगती है और माइलॉयड कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाती है। माइक्रोबायोम को बेहतर तरीके से समझकर इम्यूनोथेरेपी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष प्रो. एनएस चौहान ने की। इस अवसर पर प्रो. विजय कुमार, प्रो. रितु पसरीजा, प्रो. सर्वजीत सिंह गिल, प्रो. नवीन वर्मा, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. रश्मि भारद्वाज, प्रो. सपना शर्मा, निदेशक जनसंपर्क सुनीत मुखर्जी सहित शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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डॉ. ग्रोवर ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में हल्की लेकिन लगातार रहने वाली सूजन (इन्फ्लेमेजिंग) बढ़ती है, जिससे संक्रमण और पुरानी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र में एडाप्टिव इम्यूनिटी कमजोर होने लगती है और माइलॉयड कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाती है। माइक्रोबायोम को बेहतर तरीके से समझकर इम्यूनोथेरेपी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
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कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष प्रो. एनएस चौहान ने की। इस अवसर पर प्रो. विजय कुमार, प्रो. रितु पसरीजा, प्रो. सर्वजीत सिंह गिल, प्रो. नवीन वर्मा, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. रश्मि भारद्वाज, प्रो. सपना शर्मा, निदेशक जनसंपर्क सुनीत मुखर्जी सहित शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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