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Rohtak News: निपुण हरियाणा से बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ी
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फोटो नंबर-25प्राथमिक पाठशाला में शिक्षा ग्रहण करते बच्चे। संवाद
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नारनौल।
जिले के प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की सीखने की क्षमता को लेकर राहत भरी तस्वीर सामने आई हैं। निपुण हरियाणा अभियान के तहत किए गए नए आकलन में यह स्पष्ट हुआ है कि अब नौनिहाल पढ़ने-लिखने में पहले से ज्यादा सक्षम हो रहे हैं।
खास बात यह है कि इस बार केवल आकड़ों तक सीमित न रहकर शिक्षा विभाग ने कमजोर कड़ियों की पहचान कर सुधार की दिशा में ठोस रणनीति भी तैयार की है। हाल ही में आयोजित सेंसेस 2.0 और थर्ड पार्टी असेसमेंट के परिणामों में ग्रेड-1 से 3 तक के विद्यार्थियों में साक्षरता और गणना क्षमता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।
जहां पहले कई छात्र बुनियादी स्तर पर कमजोर थे, वहीं अब बड़ी संख्या में बच्चे ए और बी कैटेगरी में पहुंचे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि कक्षाओं में शिक्षण पद्धति और निगरानी प्रणाली का असर दिखने लगा है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुछ वर्गों में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं। खासकर सी कैटेगरी के विद्यार्थियों को ऊपर लाने के लिए विशेष फोकस की जरूरत बताई गई है। इसके लिए विभाग ने स्कूल-वार रणनीति बनाते हुए शिक्षकों को लक्षित दिशा-निर्देश दिए हैं।
शिक्षा विशेषज्ञ पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी सुनील दत्त के अनुसार, यह बदलाव केवल आकड़ों का सुधार नहीं बल्कि सरकारी स्कूलों में बढ़ते विश्वास का संकेत भी है। यदि इसी तरह सतत प्रयास जारी रहे तो आने वाले समय में जिले के प्राथमिक शिक्षा स्तर में और अधिक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
वर्जन
अब सेंसस डेटा को केवल रिपोर्ट तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि इसके आधार पर आगामी कार्ययोजना तैयार कर प्रत्येक बच्चे तक बुनियादी शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी। सेंसस डाटा एकत्रित कर कार्ययोजना को इस तरह तैयार करना है कि प्रत्येक बच्चा कक्षा के अनुरूप मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता के निपुण लक्ष्य प्राप्त कर सके।
डॉ. विक्रम सिंह, जिला कोआर्डिनेटर एफएलएन, नारनौल।
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जिले के प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की सीखने की क्षमता को लेकर राहत भरी तस्वीर सामने आई हैं। निपुण हरियाणा अभियान के तहत किए गए नए आकलन में यह स्पष्ट हुआ है कि अब नौनिहाल पढ़ने-लिखने में पहले से ज्यादा सक्षम हो रहे हैं।
खास बात यह है कि इस बार केवल आकड़ों तक सीमित न रहकर शिक्षा विभाग ने कमजोर कड़ियों की पहचान कर सुधार की दिशा में ठोस रणनीति भी तैयार की है। हाल ही में आयोजित सेंसेस 2.0 और थर्ड पार्टी असेसमेंट के परिणामों में ग्रेड-1 से 3 तक के विद्यार्थियों में साक्षरता और गणना क्षमता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।
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जहां पहले कई छात्र बुनियादी स्तर पर कमजोर थे, वहीं अब बड़ी संख्या में बच्चे ए और बी कैटेगरी में पहुंचे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि कक्षाओं में शिक्षण पद्धति और निगरानी प्रणाली का असर दिखने लगा है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुछ वर्गों में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं। खासकर सी कैटेगरी के विद्यार्थियों को ऊपर लाने के लिए विशेष फोकस की जरूरत बताई गई है। इसके लिए विभाग ने स्कूल-वार रणनीति बनाते हुए शिक्षकों को लक्षित दिशा-निर्देश दिए हैं।
शिक्षा विशेषज्ञ पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी सुनील दत्त के अनुसार, यह बदलाव केवल आकड़ों का सुधार नहीं बल्कि सरकारी स्कूलों में बढ़ते विश्वास का संकेत भी है। यदि इसी तरह सतत प्रयास जारी रहे तो आने वाले समय में जिले के प्राथमिक शिक्षा स्तर में और अधिक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
वर्जन
अब सेंसस डेटा को केवल रिपोर्ट तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि इसके आधार पर आगामी कार्ययोजना तैयार कर प्रत्येक बच्चे तक बुनियादी शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी। सेंसस डाटा एकत्रित कर कार्ययोजना को इस तरह तैयार करना है कि प्रत्येक बच्चा कक्षा के अनुरूप मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता के निपुण लक्ष्य प्राप्त कर सके।
डॉ. विक्रम सिंह, जिला कोआर्डिनेटर एफएलएन, नारनौल।
